हरियाणा

सोसायटियों की सुरक्षा पर प्रशासन का सख्त रुख, अधूरे काम पर बिल्डर्स को चेतावनी

शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद भी कई जगहों पर जरूरी मरम्मत और सुधार कार्य अधूरे पाए जाने पर जिला उपायुक्त Ajay Kumar ने बिल्डर्स और संबंधित एजेंसियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लघु सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में स्ट्रक्चरल ऑडिट के पहले चरण में शामिल 15 सोसायटियों के बिल्डर्स और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों को बुलाया गया। इस बैठक में डीटीपी (ई) Amit Madholia भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि ऑडिट रिपोर्ट के बाद सुधार कार्यों की स्थिति क्या है और उन्हें कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

ऑडिट के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

बैठक के दौरान सामने आया कि कई सोसायटियों में ऑडिट प्रक्रिया तो पूरी हो चुकी है, लेकिन रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। कुछ जगहों पर काम शुरू हुआ है, लेकिन उसकी गति काफी धीमी है, जिससे समयसीमा का पालन होता नहीं दिख रहा।

इस पर Ajay Kumar ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मामला सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अगर समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।

15 दिन का सख्त अल्टीमेटम

डीसी ने सभी बिल्डर्स को निर्देश दिए कि वे 15 दिनों के भीतर मरम्मत और सुधार कार्य शुरू करें। इसके साथ ही उन्हें अपने प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी प्रशासन को देनी होगी, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन-कौन से काम पूरे हो चुके हैं और कौन से अभी बाकी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई बिल्डर तय समयसीमा के भीतर काम शुरू नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इस मामले में किसी भी प्रकार की ढील नहीं देगा।

डीटीपी और ऑडिट एजेंसियों को भी जिम्मेदारी

डीसी ने डीटीपी (ई) Amit Madholia को निर्देश दिए कि वे सभी सोसायटियों की स्थिति पर नजर रखें और जहां भी लापरवाही हो, वहां तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इसके साथ ही स्ट्रक्चरल ऑडिट करने वाली एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए कि वे केवल रिपोर्ट तैयार कर अपना काम खत्म न मानें, बल्कि मरम्मत कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि काम गुणवत्ता के साथ और तय समयसीमा में पूरा हो।

तकनीकी रिपोर्ट के बावजूद देरी पर सवाल

बैठक में यह भी सामने आया कि कई सोसायटियों में विजुअल निरीक्षण और एनडीटी (नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट) की रिपोर्ट पहले ही आ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं किया गया।

इस पर Ajay Kumar ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर लापरवाही है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जगहों पर रिपोर्ट मिल चुकी है, वहां बिना देरी किए तुरंत काम शुरू किया जाए।

आरडब्ल्यूए को मिली राहत

बैठक के दौरान कुछ आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने यह मांग रखी कि यदि बिल्डर्स समय पर काम नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें खुद मरम्मत कार्य कराने की अनुमति दी जाए। इस पर डीसी ने सहमति जताई, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार ही होंगे।

उन्होंने कहा कि आरडब्ल्यूए द्वारा किए जाने वाले कार्यों की भी संबंधित एजेंसियों द्वारा निगरानी की जाएगी, ताकि गुणवत्ता बनी रहे और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

प्रशासन का साफ संदेश

इस पूरी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि जिला प्रशासन अब सोसायटियों की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। Ajay Kumar ने कहा कि स्ट्रक्चरल ऑडिट कोई औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से लें और समय पर सभी जरूरी कार्य पूरे करें।

आगे की रणनीति

प्रशासन अब इन सभी सोसायटियों की लगातार निगरानी करेगा। समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, जिला प्रशासन का यह कदम ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरा है। इससे यह उम्मीद जगी है कि अब भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव हो

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