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तकनीकी शर्तों ने रोकी किसानों की राह: पंजाब में लाखों लोग पीएम किसान योजना से बाहर समाचार क्यारी चण्डीगढ़

पंजाब में किसानों की स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में एक बड़ी खामी सामने आई है। जहां एक ओर यह योजना किसानों के लिए आर्थिक संबल बन सकती थी, वहीं दूसरी ओर लाखों किसान महज तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा न कर पाने के कारण इससे वंचित रह गए हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के लगभग 3.26 लाख किसान ई-केवाईसी न कराने की वजह से योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

यह आंकड़ा केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर जागरूकता और तकनीकी पहुंच की कमी को भी उजागर करता है। सरकार ने योजना को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग (भूमि सत्यापन) और बैंक खाते में आधार लिंक करना अनिवार्य किया है। लेकिन इन शर्तों को पूरा करना हर किसान के लिए आसान नहीं साबित हो रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के 1,46,237 किसानों ने अभी तक अपनी जमीन का सत्यापन नहीं करवाया है। इसके अलावा 46,106 किसानों ने अपने बैंक खातों को आधार से नहीं जोड़ा है। वहीं 1,34,260 किसान ऐसे हैं जिन्होंने ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। इन तीनों शर्तों के बिना किसी भी किसान को सालाना 6,000 रुपये की सहायता नहीं मिल सकती।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। यह राशि तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, जिससे उन्हें किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती।

लेकिन जब किसान इन अनिवार्य प्रक्रियाओं को पूरा नहीं करते, तो योजना का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता। इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है, खासकर उन किसानों पर जो पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ खेती कर रहे हैं।

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चिंता जताई गई है। सांसद हरसिमरत कौर बादल ने संसद में इस विषय को उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर क्यों लाभार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार योग्य किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए क्या कदम उठा रही है।

सरकार की ओर से जवाब देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने बताया कि समय के साथ लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 में जहां 23 लाख से अधिक किसानों को इस योजना का लाभ मिला था, वहीं 2025 में यह संख्या लगभग आधी रह गई है।

सरकार का मानना है कि ई-केवाईसी और अन्य प्रक्रियाओं को अनिवार्य बनाने से योजना में पारदर्शिता आई है और केवल वास्तविक लाभार्थियों को ही सहायता मिल रही है। इससे फर्जी दावों और धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिली है।

हालांकि, यह भी सच है कि तकनीकी प्रक्रियाएं कई बार किसानों के लिए चुनौती बन जाती हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे किसानों के लिए डिजिटल प्रक्रियाओं को समझना और पूरा करना आसान नहीं होता।

सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए कई प्रयास किए हैं। कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) के माध्यम से किसानों को ई-केवाईसी की सुविधा दी जा रही है। देशभर में लाखों सीएससी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसान जाकर अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

इसके अलावा पीएम किसान मोबाइल ऐप में फेस रिकग्निशन आधारित ई-केवाईसी सुविधा भी शुरू की गई है। इससे किसान घर बैठे ही अपने मोबाइल फोन के जरिए अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। यह सुविधा उन किसानों के लिए काफी उपयोगी हो सकती है, जो किसी कारणवश सीएससी केंद्र तक नहीं पहुंच पाते।

इसके बावजूद, पंजाब में बड़ी संख्या में किसान इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसका कारण जागरूकता की कमी, तकनीकी समस्याएं या फिर स्थानीय स्तर पर समुचित सहायता का अभाव हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी समाधान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को इनका उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करना भी जरूरी है। इसके लिए गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की जरूरत है।

इसके अलावा पंचायतों, कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा ताकि हर पात्र किसान तक योजना का लाभ पहुंच सके। यदि इन प्रयासों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो लाखों किसान फिर से इस योजना से जुड़ सकते हैं।

यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम तकनीकी प्रगति के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चल पा रहे हैं या नहीं। यदि नहीं, तो यह अंतर भविष्य में और बढ़ सकता है।

अंततः, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब सभी पात्र किसान इससे जुड़ सकें। इसके लिए सरकार और किसानों दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान कर लिया गया, तो न केवल लाखों किसान इस योजना का लाभ उठा सकेंगे, बल्कि यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य—किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना—भी पूरा कर सकेगी।

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