दिल्ली

लोनी रोड पर राहत की राह: दो साल में बनेगा अंडरपास, जाम से जूझ रहे लाखों लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

समाचार क्यारी (दिल्ली)

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुनापार इलाके में लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से परेशान लोगों के लिए अब राहत की उम्मीद जगी है। लोनी रोड कॉरिडोर पर प्रस्तावित अंडरपास परियोजना का काम आखिरकार शुरू हो गया है। यह वही परियोजना है, जिसका लोग पिछले कई सालों से इंतजार कर रहे थे। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अनुसार, ठेकेदार की नियुक्ति के बाद अब निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है और इसे पूरा होने में करीब दो साल का समय लगेगा।

यह अंडरपास परियोजना लोनी रोड और मंगल पांडे रोड के व्यस्त चौराहे पर विकसित की जा रही है, जो दिल्ली और गाजियाबाद के बीच एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। रोजाना हजारों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं, जिसके कारण यहां अक्सर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर पीक आवर्स में यह इलाका ट्रैफिक के दबाव से पूरी तरह जाम हो जाता है, जिससे लोगों को घंटों फंसे रहना पड़ता है।

करीब 75 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह अंडरपास चार लेन का होगा और इसकी कुल लंबाई लगभग 555 मीटर तय की गई है। इसमें 7.5 मीटर चौड़ा कैरिजवे तैयार किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। परियोजना के तहत लोनी बॉर्डर की दिशा में 230 मीटर लंबी रैंप बनाई जाएगी, जबकि दुर्गापुरी चौक की ओर 265 मीटर लंबी रैंप का निर्माण होगा। इन दोनों रैंप को करीब 60 मीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन से जोड़ा जाएगा, जिससे वाहन बिना किसी रुकावट के गुजर सकेंगे।

अधिकारियों का कहना है कि अंडरपास तैयार होने के बाद इस पूरे कॉरिडोर पर सिग्नल-फ्री यातायात संभव हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि वाहन चालकों को ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे समय की बचत होगी और सफर आसान हो जाएगा। इसके साथ ही, लगातार रुक-रुक कर चलने वाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।

हालांकि, जहां एक ओर इस परियोजना से भविष्य में राहत की उम्मीद है, वहीं निर्माण कार्य के दौरान लोगों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि काम के दौरान ट्रैफिक को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। इसके बावजूद, अगले दो वर्षों तक इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को जाम और धीमी गति से चलने वाले ट्रैफिक की समस्या झेलनी पड़ सकती है।

यह परियोजना मूल रूप से सितंबर 2022 में घोषित की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसका काम शुरू नहीं हो सका। सबसे बड़ी बाधा अतिक्रमण हटाने की रही, क्योंकि चौराहे के आसपास बड़ी संख्या में अवैध निर्माण और दुकानें मौजूद थीं। इसके अलावा, पेड़ों की कटाई की अनुमति लेने में भी समय लगा। भूमिगत यूटिलिटी जैसे पानी की पाइपलाइन, बिजली के केबल और टेलीकॉम लाइनों को शिफ्ट करना भी एक बड़ी चुनौती बना रहा, जिसके चलते परियोजना में काफी देरी हुई।

अब जब इन सभी बाधाओं को दूर कर लिया गया है, तो निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

इस अंडरपास परियोजना में केवल वाहनों की आवाजाही को ध्यान में नहीं रखा गया है, बल्कि पैदल यात्रियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। योजना के तहत फुटपाथ और फुटओवर ब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे लोग सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें। इसके अलावा, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या न हो।

लोनी गोल चक्कर, जहां यह अंडरपास बनाया जा रहा है, लंबे समय से ट्रैफिक जाम का हॉटस्पॉट रहा है। यह स्थान दिल्ली और गाजियाबाद के बीच एक महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां से रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं। यह गोल चक्कर उत्तर प्रदेश सीमा से महज 600 मीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे यहां वाहनों का दबाव हमेशा बना रहता है।

शाहदरा की ओर से आने वाला ट्रैफिक भी इसी चौराहे पर मिल जाता है, जिसके कारण स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है। सुबह और शाम के समय यहां जाम लगना आम बात है, जिससे लोगों का काफी समय बर्बाद होता है और ईंधन की खपत भी बढ़ती है।

अंडरपास बनने के बाद इस जंक्शन पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। शाहदरा से लोनी बॉर्डर की ओर जाने वाले वाहन बिना किसी रुकावट के अंडरपास के जरिए गुजर सकेंगे, जिससे ऊपर के चौराहे पर ट्रैफिक का भार कम होगा। इससे न केवल जाम की समस्या दूर होगी, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।

स्थानीय निवासियों और नियमित यात्रियों ने इस परियोजना के शुरू होने पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि अगर यह अंडरपास समय पर बन जाता है, तो उनके रोजाना के सफर में बड़ा बदलाव आएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण के दौरान प्रशासन को ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो।

कुल मिलाकर, लोनी रोड अंडरपास परियोजना उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर विकास है, जो आने वाले समय में लाखों लोगों की जिंदगी को आसान बना सकता है। अब देखना यह होगा कि यह परियोजना तय समय में पूरी होती है या नहीं और क्या यह वास्तव में जाम की समस्या का स्थायी समाधान बन पाती है।

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