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फर्जी RTO लिंक से 6 राज्यों में ठगी का जाल, 70 लोगों से 50 लाख ऐंठे—मुख्य आरोपी गिरफ्तार

समाचार क्यारी (हरियाणा,सोनीपत)

हरियाणा के सोनीपत से साइबर ठगी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर लोगों को ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क कर दिया है। एक 12वीं पास युवक ने बेहद शातिर तरीके से फर्जी आरटीओ चालान लिंक के जरिए छह राज्यों के करीब 70 लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे लगभग 50 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी ने ठगी के इस तरीके को सीखने के लिए जयपुर के एक होटल में चल रहे अवैध कॉल सेंटर में प्रशिक्षण लिया था। वहां उसे साइबर फ्रॉड के कई तरीके सिखाए गए, जिनमें सबसे कारगर तरीका फर्जी लिंक भेजकर लोगों की निजी जानकारी हासिल करना था। इसके बाद आरोपी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर इस ठगी को अंजाम देना शुरू किया।

ठगी का तरीका बेहद साधारण लेकिन खतरनाक था। आरोपी लोगों को व्हाट्सएप पर एक मैसेज भेजता था, जिसमें दावा किया जाता था कि उनके नाम पर आरटीओ चालान कट चुका है। इस मैसेज के साथ एक लिंक भी दिया जाता था, जिस पर क्लिक करके चालान भरने के लिए कहा जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता, उसका मोबाइल फोन हैक हो जाता और जालसाज उसके बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सोनीपत के जटवाड़ा निवासी संजीव नामक व्यक्ति इस ठगी का शिकार बने। 1 जनवरी को उनके व्हाट्सएप पर भी इसी तरह का एक फर्जी आरटीओ चालान मैसेज आया। बिना ज्यादा सोचे-समझे उन्होंने उस लिंक पर क्लिक कर दिया, जिसके बाद उनका मोबाइल हैक हो गया। कुछ ही समय में उनके बैंक खाते से करीब 2 लाख रुपये निकाल लिए गए।

पीड़ित की शिकायत पर सोनीपत साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। डीसीपी कुशल पाल सिंह ने इस केस को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर बसंत को सौंपा गया। टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपी तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल माध्यमों की मदद से जांच का दायरा बढ़ाया गया।

जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग राजस्थान के बीकानेर से मिले। इसके बाद टीम ने गाजेवाला इलाके में दबिश देकर मुख्य आरोपी मनफूल को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी के मोबाइल और अन्य डिवाइस की जांच की गई, तो एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ।

पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसने जयपुर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर से साइबर ठगी की ट्रेनिंग ली थी। वहीं से उसे लोगों को झांसा देने और उनके मोबाइल को हैक करने के तरीके सिखाए गए थे। इसके बाद उसने अपने साथी के साथ मिलकर अलग-अलग राज्यों में लोगों को निशाना बनाना शुरू किया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुका था। करीब 70 लोगों से उसने कुल 50 लाख रुपये की ठगी की। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाता था और इसके लिए वह 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन देता था।

सोनीपत पुलिस ने इस मामले में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है। साथ ही, ठगी की गई रकम में से 22 हजार रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड करवा दिए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है, जो संभवतः राजस्थान और अन्य राज्यों में सक्रिय हैं।

इंस्पेक्टर बसंत ने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि आरटीओ कभी भी व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए चालान भरने के लिए लिंक नहीं भेजता है। चालान से संबंधित सभी जानकारी केवल सरकारी पोर्टल पर ही उपलब्ध होती है। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी व्यक्ति को इस तरह का कोई मैसेज मिलता है, तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें और संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही जानकारी की पुष्टि करें। अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक करने से मोबाइल हैक हो सकता है और बैंक खाते से पैसे चोरी हो सकते हैं।

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। तकनीक के इस दौर में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं खतरे भी उतने ही बढ़ गए हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें।

फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। मामले की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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