
‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ दिखाकर 2.80 लाख की ठगी, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर युवक को बनाया शिकार
समाचार क्यारी (गुरुग्राम)
गुरुग्राम (फर्रुखनगर): साइबर अपराधियों ने ठगी का एक और खतरनाक तरीका अपनाते हुए लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में फर्रुखनगर के एक युवक को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर डराया गया और उससे करीब 2.80 लाख रुपये ठग लिए गए। इस घटना ने न सिर्फ इलाके में चिंता बढ़ा दी है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब मानसिक दबाव बनाकर लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसा रहे हैं।

पीड़ित युवक योगेंद्र कुमार, जो फर्रुखनगर के वार्ड नंबर आठ के निवासी हैं, ने इस मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाना मानेसर में दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
शिकायत में योगेंद्र ने बताया कि 10 अप्रैल को उनके मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया और बातचीत की शुरुआत ही गंभीर आरोपों के साथ की। ठग ने योगेंद्र को कहा कि वह किसी बड़े अपराध में शामिल हैं और उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया जा चुका है।
अचानक लगे इन आरोपों से योगेंद्र घबरा गए। उन्होंने अपनी सफाई देने की कोशिश की, लेकिन ठग ने उन्हें बोलने का मौका कम दिया और लगातार उन्हें डराता रहा। इसके बाद ठगों ने उन्हें वीडियो कॉल करने के लिए कहा। जब वीडियो कॉल शुरू हुई, तो सामने बैठे व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और उसका बैकग्राउंड भी किसी सरकारी दफ्तर जैसा दिख रहा था, जिससे पूरा माहौल असली जैसा प्रतीत हो रहा था।
वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने योगेंद्र पर दबाव बनाते हुए कहा कि अगर वे गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं, तो उन्हें तुरंत अपने बैंक खाते का “ऑनलाइन वेरिफिकेशन” कराना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक प्रक्रिया है, जिसके जरिए यह साबित किया जाएगा कि उनके खाते में कोई अवैध लेन-देन नहीं हुआ है।
इस पूरी प्रक्रिया को ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाम दिया। उन्होंने योगेंद्र को यह यकीन दिला दिया कि वे फिलहाल निगरानी में हैं और यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो तुरंत उनके घर पर पुलिस पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। इस तरह के दबाव और डर के माहौल में योगेंद्र पूरी तरह से टूट गए और ठगों की बातों में आ गए।
डर और घबराहट के कारण उन्होंने 10 अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच कई बार में अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) खाते से ठगों द्वारा दी गई यूपीआई आईडी पर पैसे ट्रांसफर कर दिए। कुल मिलाकर उन्होंने 2 लाख 79 हजार 994 रुपये भेज दिए। ठग लगातार उनसे संपर्क में बने रहे और हर बार उन्हें अलग-अलग कारण बताकर पैसे ट्रांसफर करने को कहते रहे।
जब योगेंद्र के खाते से लगभग सारा पैसा खत्म हो गया, तब भी ठगों ने उनसे और पैसे की मांग करनी शुरू कर दी। इसी दौरान योगेंद्र को शक हुआ और उन्होंने अपने किसी परिचित से इस बारे में चर्चा की। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई वास्तविक प्रक्रिया नहीं होती।
इसके बाद योगेंद्र ने तुरंत साइबर क्राइम थाना मानेसर में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ठगों ने फर्जी पहचान और तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर इस वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी लोगों के डर और जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। वे खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से इतना दबाव में डाल देते हैं कि वे बिना सोचे-समझे उनके निर्देशों का पालन करने लगते हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी किसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह गिरफ्तार नहीं करती और न ही बैंक खाते की जानकारी या पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है।
इस घटना के बाद पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के कॉल्स से सतर्क रहें। यदि कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पैसे या बैंक डिटेल्स मांगता है, तो तुरंत उसकी जानकारी नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन पर दें।
फिलहाल पुलिस आरोपियों की पहचान करने और पैसे की रिकवरी के प्रयास में जुटी हुई है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूक रहना और किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करना ही सबसे बेहतर उपाय है।




