
नारायणगढ़ में विवाहिता की संदिग्ध मौत: फंदे से लटका मिला शव, दहेज उत्पीड़न के आरोपों से घिरा ससुराल पक्ष
समाचार क्यारी (हरियाणा, अंबाला)
हरियाणा के अंबाला जिले के नारायणगढ़ क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कुराली गांव में रहने वाली नैना का शव उसके ही घर में फंदे से लटका मिला, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया है। जहां एक ओर ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, वहीं मायके वालों ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इस मामले में पति, सास और देवर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मृतका नैना मूल रूप से जगाधरी के मुखर्जी पार्क की रहने वाली थी। उसकी शादी साल 2018 में गौरव सैनी के साथ हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य बताया जाता है, लेकिन समय के साथ हालात बिगड़ते चले गए। नैना के पिता रोहित सैनी का आरोप है कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को कम दहेज लाने के लिए ताने दिए जाते थे और उसे लगातार मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
परिजनों के मुताबिक, दहेज में कार न मिलने को लेकर ससुराल पक्ष अक्सर नैना को अपमानित करता था। पति गौरव, सास गुरमीत कौर और देवर सौरभ उस पर दबाव बनाते थे कि वह अपने मायके से और पैसा व सामान लेकर आए। यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा, जिससे नैना का मानसिक संतुलन प्रभावित होने लगा।
लगातार झगड़ों और प्रताड़ना से परेशान होकर नैना करीब एक महीने पहले अपने मायके लौट आई थी। वहां उसने अपने माता-पिता को अपनी आपबीती सुनाई। परिवार ने उसे सांत्वना दी और मामले को सुलझाने का प्रयास किया। इस दौरान वह अपने छह साल के बेटे आरव के साथ मायके में रह रही थी।
करीब 20 दिन बाद नैना का पति अपने रिश्तेदार के साथ मायके पहुंचा और बेटे को अपने साथ ले गया। इस घटना ने नैना को और अधिक मानसिक तनाव में डाल दिया। वह अपने बेटे के बिना खुद को अकेला महसूस करने लगी थी। परिजनों का कहना है कि वह इस दौरान काफी परेशान और चिंतित रहती थी।
21 अप्रैल को गौरव सैनी अपने परिवार और गांव के कुछ प्रतिष्ठित लोगों के साथ नैना के मायके पहुंचा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे से नैना के साथ कोई गलत व्यवहार नहीं होगा और उसे सम्मान के साथ रखा जाएगा। परिवार ने इन बातों पर विश्वास कर लिया और नैना को उसी रात ससुराल भेज दिया गया।
लेकिन यह भरोसा ज्यादा देर तक नहीं टिक सका। अगले ही दिन नैना की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। उसका शव ससुराल में फंदे से लटका मिला। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन मायके वालों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
नैना के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या कर शव को फंदे से लटकाया गया है, ताकि इसे आत्महत्या का रूप दिया जा सके। उनका कहना है कि अगर ससुराल पक्ष ने सच में उसे स्वीकार किया होता, तो इतनी जल्दी यह घटना नहीं होती।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए नारायणगढ़ अस्पताल भेजा गया, जहां मेडिकल बोर्ड की निगरानी में जांच की गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर पति, सास और देवर के खिलाफ दहेज हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त दहेज प्रथा की भयावहता को उजागर करती है। कानून बनने और जागरूकता बढ़ने के बावजूद यह कुप्रथा आज भी जिंदा है और कई महिलाओं की जिंदगी को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव भी जरूरी है। परिवारों को चाहिए कि वे बेटियों को बोझ न समझें और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करें।
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक कलंक हैं और इन्हें रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी। यदि किसी भी प्रकार की साजिश पाई जाती है, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि नैना की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। यदि हम समय रहते नहीं जागे, तो ऐसी घटनाएं आगे भी होती रहेंगी।
जरूरत है कि हम दहेज जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करें और हर महिला को सुरक्षित, सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाएं। तभी एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।




