
किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर ठगी: इलाज के बहाने युवक से ठगे डेढ़ लाख रुपए
समाचार क्यारी (हरियाणा, गुरुग्राम)
गुरुग्राम में साइबर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मजबूरी का फायदा उठाकर ठगों ने एक व्यक्ति से लाखों रुपए ऐंठ लिए। पीड़ित लंबे समय तक इलाज की उम्मीद में ठगों के झांसे में फंसा रहा, लेकिन जब बार-बार पैसे मांगने और तारीख टालने का सिलसिला जारी रहा, तब उसे अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ।

जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम निवासी योगेंद्र सिंह को किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या थी। अपनी बीमारी के इलाज के लिए वह एक निजी अस्पताल में उपचार करवा रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात ऑनलाइन एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों और स्टाफ का करीबी बताया। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि वह कम समय में किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी व्यवस्था करा सकता है।
बीमारी से परेशान योगेंद्र सिंह को यह प्रस्ताव राहत देने वाला लगा। उन्होंने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए उस व्यक्ति की बातों पर भरोसा कर लिया। आरोपी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अस्पताल में उसके अच्छे संपर्क हैं और वह ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को जल्दी और आसानी से पूरा करवा देगा। इसी विश्वास में आकर पीड़ित ने आरोपी को पैसे देने शुरू कर दिए।
बताया जा रहा है कि 27 जनवरी से 28 अप्रैल के बीच आरोपी ने इलाज और ट्रांसप्लांट के नाम पर अलग-अलग किस्तों में करीब डेढ़ लाख रुपए वसूल लिए। हर बार जब पीड़ित ट्रांसप्लांट की तारीख पूछता, तो आरोपी कोई न कोई बहाना बनाकर नई तारीख दे देता। कभी डॉक्टर की अनुपलब्धता का हवाला दिया जाता, तो कभी अस्पताल में प्रक्रिया लंबित होने की बात कही जाती।
समय बीतने के साथ जब आरोपी की मांगें बढ़ने लगीं और वह बार-बार पैसे मांगने लगा, तब योगेंद्र सिंह को शक होने लगा। उन्होंने खुद अस्पताल जाकर डॉक्टरों और स्टाफ से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। अस्पताल प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि उनके यहां ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है और न ही किसी ने इस तरह की कोई व्यवस्था की है।
इस खुलासे के बाद पीड़ित को समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। तुरंत ही उन्होंने साइबर थाना ईस्ट में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली जा रही है। साथ ही बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल नंबर की डिटेल्स खंगाली जा रही हैं, ताकि ठग तक जल्द पहुंचा जा सके। शुरुआती जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी किसी बड़े साइबर गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें निशाना बनाता है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। खासतौर पर बीमारी, नौकरी और आर्थिक मदद जैसे संवेदनशील मामलों में लोग जल्दी भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मेडिकल प्रक्रिया, खासकर किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर इलाज के लिए केवल अधिकृत अस्पताल और डॉक्टरों से ही संपर्क करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति या ऑनलाइन संपर्क के जरिए इलाज कराने का निर्णय भारी नुकसान का कारण बन सकता है। साथ ही किसी को भी बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर करना बेहद जोखिम भरा होता है।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर की तुरंत जांच करें। अगर कोई व्यक्ति इलाज या अन्य किसी सेवा के नाम पर पैसे मांगता है, तो पहले उसकी पूरी जानकारी सत्यापित करना जरूरी है। किसी भी तरह की ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
गुरुग्राम की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि डिजिटल युग में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं जोखिम भी उतने ही बढ़ गए हैं। जरूरत है सतर्क रहने की और हर जानकारी को जांचने-परखने की, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।




