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पानीपत में दर्दनाक हादसा: एसटीपी कुएं में जहरीली गैस से दो युवकों की मौत

समाचार क्यारी (हरियाणा, पनीपत)

हरियाणा के पानीपत जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यहां एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के कुएं में उतरने के दौरान दम घुटने से दो युवकों की जान चली गई। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों युवक सीवर लाइन में आई तकनीकी समस्या की जांच करने के लिए अंदर उतरे थे। इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतकों की पहचान जींद जिले के गांगौली गांव निवासी 26 वर्षीय अजय देशवाल और बिहार के बेगूसराय निवासी 22 वर्षीय अंकित के रूप में हुई है। अजय देशवाल जननायक जनता पार्टी (जजपा) के राष्ट्रीय महासचिव देवेंद्र कादियान की हैचरी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था, जबकि अंकित वहां अन्य कामों में सहयोग करता था। दोनों मेहनती और जिम्मेदार युवक थे, जिनकी असामयिक मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जानकारी के अनुसार, हैचरी के पास से गुजर रही एसटीपी प्लांट की सीवर लाइन में लंबे समय से ब्लॉकेज की समस्या बनी हुई थी। इस कारण जल निकासी बाधित हो रही थी और आसपास के क्षेत्र में परेशानी बढ़ती जा रही थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए सोमवार रात करीब 10 बजे अजय और अंकित मौके पर पहुंचे।

शुरुआत में दोनों ने सीवर का ढक्कन खोलकर बाहर से स्थिति का जायजा लेने की कोशिश की, लेकिन अंदर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। इसके बाद बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के दोनों युवक सीवर के कुएं में उतर गए। जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद जहरीली गैस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

बताया जा रहा है कि कुएं के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैस भरी हुई थी, जिससे दोनों का दम घुटने लगा। कुछ ही पलों में वे बेहोश होकर गिर पड़े और बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। काफी देर तक जब दोनों बाहर नहीं आए, तो आसपास मौजूद लोगों को शक हुआ। इसके बाद तुरंत पुलिस और संबंधित विभाग को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही बचाव टीम मौके पर पहुंची। सेफ्टी किट पहनकर टीम के सदस्य कुएं में उतरे और दोनों युवकों को बाहर निकाला गया। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

हादसे के बाद मृतकों के परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना की सूचना देने के बावजूद एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची। यदि समय रहते चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो शायद दोनों युवकों की जान बचाई जा सकती थी। परिवारों ने इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, जजपा नेता देवेंद्र कादियान ने भी इस हादसे को लेकर प्रशासन और एचएसवीपी (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सीवर लाइन की समस्या को समय रहते ठीक कर लिया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

यह हादसा एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि सीवर और एसटीपी जैसे खतरनाक स्थानों पर काम करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों का होना कितना जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि मजदूर या कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऐसे जोखिम भरे काम करने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीवर या बंद जगहों में जहरीली गैसों का स्तर बहुत अधिक होता है, जो कुछ ही मिनटों में व्यक्ति को बेहोश कर सकती है। ऐसे स्थानों पर काम करने से पहले गैस स्तर की जांच, ऑक्सीजन सप्लाई और सुरक्षा किट का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए। इसके बावजूद अक्सर इन नियमों की अनदेखी की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप इस तरह के हादसे सामने आते हैं।

प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर किस स्तर पर लापरवाही हुई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

इस घटना ने न केवल दो परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक इस तरह की लापरवाही से लोगों की जान जाती रहेगी। जरूरत इस बात की है कि ऐसे हादसों से सबक लिया जाए और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

कुल मिलाकर, पानीपत में हुआ यह हादसा बेहद दुखद और चिंताजनक है। यह घटना एक चेतावनी है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। यदि समय रहते सावधानी बरती जाती, तो शायद आज दो जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

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