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दहेज प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता की हत्या, 4 साल बाद पति को उम्रकैद

समाचार क्यारी (हरियाणा, झज्जर)

हरियाणा के झज्जर जिले से जुड़े एक सनसनीखेज विवाहिता हत्याकांड में आखिरकार न्याय मिल गया। करीब चार साल तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद पूरी होती दिखाई दी है। अदालत ने इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग धाराओं के तहत सजा दी है।

यह मामला रोहतक की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप कुमार दुग्गल की अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलता है।

मामले की शुरुआत झज्जर जिले के गांव रेवाड़ी खेड़ा निवासी हरबीर सिंह की शिकायत से हुई थी। हरबीर ने पुलिस को बताया कि उनके परिवार में दो भाई और एक बहन थी। उनकी बहन रिंकू की शादी 14 जुलाई 2013 को गांव गांधरा निवासी सुरेंद्र के साथ हुई थी। शादी के शुरुआती समय में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष का व्यवहार बदलने लगा।

परिजनों के अनुसार, शादी के लगभग दो साल बाद से ही रिंकू को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा। उसका पति सुरेंद्र, ससुर केहर सिंह और अन्य ससुराल वाले लगातार उस पर अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव बनाते थे। इस कारण रिंकू मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थी। कई बार उसने अपने मायके वालों को भी इस बारे में जानकारी दी, लेकिन हर बार उसे समझा-बुझाकर ससुराल भेज दिया जाता था।

घटना 26 फरवरी 2022 की है, जब अचानक परिवार को एक फोन कॉल ने हिला कर रख दिया। रिंकू के ताऊ राजवीर के मोबाइल पर उसके ससुर का फोन आया, जिसमें बताया गया कि रिंकू को करंट लग गया है। यह सुनते ही परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत गांव गांधरा पहुंचे।

जब वे मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि रिंकू का शव जमीन पर पड़ा हुआ था। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे, जिससे साफ लग रहा था कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि हत्या है। परिवार को तुरंत शक हुआ कि रिंकू की जान जानबूझकर ली गई है।

इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी और ससुराल पक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने कई अहम सबूत जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए, जिससे मामला मजबूत होता गया।

मामला अदालत में पहुंचा और करीब चार साल तक इसकी सुनवाई चली। इस दौरान कई गवाह पेश किए गए और सबूतों को विस्तार से परखा गया। अदालत ने पाया कि रिंकू की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि यह एक सुनियोजित हत्या थी, जो दहेज प्रताड़ना के चलते की गई।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पति सुरेंद्र इस अपराध का मुख्य दोषी है और उसे उम्रकैद की सजा दी जाती है। इसके साथ ही अन्य दो आरोपियों को भी उनके अपराध के अनुसार सजा सुनाई गई। इस फैसले ने न केवल पीड़ित परिवार को राहत दी, बल्कि समाज को भी एक सख्त संदेश दिया है कि दहेज जैसी कुप्रथा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि भले ही उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसे न्याय जरूर मिला है। उन्होंने न्यायपालिका और पुलिस का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोषियों को सजा दिलाई।

यह मामला समाज के लिए एक बड़ी सीख भी है। दहेज जैसी बुराई आज भी कई घरों को बर्बाद कर रही है। कई महिलाएं इस प्रताड़ना को सहते-सहते अपनी जान गंवा देती हैं। ऐसे में जरूरी है कि समाज इस कुरीति के खिलाफ जागरूक हो और इसका विरोध करे।

सरकार और प्रशासन भी समय-समय पर दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान चलाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत काम करने की जरूरत है। इस तरह के मामलों में सख्त सजा ही लोगों में डर पैदा कर सकती है और ऐसे अपराधों को रोकने में मदद कर सकती है।

इस केस का फैसला यह भी दर्शाता है कि यदि पीड़ित परिवार हिम्मत नहीं हारता और न्याय के लिए लड़ता रहता है, तो अंत में सच्चाई की जीत जरूर होती है। हालांकि इस लड़ाई में समय जरूर लगता है, लेकिन न्याय मिलने पर वह इंतजार सार्थक हो जाता है।

अंत में, यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक दहेज जैसी प्रथा के कारण बेटियों की जान जाती रहेगी। जरूरत है कि हर व्यक्ति इस कुरीति के खिलाफ आवाज उठाए और एक सुरक्षित एवं समान समाज बनाने में अपनी भूमिका निभाए।

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