हरियाणा

अक्षय तृतीया पर चुलकाना धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब—श्याम बाबा के दर्शन को लगी लंबी कतारें

(समाचार क्यारी हरियणा)

हरियाणा के हरियाणा के समालखा स्थित प्रसिद्ध चुलकाना धाम में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चुलकाना धाम स्थित श्याम बाबा मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने कतारों में लगकर बाबा श्याम के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

सुबह से ही शुरू हुआ श्रद्धालुओं का आगमन

अक्षय तृतीया के दिन जैसे ही सुबह का समय हुआ, मंदिर परिसर में भक्तों का आना शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह भीड़ इतनी बढ़ गई कि मंदिर मार्गों पर लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु घंटों इंतजार कर केवल एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए।

मंदिर परिसर “जय श्री श्याम” के जयकारों से गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से भर गया।

देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

इस विशेष अवसर पर केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु चुलकाना धाम पहुंचे। लोगों का मानना है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने विशेष इंतजाम किए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

चुलकाना धाम की धार्मिक महत्ता

चुलकाना धाम को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्थान प्राचीन मान्यताओं और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि यहां शीशदान भूमि पर बाबा श्याम की पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

आज यह स्थान न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी तिथि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है।

शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में धर्मदास नामक वैश्य ने इस दिन गंगा स्नान कर देवी-देवताओं की पूजा की और स्वर्ण, वस्त्र व अन्य वस्तुएं ब्राह्मणों को दान की थीं। इसके फलस्वरूप उन्हें अगले जन्म में समृद्ध राजा के रूप में जन्म मिला।

पौराणिक कथाओं से जुड़ा महत्व

मान्यता है कि इसी पुण्य प्रभाव के कारण धर्मदास अगले जन्म में कुशावती के राजा बने और आगे चलकर वे चंद्रगुप्त के रूप में प्रसिद्ध हुए। यह कथा अक्षय तृतीया के दान और पुण्य के महत्व को दर्शाती है।

स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था। इसी कारण इस दिन को अत्यंत पवित्र माना जाता है और कई स्थानों पर परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।

परशुराम जयंती और पूजा परंपरा

दक्षिण भारत में अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन भगवान परशुराम की पूजा, अर्घ्य और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। भक्त मानते हैं कि इस दिन पूजा करने से शक्ति, साहस और सफलता प्राप्त होती है।

महिलाओं द्वारा विशेष पूजा

अक्षय तृतीया के अवसर पर सौभाग्यवती स्त्रियां गौरी पूजा करती हैं। इस दौरान वे मिठाई, फल और चने बांटती हैं तथा कलश में जल और फल का दान करती हैं। इसे सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर में भव्य आयोजन

चुलकाना धाम स्थित श्याम बाबा मंदिर में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया था।

भक्तों की सुविधा के लिए पानी, प्रसाद और कतार व्यवस्था की विशेष व्यवस्था की गई थी।

श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास

श्रद्धालुओं का कहना है कि चुलकाना धाम में बाबा श्याम के दर्शन मात्र से ही जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं। कई लोग यहां हर वर्ष अक्षय तृतीया पर दर्शन के लिए आते हैं।

कुछ भक्तों ने बताया कि उनकी मनोकामनाएं यहां पूरी हुई हैं, जिसके कारण उनकी आस्था और भी मजबूत हो गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

मंदिर समिति के स्वयंसेवक भी लगातार व्यवस्था संभालते नजर आए।

निष्कर्ष

हरियाणा के समालखा स्थित चुलकाना धाम में अक्षय तृतीया के अवसर पर उमड़ा यह श्रद्धा का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि आस्था आज भी लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई है।

यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करता है। चुलकाना धाम आज भी लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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