
घरेलू कलह से उजड़ा परिवार: पत्नी से झगड़े के बाद युवक ने उठाया खौफनाक कदम, बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के रतगल गांव में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक मामूली घरेलू विवाद ने इतना गंभीर रूप ले लिया कि एक युवक ने अपनी ही जिंदगी खत्म कर ली। पत्नी के साथ मारपीट करने के बाद जब वह शिकायत करने पुलिस चौकी गई, तो युवक ने घर में ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल एक महिला को जीवनभर का दर्द दिया, बल्कि दो मासूम बच्चों को भी अनिश्चित भविष्य के हवाले कर दिया।

संघर्ष भरी जिंदगी जी रहा था परिवार
मृतक गोविंद, जिसकी उम्र महज 23 वर्ष थी, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का रहने वाला था। वह रोजगार की तलाश में कुरुक्षेत्र आया था और रतगल गांव में किराए के एक छोटे से कमरे में अपने परिवार के साथ रह रहा था। परिवार में उसकी पत्नी बिमला, चार साल की बेटी पारुल और डेढ़ साल का बेटा पारस शामिल थे।
गोविंद पेंटिंग और रंग-पुताई का काम करता था, जबकि उसकी पत्नी घरों में झाड़ू-पोछा कर परिवार की आर्थिक मदद करती थी। सीमित आय के बावजूद परिवार अपनी जिंदगी को किसी तरह आगे बढ़ा रहा था।
एक छोटी सी बात ने लिया बड़ा रूप
रविवार की सुबह सब कुछ सामान्य था। बिमला रोज की तरह काम पर गई थी। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जब वह घर लौटी, तो उसने देखा कि उसका पति अपने पिता के साथ बैठकर शराब पी रहा है।
बिमला ने गोविंद को शराब पीने से मना किया। यह बात उसे नागवार गुजरी और धीरे-धीरे दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में यह बहस झगड़े में बदल गई।
बच्चों के सामने हुई मारपीट
स्थिति तब और खराब हो गई जब बिमला बच्चों को खाने के लिए फल और फ्रूटी देने लगी। इसी बात पर गोविंद ने गुस्से में आकर अपनी छोटी बेटी को मारना शुरू कर दिया।
मां होने के नाते बिमला ने तुरंत बेटी को बचाने की कोशिश की। लेकिन इससे गोविंद का गुस्सा और भड़क गया। उसने डंडे से बिमला पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह पीटा।
इस दौरान वह लगातार धमकियां भी दे रहा था, जिससे घर का माहौल पूरी तरह भयभीत हो गया।
पुलिस की मदद लेने का फैसला
मारपीट से परेशान और डरी हुई बिमला ने अपने पिता को फोन कर पूरी बात बताई। इसके बाद उसने साहस दिखाते हुए पुलिस चौकी जाकर शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
वह पास की सेक्टर-7 पुलिस चौकी पहुंची और अपने साथ हुई मारपीट की जानकारी पुलिस को दी। उसे उम्मीद थी कि पुलिस उसकी मदद करेगी और स्थिति को संभाल लेगी।
घर लौटते ही सामने आया भयावह सच
जब बिमला शिकायत दर्ज कराने के बाद वापस घर लौटी, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। उसने कई बार दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
घबराकर उसने अपनी ननद और पड़ोस की एक महिला को बुलाया। तीनों ने मिलकर दरवाजा तोड़ा और अंदर प्रवेश किया।
अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। गोविंद कमरे के पंखे से चुन्नी के सहारे फंदा लगाकर लटका हुआ था। यह देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया।
पुलिस की जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है।
पत्नी के बयान के आधार पर पुलिस ने इत्तेफाकिया कार्रवाई दर्ज की है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बच्चों का भविष्य अधर में
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित दो छोटे बच्चे हुए हैं, जो अब अपने पिता को हमेशा के लिए खो चुके हैं। चार साल की पारुल और डेढ़ साल का पारस अब बिना पिता के बड़े होंगे।
उनकी मां बिमला के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ बच्चों की परवरिश और दूसरी तरफ खुद को संभालना।
घरेलू हिंसा और नशे का खतरनाक असर
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि घरेलू हिंसा और नशे की लत कितनी खतरनाक हो सकती है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्से में आकर लोग ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिनका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।
समाज को लेने होंगे सबक
इस तरह की घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। जरूरत है कि लोग अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें और विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश करें।
साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परामर्श जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देना भी जरूरी है, ताकि लोग तनाव और समस्याओं से सही तरीके से निपट सकें।
निष्कर्ष
कुरुक्षेत्र की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सीख है। एक पल का गुस्सा और गलत निर्णय कई जिंदगियों को तबाह कर सकता है।
जरूरत है कि हम ऐसे मामलों से सबक लें और अपने जीवन में धैर्य, समझदारी और संवेदनशीलता को अपनाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।




