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दिल्ली में हीट वेव से निपटने की नई रणनीति: स्कूलों में ORS अनिवार्य, पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था तेज

समाचार क्यारी (दिल्ली)

राजधानी Delhi में बढ़ती भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार ने हीट वेव से बचाव के लिए अपनी रणनीति में अहम बदलाव किए हैं। इस बार प्रशासन ने केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों तक के लिए विशेष इंतजाम करने का फैसला लिया है। नए निर्देशों के तहत स्कूलों में बच्चों को छुट्टी से पहले ओआरएस घोल पिलाना अनिवार्य किया गया है, ताकि डिहाइड्रेशन और लू के खतरे को कम किया जा सके

मुख्यमंत्री Rekha Gupta के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। इसके तहत दिल्ली सरकार के लगभग 15 लाख और नगर निगम यानी Municipal Corporation of Delhi के करीब 6 लाख छात्रों को हर दिन छुट्टी से पहले ओआरएस दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि गर्मी के इस दौर में बच्चों का शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है, इसलिए समय रहते उन्हें जरूरी पोषण और हाइड्रेशन देना बेहद जरूरी है।

दरअसल, राजधानी में इन दिनों तापमान तेजी से बढ़ रहा है और लू चलने की स्थिति बन रही है। मौसम विभाग, यानी India Meteorological Department ने भी चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रह सकता है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों को सबसे ज्यादा खतरा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘हीट वेव एक्शन प्लान 2026’ को और मजबूत करने का फैसला लिया है।

इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब स्कूलों में ‘वॉटर बेल सिस्टम’ लागू किया जाएगा। यानी दिन में तय समय पर घंटी बजाकर बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाएगी। इससे बच्चे नियमित अंतराल पर पानी पी सकेंगे और शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। शिक्षकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को धूप में ज्यादा देर तक न रहने दें और उन्हें छाया में रखने की व्यवस्था करें।

सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि पूरे शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बस स्टैंड, अस्पताल, पुलिस थाने, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर साफ पेयजल और ओआरएस उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही जगह-जगह वॉटर कूलर, टैंकर और शेड लगाए जा रहे हैं, ताकि लोग तेज धूप से बच सकें।

सरकार ने पशु-पक्षियों के लिए भी विशेष कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन और सिविक एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी के बर्तन रखें, ताकि गर्मी में जानवरों और पक्षियों को पानी मिल सके। अक्सर गर्मी के दिनों में पानी की कमी के कारण पशु-पक्षियों की हालत खराब हो जाती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है। शहर में 339 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों को ओआरएस, आइस पैक और जरूरी दवाओं से लैस किया गया है। इसके अलावा 30 से ज्यादा अस्पतालों में ‘कूल रूम’ बनाए गए हैं, जहां हीट स्ट्रोक के मरीजों को तुरंत राहत दी जा सके। 330 एम्बुलेंस को भी तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही है। वे सड़कों पर लोगों को ओआरएस और पानी वितरित कर रहे हैं। खासतौर पर ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े लोगों और राहगीरों को राहत पहुंचाने के लिए यह पहल की जा रही है।

गर्मी के इस दौर में मजदूर वर्ग को लेकर भी सरकार खासतौर पर चिंतित है। निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए दोपहर के समय काम से बचने, छाया में आराम करने और पर्याप्त पानी पीने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों को भी इस संबंध में सख्त निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं समय की जरूरत हैं, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हीट वेव से होने वाली बीमारियां और मौतें बढ़ सकती हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक हीट वेव से होने वाली मौतों को शून्य के करीब लाया जाए। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर भी पूरी तरह लागू हो।

इसके साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे खुद को गर्मी से कैसे बचाएं। जैसे दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें, हल्के कपड़े पहनें, ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

अंततः, दिल्ली सरकार का यह नया कदम यह दर्शाता है कि बढ़ती गर्मी को लेकर प्रशासन गंभीर है और लोगों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। स्कूलों में ओआरएस वितरण और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था जैसे कदम न केवल मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि संकट के समय व्यापक सोच कितनी जरूरी होती है।

यदि इन उपायों को सही तरीके से लागू किया गया, तो निश्चित ही यह भीषण गर्मी के असर को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं और हजारों लोगों की सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं।

 

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