
सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता है:- राजेश कुमार
तलवार की धार पर चलना है पत्रकारिता, अपना घर फूंक तमाशा देखना है पत्रकारिता : राजेश कुमार
“सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता है” — हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारिता की दशा और दिशा पर मंथन
तलवार की धार पर चलना है पत्रकारिता, अपना घर फूंक तमाशा देखना है पत्रकारिता : राजेश कुमार
पहले से तैयार प्रेस नोट वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार करें पत्रकार, पत्रकारों में फूट डालो और राज करो की नीति छोड़े सरकार
समाचार क्यारी, चंडीगढ़/पंचकूला | नीलम त्रिखा
हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर समाचार क्यारी मीडिया समूह के चंडीगढ़-पंचकूला मुख्यालय में पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा को लेकर एक व्यापक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, महिला शक्ति एवं युवा पत्रकारों ने भाग लेकर पत्रकारिता की “दशा और दिशा” पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर समाचार क्यारी मीडिया समूह के समूह संपादक राजेश कुमार, वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया ट्राई सिटी के अध्यक्ष विनोद शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार पी.पी. वर्मा, ट्राई सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष विक्रांत शर्मा, अग्रवंश समाज पंचकूला के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गुप्ता, पत्रकार हरपाल सिंह, करुणा मित्तल, अनिल कुमार, आनंद कुमार, ललित कुमार, ओम प्रकाश, हंसराज, राम, सुधीर सिंह, अशोक वर्मा, युवा पत्रकार हिमांशु शर्मा, मनप्रीत कौर, डॉ. हेमलता शर्मा, उषा गर्ग, नीलम त्रिखा, संजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का पगड़ी पहनाकर तथा तिरंगा भेंट कर सम्मान किया गया।
पत्रकारिता अब घर फूंक तमाशा देखने जैसी : राजेश कुमार
मुख्य वक्ता एवं समूह संपादक राजेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता करना आसान नहीं रह गया है। एक पत्रकार दिन-रात मेहनत करने के बावजूद आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले संपादक तय करता था कि खबर क्या है, लेकिन आज सोशल मीडिया और एल्गोरिदम तय कर रहे हैं कि लोगों को क्या दिखाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में पत्रकारिता का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। खबर की उम्र अब कुछ घंटों की नहीं बल्कि कुछ सेकंड की रह गई है। “पहले बताओ” की होड़ में “सही बताओ” पीछे छूटता जा रहा है।
राजेश कुमार ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती खबर ढूंढना नहीं बल्कि सच को झूठ और प्रोपेगेंडा से अलग करना है। उन्होंने सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारों को प्रोत्साहित करने के बजाय कई बार उन्हें परेशान किया जाता है, जबकि चाटुकारिता करने वालों को विशेष महत्व दिया जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारें पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, आवास, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू क्यों नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि आज भी अधिकांश पत्रकार बेहद कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारों की एकता ही सबसे बड़ी ताकत
राजेश कुमार ने कहा कि सरकारें और प्रशासन कई बार पत्रकारों में फूट डालकर अपने हित साधने का प्रयास करते हैं। उन्होंने पत्रकारों से आह्वान किया कि वे पहले से तैयार किए गए प्रेस नोट आधारित प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार करें और वास्तविक सवाल पूछने की परंपरा को जीवित रखें।
उन्होंने कहा कि पत्रकार को अपनी जाति, क्षेत्र, पसंदीदा दल या व्यक्तिगत विचारधारा से ऊपर उठकर केवल सत्य के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। खबर में अपनी भावनाएं, पसंद-नापसंद या पूर्वाग्रह शामिल करना पत्रकारिता नहीं है।
भरोसे का संकट और TRP की राजनीति
चर्चा के दौरान पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी विस्तार से विचार किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मीडिया की साख को सबसे अधिक नुकसान “बिका हुआ मीडिया” जैसी धारणाओं ने पहुंचाया है। एक ही घटना को विभिन्न माध्यमों में अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किए जाने से आम जनता भ्रमित हो रही है।
यह भी कहा गया कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित के मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं, जबकि शोर-शराबे वाली बहसों और टीआरपी आधारित पत्रकारिता को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
AI को हथियार बनाएं, मालिक नहीं
राजेश कुमार ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पत्रकारिता के लिए खतरा नहीं बल्कि एक उपयोगी साधन हो सकती है। AI का उपयोग डेटा विश्लेषण, फेक न्यूज की पहचान और शोध कार्यों में किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता का मूल आधार अभी भी जमीनी सत्यापन और मानवीय संवेदनशीलता ही रहेगा।
उन्होंने कहा कि AI के पास तकनीक है, लेकिन जमीर नहीं। जनता आज भी उसी पत्रकार पर भरोसा करती है जो घटनास्थल पर पहुंचकर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करता है।
सत्ता का भोंपू नहीं, जनता का आईना बने मीडिया
वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया ट्राई सिटी के अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज स्वयं चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ पत्रकार व्यक्तिगत लाभ के लिए सत्ता के करीब चले गए हैं, जिससे पत्रकारिता की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारों को निष्पक्ष रहकर जनता की आवाज बनना होगा और सत्ता से सवाल पूछने की अपनी मूल भूमिका को नहीं छोड़ना चाहिए।
पत्रकारों के हितों पर सरकार ध्यान दे : पी.पी. वर्मा
वरिष्ठ पत्रकार पी.पी. वर्मा ने पत्रकारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों के लिए पेंशन, बीमा और सम्मानजनक सुविधाओं की व्यवस्था समय की मांग है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों का जीवन लगातार कठिन होता जा रहा है और सरकारों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कलम के सिपाहियों को नमन
अग्रवंश समाज के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक छोटी सी कलम बड़े-बड़े परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने पत्रकारों को लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी बताते हुए उनके साहस को नमन किया।
साहित्यिक संपादक नीलम त्रिखा ने उन पत्रकारों और संपादकों को श्रद्धापूर्वक नमन किया जो किसी भी दबाव में आकर अपनी खबरों की दिशा नहीं बदलते। उन्होंने कहा कि पत्रकार का असली धर्म सत्ता से सवाल पूछना और समाधान आधारित पत्रकारिता करना है।
उषा गर्ग ने पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई बार पत्रकारों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। इसलिए पत्रकार सुरक्षा कानून और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
युवा पत्रकारों ने भी रखे बेबाक विचार
युवा पत्रकार हिमांशु शर्मा ने कहा कि सत्ता की चाटुकारिता पत्रकारिता नहीं हो सकती। पत्रकार वही है जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में कठिन सवाल पूछने का साहस रखता हो।
अनिल कुमार ने कहा कि यदि सत्ता से सवाल पूछने पर पत्रकार को बदनाम किया जाता है तो ऐसे दाग सम्मान के प्रतीक हैं। सच्ची पत्रकारिता हमेशा निर्भीक और निष्पक्ष होती है।
आनंद कुमार और हरपाल सिंह ने समाचार क्यारी मीडिया समूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मंच लगातार युवा पत्रकारों की आवाज बुलंद करता आया है।
करुणा मित्तल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में निष्पक्ष रहना आज पहले से अधिक कठिन हो गया है, लेकिन सच्चे पत्रकारों को अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
पत्रकार एकजुट होंगे तो बदलाव निश्चित होगा
कार्यक्रम के अंत में समाचार क्यारी मीडिया समूह ने पत्रकारों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। समूह संपादक राजेश कुमार ने कहा कि पत्रकारों की वास्तविक बधाई उस दिन होगी जब सभी पत्रकार व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एक मंच पर एकजुट होंगे और अपने अधिकारों तथा पत्रकारिता की गरिमा की रक्षा के लिए संगठित आवाज बुलंद करेंगे।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल मंत्र आज भी वही है—
“सत्ता का भोंपू मत बनो, जनता का आईना बनो।”
“कलम सिपाही है, व्यापारी नहीं।”
और सबसे बढ़कर —
“सत्ता से सवाल करना ही पत्रकारिता है।”




