हरियाणा

दहेज का दानव: कब रुकेगा बेटियों का सौदा?

समाचार क्यारी मुख्यालय में हुआ दहेज पर जागरूक चर्चा का आयोजन

दहेज का दानव: कब रुकेगा बेटियों का सौदा?

 

 समाचार क्यारी मुख्यालय में हुआ दहेज पर जागरूक चर्चा का आयोजन

 

 समाचार क्यारी चंडीगढ़, पंचकूला– नीलम त्रिखा 

 

 समाचार क्यारी मीडिया समूह के चंडीगढ़, पंचकूला मुख्यालय में 

दहेज का दानव कब रुकेगा? बेटियों का सौदा कब बंद होगा। इसी

एक सवाल, एक चीख, एक पुकार दहेज पर जागरूक चर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा में समूह संपादक श्री राजेश कुमार जी सहित ब्यूरो चीफ संजय शर्मा साहित्यिक संपादक श्रीमती नीलम त्रिखा, डॉ प्रतिभा सिंह,रेनू चावला, पल्लवी राजदान,मीनू सैनी, हेमलता शर्मा, हिमांशु शर्मा शांति ने हिस्सा लिया। आजकल मीडिया पर बहुत ही ज्वलंत मुद्दा दहेज को लेकर चारों ओर चर्चा है अभी हाल ही में हुए दो दहेज के लिए कोई दो बेटियों की मौत और भी जाने कितनी बेटियां इसकी भेंट चढ़ गई है। समाचार क्यारी समूह के संपादक श्री राजेश कुमार ने दहेज जो की एक अभिशाप बन चुका है उस पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दहेज: रिवाज नहीं, बेटियों का सौदा है

जब लड़के की डिग्री नहीं, उसका बैंक बैलेंस पूछा जाए…  

जब बेटी के संस्कार नहीं, बाप की जेब तोली जाए तो समझ लो शादी नहीं हो रही, मंडी लगी है।  

और उस मंडी में बोली लग रही है – बेटियों की।

 

दहेज का दानव लालची नहीं, *हम सबने मिलकर पाला है।*  

बेटे वाले मांगते हैं, बेटी वाले देते हैं, और समाज ताली बजाता है।  

फिर जब बहू जलती है तो मोमबत्ती लेकर हमीं सड़क पर निकलते हैं।

ये दानव रुकेगा कब? 

3 कड़वी शर्तें हैं यदि इस और ध्यान दिया जाए तो सम्भव है की बेटियां बच जाए।

 

*शर्त 1: जब बेटा ‘कमाऊ पूत’ नहीं, ‘इंसान’ समझा जाएगा*  

जब तक लड़के को दामाद कम, ATM ज्यादा समझा जाएगा, दहेज नहीं रुकेगा।  

जिस दिन माँ-बाप कहेंगे – “लड़का संस्कारी चाहिए, सामान नहीं”, उस दिन दानव भूखा मरेगा।

 

*शर्त 2: जब बेटी ‘बोझ’ नहीं, ‘बाजू’ बनेगी*  

बेटी को पढ़ाओ, पैरों पर खड़ा करो। जब वो 50 हजार खुद कमाएगी,  

तो 50 लाख दहेज देने की नौबत नहीं आएगी।  

*दहेज की सबसे बड़ी काट है – बेटी की कमाई।*  

जो लड़की खुद की कीमत जानती है, वो दहेज लोभी से ब्याह नहीं करती।

 

*शर्त 3: जब समाज ‘बाराती’ नहीं, ‘पंचायत’ बनेगा*  

आज दहेज की गाड़ी देखकर हम कहते हैं “वाह, क्या शादी है!”  

जिस दिन कहेंगे “धिक्कार है, बेटी बेच दी”, उस दिन सौदा बंद होगा।  

5 लोग भी खड़े होकर दहेज लेने वाले का हुक्का-पानी बंद कर दें, तो दानव डर जाएगा।

 

 इस विषय पर नीलम त्रिखा ने अपने विचार देते हुए कहा कि अमीर लोग अपनी शादी पर बहुत पैसा खर्च करते हैं दूसरे लोगों पर अपनी धाक जमाने के लिए, लेकिन मिडिल क्लास आदमी भी दिखावे के चक्कर में इस तरह की शादी करना चाहता है। अगर वही पैसा बेटी की पढ़ाई पर खर्च किया जाए उसे शिक्षित बनाकर अच्छा रोजगार उसे दिया जाए तो बेटी सिर उठाकर ना मायका और ना ही ससुराल की ओर देखेगी। समाज के डर से माता-पिता अपनी बेटी का साथ नहीं देते क्योंकि उन्हें लगता है यदि बेटी उनके घर आकर बैठ गई तो क्या होगा।ऐसे में बेटी को मजबूरन ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं समाज का डर छोड़ कर माता-पिता को खुलकर साथ देना चाहिए क्योंकि एक तलाकशुदा बेटी मरी हुई बेटी से ज्यादा अच्छी है। वही डॉ प्रतिभा सिंह ने कहा कि जब एक बेटी शिक्षित है उसकी प्रतिभा को पहचान कर उसको आगे बढ़ने का मौका दें और खुलकर माता-पिता अपनी बेटी का साथ दें, उन्होंने तृषा शर्मा केस के ऊपर भी ऐसे परिवार पर लानत दी है कि इतनी शिक्षित बेटी के साथ उन्होंने ऐसा व्यवहार किया की बेटी मर ही गई। इसकी जिम्मेवार वह घमंडी सास है और यह सब प्लानिंग करके किया हुआ है और उन्होंने मीडिया का धन्यवाद किया कि जो इस तरह की आवाज उठाई कि यह पूरे देश की आवाज बन गई वरना तो यह केस भी बाकी केस की तरह दबकर रह जाता। पल्लवी राजदान ने कहा कि जब बेटी शिक्षित है संस्कारी है तो हमें किसी के आगे हाथ पसारने की जरूरत नहीं है कि हमारी बेटी को ले जाओ, बल्कि उन्हें चाहिए की सम्मान के साथ बेटी को मांगे। मैं किसी को प्रलोभन नहीं दूंगी कि मैं आपको बेटी भी दूंगी और साथ में दहेज भी दूंगी।मैं ऐसे घर में शादी करूंगी जहां मेरी बेटी को सम्मान मिले ना कि उसे कोई वस्तु समझा जाए। रेनू चावला ने कि ऐसा परिवार जो बेटी को अपनी बहू नहीं बेटी समझता है ऐसे परिवार भी बहुत है जो खुद सामने आकर झोली पसार कर बेटियों को ले जाते हैं क्योंकि उन्हें सही मायने में अपने घर में एक संस्कारी बहु चाहिए उनको दहेज नहीं चाहिए। उन परिवारों काम में सम्मान करती हूं जो बिना दहेज के शादी करते हैं। मीनू सैनी ने कहा कि जब बेटा और बेटी की शिक्षा पर सामान खर्च होता है तो फिर दहेज का लेना-देना कैसा बेटी भी दिन और दहेज भी दे यह एक बहुत बड़ा अभिशाप है।

 ब्यूरो चीफ संजय शर्मा ने इसे एक अभिशाप बताते हुए कहा कि एक मुहिम चलाने की आवश्यकता है जब बेटा और बेटी समान पढ़े हुए हैं, अच्छा कमा रहे हैं नौकरी में है, तो फिर यह दहेज जैसा दानव आया कहां से है खुद सामने आकर बेटा या बेटी को इसका बहिष्कार करना चाहिए कि हम शादी में ना दहेज देंगे और ना ही दहेज लेंगे।

 उन्होंने कहा कि बहुत सारी ऐसी कुप्रथाएं थी जिनके दमन हुआ है, और यह कुप्रथा दहेज इस पर भी लगाम लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उन परिवारों को जरूर सम्मानित करना चाहिए जो बिना दहेज के शादी करते हैं ताकि बाकी लोग भी से प्रेरणा लेकर दहेज जैसे दानव को दूर करने में मदद करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुछ उपाय करने होंगे जैसे 

 

1. *’ना’ बोलने की हिम्मत:* रिश्ता होते ही दहेज की बात चले, उसी वक्त रिश्ता तोड़ दो। एक ठुकराई हुई शादी, पूरी ज़िंदगी की बर्बादी से बेहतर है।

2. *कोर्ट मैरिज का तमाचा:* 500 रुपये में कोर्ट में शादी करो। जो 50 लाख दहेज मांगे, उसे 500 की औकात दिखा दो।

3. *शादी कार्ड पर एलान:* लिखवाओ – “दहेज लेना-देना कानूनी जुर्म है। कृपया उपहार न लाएं, आशीर्वाद ही काफी है।”

4. *कानून का डंडा:* दहेज मांगते ही 181 पर कॉल करो। दहेज प्रतिषेध कानून में 5 साल की जेल है। एक को जेल भेजो, दस सुधर जाएंगे।

5. *बेटों की परवरिश:* बेटे को बचपन से सिखाओ – “बीवी पार्टनर होती है, प्रॉपर्टी नहीं।” जो माँ अपने बेटे को दहेज लेने से रोकेगी, वही असली दुर्गा है।

6. 

 समाचार क्यारी मीडिया समूह इस तरह की जागरूक चर्चाएं करता आया है वही नीलम त्रिखा ने सभी से अपील की है कि कोई भी इस तरह की यदि दहेज प्रताड़ना झेल रहा है वह माता-पिता या बेटी स्वयं आकर अपनी बात हम तक रख सकते हैं और हम उनका पूरा साथ देंगे। क्योंकि यह एक बहुत बड़ा अभिशाप है 

दानव बाहर नहीं, *हमारे लालच में बैठा है।*  

जब तक हम “लोग क्या कहेंगे” के डर से कार देंगे, कर्ज़ लेंगे, जमीन बेचेंगे… तब तक सौदा चलता रहेगा। दहेज रुकेगा उस दिन:  

1. जिस दिन लड़का खुद कहेगा “मुझे दहेज नहीं, हमसफर चाहिए”।

2. जिस दिन लड़की कहेगी “भूखी मर जाऊंगी, पर दहेज लोभी से ब्याह नहीं करूंगी”।

3. जिस दिन बाप कहेगा “बेटी दान करता हूं, नीलाम नहीं”।

 

दानव तभी रुकेगा जब हम उसे खाना देना बंद करेंगे।  

*भूखा दानव खुद मर जाता है।*

  

 समूह संपादक ने सभी से कहा कि हमें संकल्प लेने की जरूरत है

की आज के बाद न दहेज लेंगे, न देंगे, न लेने-देने देंगे।  

*बेटी का सौदा नहीं, बेटी का सम्मान होगा – तभी भारत महान होगा।।*

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