
राजपुरा-शंभू रेल ट्रैक पर धमाका, डेटोनेटर मिलने से आतंकी साजिश की आशंका गहराई
समाचार क्यारी (हरियणा) राजपुरा
पंजाब और हरियाणा के बीच स्थित राजपुरा-शंभू रेलवे सेक्शन पर हुए जोरदार धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार देर रात डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर हुए इस विस्फोट के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। शुरुआती जांच में मौके से डेटोनेटर के टुकड़े मिलने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि यह घटना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है।

घटना सोमवार रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है, जब किमी नंबर 1174/1-6 के बीच अचानक तेज धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि रेलवे ट्रैक को कई जगहों पर नुकसान पहुंचा। धमाके के तुरंत बाद आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटनास्थल से एक व्यक्ति का शव बेहद क्षत-विक्षत हालत में बरामद किया गया, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्राथमिक जांच में मृतक की पहचान पंजाब के तरनतारन जिले के पंजवड़ गांव निवासी जगरूप सिंह उर्फ रूपा के रूप में हुई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि उसका इस घटना से क्या संबंध था और क्या वह किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा था। यह भी सामने आया है कि वह पहले मलेशिया की यात्रा कर चुका था, जिससे जांच और गहरी हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही कई सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), पंजाब पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं और पूरे इलाके को घेर लिया गया। रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आसपास कहीं और कोई विस्फोटक सामग्री तो नहीं छिपी हुई है।
जांच के दौरान फॉरेंसिक टीम को मौके से अहम सुराग मिले हैं। डेटोनेटर के टुकड़े मिलने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि विस्फोट योजनाबद्ध तरीके से किया गया हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और हर पहलू पर बारीकी से काम किया जा रहा है।
धमाके के कारण डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया। रेलवे ट्रैक को हुए नुकसान के चलते ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई थी। सुरक्षा जांच और मरम्मत कार्य लगभग 10 घंटे तक चला, जिसके बाद मंगलवार सुबह करीब 7 बजे ट्रैक को दोबारा चालू किया गया और मालगाड़ियों की आवाजाही बहाल हुई।
पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वरुण शर्मा ने बताया कि धमाका लो-इंटेंसिटी का था, लेकिन इसके पीछे के कारणों की गहराई से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को इसलिए भी सतर्क कर दिया है क्योंकि इसी साल जनवरी में भी सरहिंद के पास डीएफसी ट्रैक पर इसी तरह का धमाका हुआ था, जिसमें एक लोको पायलट घायल हो गया था। बार-बार एक ही कॉरिडोर को निशाना बनाए जाने से यह संकेत मिल रहा है कि इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश हो सकती है।
धमाके के बाद अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन सहित आसपास के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें यात्रियों के सामान और संदिग्ध गतिविधियों की गहन जांच की गई। इसके अलावा अंबाला से पंजाब की ओर जाने वाले रेल मार्गों की भी गहन तलाशी ली गई।
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने अपने कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे रेलवे ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए रखें। यदि कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखाई देता है, तो तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं और हर छोटी से छोटी सूचना को गंभीरता से ले रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। आसपास के गांवों और क्षेत्रों में भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। साथ ही, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देने के लिए कहा गया है।
फिलहाल, जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह धमाका आत्मघाती प्रयास था या इसके पीछे कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क सक्रिय है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
कुल मिलाकर, राजपुरा-शंभू रेल ट्रैक पर हुआ यह धमाका केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक पहुंचकर क्या निष्कर्ष निकालती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




