
एलपीजी संकट का असर शादियों पर: दिल्ली में बढ़ा कोर्ट मैरिज का ट्रेंड, सादगीपूर्ण विवाह बन रहे नई पसंद
समाचार क्यारी (दिल्ली)
राजधानी दिल्ली में इन दिनों एलपीजी सिलिंडर की कमी का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अब शादियों जैसे बड़े सामाजिक आयोजनों को भी प्रभावित कर रहा है। गैस की कमी और बढ़ती लागत के चलते बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। नतीजतन, लोग अब पारंपरिक भव्य शादियों से हटकर सादगीपूर्ण विवाह और कोर्ट मैरिज जैसे विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

शादी के मेन्यू से लेकर आयोजन तक पर असर
एलपीजी की कमी का सबसे बड़ा असर शादी के खाने और कैटरिंग पर पड़ा है। बड़े आयोजनों में जहां सैकड़ों मेहमानों के लिए खाना तैयार किया जाता है, वहां गैस की अनुपलब्धता एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है।
कई कैटरर्स ने बताया कि उन्हें समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके कारण वे बड़े ऑर्डर लेने से बच रहे हैं। कुछ स्थानों पर डीजल भट्टी का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन इससे लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है।
बैंक्वेट हॉल भी हो रहे प्रभावित
एलपीजी संकट के कारण बैंक्वेट हॉल संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई हॉल में गैस की कमी के कारण बुकिंग रद्द करनी पड़ रही है या सीमित मेन्यू के साथ काम चलाना पड़ रहा है।
कुछ हॉल संचालक डीजल या अन्य विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। इससे शादी का बजट काफी बढ़ जाता है, जो कई परिवारों के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है।
कोर्ट मैरिज की ओर बढ़ता रुझान
इन परिस्थितियों में अब लोग सरल और किफायती विकल्प के रूप में कोर्ट मैरिज को अपना रहे हैं। पहले जहां एक दिन में औसतन 15 से 20 शादियां रजिस्टर होती थीं, वहीं अब यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
दिल्ली के साकेत और तीस हजारी कोर्ट में पिछले 20 दिनों के दौरान कोर्ट मैरिज के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वकीलों का कहना है कि एलपीजी संकट के चलते यह ट्रेंड और तेजी से बढ़ रहा है।
मंदिरों में सादगीपूर्ण विवाह
कोर्ट मैरिज के बाद कई जोड़े सीमित संख्या में परिजनों के साथ आर्य समाज मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों पर सादगी से विवाह कर रहे हैं। इसमें खर्च भी कम होता है और आयोजन भी आसानी से हो जाता है।
इस तरह के विवाह में न तो बड़े बैंक्वेट हॉल की जरूरत होती है और न ही भारी कैटरिंग व्यवस्था की, जिससे एलपीजी की समस्या का असर कम पड़ता है।
खर्च से बचने की कोशिश
परिवारों का कहना है कि एक ओर गैस की कमी है, तो दूसरी ओर महंगे सिलिंडर और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के कारण शादी का खर्च काफी बढ़ गया है। ऐसे में सादगी से शादी करना ही बेहतर विकल्प नजर आ रहा है।
कई परिवार अब अनावश्यक खर्चों को कम कर केवल जरूरी रस्मों तक ही शादी को सीमित कर रहे हैं।
वास्तविक उदाहरण: यश शर्मा की शादी
हाल ही में यश शर्मा नामक युवक ने भी इसी वजह से कोर्ट मैरिज का रास्ता अपनाया। उनके पिता आशीष शर्मा ने बताया कि बेटे की सगाई एक साल पहले हुई थी और शादी 27 मार्च को तय थी।
लेकिन एलपीजी की कमी के कारण उन्हें कोई बैंक्वेट हॉल नहीं मिल सका और कैटरिंग की व्यवस्था भी संभव नहीं हो पाई। अंततः उन्होंने कोर्ट मैरिज करवाई और सीमित रूप में विवाह संपन्न किया।
वकीलों का क्या कहना है
साकेत कोर्ट की एडवोकेट रेहा भार्गव के अनुसार, “पहले जहां एक दिन में करीब 18 शादियां रजिस्टर होती थीं, अब यह संख्या दोगुनी हो गई है।”
वहीं तीस हजारी कोर्ट की मैट्रिमोनियल वकील अदिति द्राल का कहना है कि, “एलपीजी की कमी और बढ़ते खर्च के कारण लोग पारंपरिक शादियों से हटकर सिविल मैरिज को प्राथमिकता दे रहे हैं।”
बदलती सोच और सामाजिक प्रभाव
एलपीजी संकट ने लोगों की सोच में भी बदलाव लाया है। अब लोग दिखावे और भव्यता के बजाय सादगी और व्यावहारिकता को प्राथमिकता देने लगे हैं।
यह बदलाव केवल मजबूरी नहीं, बल्कि एक नई सोच का संकेत भी हो सकता है, जहां लोग अनावश्यक खर्चों से बचकर जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों को सरल तरीके से लेना चाहते हैं।
भविष्य में बढ़ सकता है यह ट्रेंड
यदि एलपीजी की समस्या जल्द हल नहीं होती है, तो आने वाले समय में यह ट्रेंड और भी तेजी से बढ़ सकता है। पारंपरिक शादियों की जगह सादगीपूर्ण और सीमित आयोजनों का चलन आम हो सकता है।
इससे न केवल खर्च कम होगा, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
इस स्थिति में सरकार और संबंधित विभागों के लिए जरूरी है कि वे एलपीजी की आपूर्ति को सुचारू बनाएं, ताकि आम लोगों को इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े।
यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर केवल शादियों पर ही नहीं, बल्कि अन्य सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली में एलपीजी संकट ने शादियों के स्वरूप को बदलकर रख दिया है। जहां पहले भव्य आयोजन और बड़े बैंक्वेट हॉल शादी का हिस्सा होते थे, वहीं अब लोग कोर्ट मैरिज और सादगीपूर्ण विवाह को प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह बदलाव एक ओर जहां मजबूरी का परिणाम है, वहीं दूसरी ओर यह समाज में बदलती सोच और व्यवहार का भी प्रतीक है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ट्रेंड स्थायी रूप लेता है या फिर एलपीजी संकट खत्म होते ही लोग फिर से पारंपरिक शादियों की ओर लौटते हैं।




