दिल्ली

दिल्ली में डिजिटल जनगणना की शुरुआत: 33 सवालों के जरिए जुटेगा हर घर का डेटा, आरडब्ल्यूए निभाएंगे अहम भूमिका

समाचार क्यारी (दिल्ली)

राजधानी दिल्ली में जनगणना की प्रक्रिया ने इस बार एक नया और आधुनिक रूप ले लिया है। आज से शुरू हो रही डिजिटल जनगणना का पहला चरण न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि इसमें लोगों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर भी व्यापक व्यवस्था की गई है। इस पहल के तहत अब कागज की जगह डिजिटल माध्यम से जानकारी एकत्र की जाएगी, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनने की उम्मीद है।

डिजिटल जनगणना का पहला चरण शुरू

Delhi में 1 मई से 15 मई तक डिजिटल जनगणना का पहला चरण चलाया जाएगा। इस दौरान “स्व-गणना” (Self Enumeration) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें लोग खुद अपने घर और परिवार से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे।

प्रशासन ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हर वार्ड में विशेष कैंप लगाए हैं। इन कैंपों में प्रशिक्षित कर्मचारी और स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जो लोगों को फॉर्म भरने में सहायता करेंगे।

आरडब्ल्यूए को दी गई बड़ी जिम्मेदारी

इस बार की जनगणना में Resident Welfare Association (आरडब्ल्यूए) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये संगठन स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने और स्व-गणना प्रक्रिया में मदद करने का काम करेंगे।

आरडब्ल्यूए पदाधिकारी प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि हर व्यक्ति सही और पूरी जानकारी दर्ज करे। उनका उद्देश्य यह भी है कि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग लें, ताकि डेटा व्यापक और सटीक हो सके।

बैठक में बनी रणनीति

इस पहल को सफल बनाने के लिए उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीएम कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें Shahdara की एसडीएम रीता कौशिक सहित कई आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में जनगणना प्रक्रिया को लेकर रणनीति तैयार की गई और यह तय किया गया कि लोगों को जागरूक करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इसमें प्रचार-प्रसार से लेकर तकनीकी सहायता तक सभी पहलुओं पर चर्चा की गई।

33 सवालों के जरिए जुटेगी जानकारी

डिजिटल जनगणना के तहत कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो विभिन्न श्रेणियों में बांटे गए हैं।

1. मकान से जुड़े सवाल

करीब 7 सवाल घर की संरचना से जुड़े होंगे, जैसे—दीवार और फर्श किस सामग्री से बने हैं, मकान का प्रकार क्या है आदि।

2. परिवार से जुड़े सवाल

8 सवाल परिवार के बारे में होंगे, जिनमें सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और घर में रहने वाले कमरों की संख्या शामिल है।

3. बुनियादी सुविधाएं

9 सवाल उन सुविधाओं पर केंद्रित होंगे जो रोजमर्रा के जीवन के लिए जरूरी हैं, जैसे पीने का पानी, बिजली और खाना बनाने का ईंधन।

4. डिजिटल सुविधाएं

5 सवाल डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े होंगे, जिनमें इंटरनेट की उपलब्धता, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों की जानकारी शामिल है।

5. वाहन और अन्य जानकारी

4 सवाल वाहन और अन्य आवश्यक विवरण से संबंधित होंगे।

स्व-गणना के बाद होगी जांच

15 मई के बाद अधिकारी घर-घर जाकर भरी गई जानकारी की जांच करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा में कोई गलती या कमी न रह जाए।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा।

जागरूकता के लिए विशेष अभियान

जनगणना को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। गली-गली मुनादी की जाएगी, नुक्कड़ नाटक आयोजित होंगे और स्कूलों में अभिभावकों को जानकारी दी जाएगी।

पीटीएम (Parent-Teacher Meeting) के माध्यम से भी माता-पिता को समझाया जाएगा कि वे सही जानकारी भरें और इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें।

गर्मी को देखते हुए विशेष व्यवस्था

दिल्ली की भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने फील्ड विजिट के समय में बदलाव किया है। दोपहर के समय जनगणना कर्मियों को आराम दिया जाएगा और इस दौरान घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने का काम नहीं किया जाएगा।

इससे न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि नागरिकों को भी असुविधा से बचाया जा सकेगा।

आरडब्ल्यूए का सहयोग

बैठक में शामिल विभिन्न आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने प्रशासन को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वे ईमानदारी से इस प्रक्रिया में भाग लेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके क्षेत्र के लोग समय पर और सही जानकारी भरें।

उनका मानना है कि डिजिटल जनगणना से शहर की योजना बनाने में काफी मदद मिलेगी और इससे भविष्य की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

डिजिटल जनगणना के फायदे

डिजिटल जनगणना से कई लाभ होने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि डेटा तेजी से एकत्र होगा और उसकी प्रोसेसिंग भी जल्दी हो सकेगी।

इसके अलावा, डिजिटल माध्यम से त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है और डेटा अधिक सटीक होता है। इससे सरकार को योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी, जो लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार होंगी।

भविष्य की योजना के लिए अहम कदम

जनगणना किसी भी देश या शहर के विकास की आधारशिला होती है। इसके जरिए सरकार को यह पता चलता है कि कितने लोग किस तरह की सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

डिजिटल जनगणना के जरिए जुटाया गया डेटा भविष्य की नीतियों, बुनियादी ढांचे और सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

निष्कर्ष

दिल्ली में शुरू हुई डिजिटल जनगणना न केवल तकनीकी बदलाव का संकेत है, बल्कि यह प्रशासन और नागरिकों के बीच सहयोग का भी उदाहरण है। Resident Welfare Association की भागीदारी और जागरूकता अभियानों के जरिए इस प्रक्रिया को सफल बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है।

अब यह जिम्मेदारी नागरिकों की भी है कि वे सही और पूरी जानकारी देकर इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा बनें, ताकि एक बेहतर और योजनाबद्ध शहर का निर्माण किया जा सके।

Back to top button