
एक ही प्रॉपर्टी से करोड़ों की ठगी, टैक्सी ड्राइवर निकला बड़ा जालसाज
(समाचार क्यारी दिल्ली)
राजधानी दिल्ली में प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक टैक्सी ड्राइवर ने खुद को प्रॉपर्टी मालिक बताकर कई लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। दिल्ली पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने एक ही संपत्ति को कई लोगों को किराए या बेचने के नाम पर दिखाकर उनसे पैसे लिए और फिर फरार हो जाता था।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान रविंद्र गर्ग के रूप में हुई है, जो मूल रूप से हापुड़ का रहने वाला है। फिलहाल वह दिल्ली में टैक्सी चलाकर अपना गुजारा करता था, लेकिन इसी के साथ वह प्रॉपर्टी फ्रॉड के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बेहद चालाकी से अपनी योजना बनाई थी और लंबे समय तक लोगों को धोखा देता रहा।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब 29 दिसंबर 2025 को एक दृष्टिहीन रेलवे कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित किराए पर घर की तलाश में था, तभी उसकी मुलाकात आरोपी से हुई। आरोपी ने खुद को एक प्रॉपर्टी मालिक बताते हुए उसे करोल बाग के जोशी रोड स्थित एक मकान किराए पर देने का प्रस्ताव दिया।
आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए कागजी प्रक्रिया भी पूरी दिखाई और पीड़ित से करीब 14.5 लाख रुपये ले लिए। इतना ही नहीं, उसने एक फर्जी लीज डीड भी तैयार कर दी, जिससे पीड़ित को कोई शक नहीं हुआ। लेकिन जब पीड़ित मकान का कब्जा लेने पहुंचा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे पता चला कि वह प्रॉपर्टी पहले से ही एक फाइनेंस कंपनी के कब्जे में है, क्योंकि उस पर लिया गया लोन चुकाया नहीं गया था।
इस घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। पुलिस को पता चला कि आरोपी ने सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि कई लोगों को इसी तरह ठगा है और कुल ठगी की रकम करीब 2 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रविंद्र गर्ग काफी शातिर दिमाग का था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए हर 5 से 6 महीने में अपना मोबाइल नंबर बदल देता था और लगातार अपना ठिकाना भी बदलता रहता था। वह अलग-अलग इलाकों में छिपकर रहता था, जिससे उसे पकड़ना आसान नहीं था।
आखिरकार पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। लंबी कोशिशों के बाद उसे नांगल देवत गांव से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने अपने अपराध कबूल कर लिए।
जांच में सामने आया कि आरोपी का ठगी करने का तरीका बेहद सुनियोजित था। वह पहले से गिरवी रखी गई या विवादित प्रॉपर्टी को लोगों को दिखाता था और उन्हें किराए या बिक्री का झांसा देता था। इसके बाद वह बैंक ट्रांसफर या नकद के जरिए मोटी रकम वसूल करता और फिर अचानक गायब हो जाता था।
पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी पहले भी इस तरह के मामलों में शामिल रहा है। एक मामले में अदालत ने उसे भगोड़ा अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर रखा था। इसके बावजूद वह लगातार अपनी पहचान छिपाकर लोगों को ठगता रहा।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने ठगी से कमाए गए पैसों से टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय शुरू किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने फिर से ठगी का रास्ता अपनाया और लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और आगे की जांच जारी है। पुलिस अब आरोपी की संपत्तियों और ठगी की रकम का पता लगाने में जुटी है, ताकि पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके और उनकी रकम वापस कराई जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने या किराए पर लेने से पहले उसकी कानूनी स्थिति, मालिकाना हक और बैंक से जुड़े रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, दिल्ली में सामने आया यह मामला न केवल एक बड़े फ्रॉड का खुलासा है, बल्कि लोगों के लिए एक चेतावनी भी है कि वे प्रॉपर्टी से जुड़े लेनदेन में पूरी सावधानी बरतें, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।




