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अंबाला में पशुधन सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम, व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू

समाचार क्यारी (हरियाणा ,अंबाला)

अंबाला जिले में पशुओं को घातक और संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए एक बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान का उद्देश्य जिले के अधिक से अधिक पशुओं को सुरक्षित करना और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाना है। इस पहल के तहत विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुओं को मुफ्त टीके लगा रही हैं, जिससे लंपी स्किन डिजीज, मुंह-खुर रोग और अन्य खतरनाक बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।

इस अभियान की शुरुआत जिले के एक पशु चिकित्सा केंद्र से की गई, जहां बड़ी संख्या में पशुपालक अपने पशुओं को लेकर पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों और पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को टीकाकरण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव और बढ़ती गर्मी के कारण पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक हो जाता है, ऐसे में समय रहते टीकाकरण कराना बेहद आवश्यक है।

पशुपालन विभाग के अनुसार, इस अभियान के तहत जिले के हजारों पशुओं को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विशेष रूप से मोबाइल वैन की व्यवस्था की गई है और चिकित्सा कर्मचारियों की ड्यूटी अलग-अलग क्षेत्रों में लगाई गई है। ये टीमें न केवल टीकाकरण करेंगी, बल्कि पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी करेंगी और जरूरत पड़ने पर उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराएंगी।

अधिकारियों ने बताया कि बीमार पशु केवल दूध उत्पादन को ही प्रभावित नहीं करते, बल्कि पशुपालकों की आय पर भी सीधा असर डालते हैं। कई बार संक्रमण तेजी से फैलने के कारण बड़ी संख्या में पशु बीमार पड़ जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए टीकाकरण को सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में पशुओं में संक्रामक रोग तेजी से फैले थे। लंपी स्किन डिजीज जैसे रोगों ने पशुपालकों को काफी नुकसान पहुंचाया था। कई पशुओं की मौत हो गई थी और दूध उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने समय-समय पर ऐसे टीकाकरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

अभियान के दौरान पशुपालकों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग के अधिकारी गांवों में जाकर लोगों को पशुओं की देखभाल से जुड़ी जरूरी बातें समझा रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि पशुओं के रहने का स्थान साफ-सुथरा रखना, संतुलित आहार देना और समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है। इसके अलावा यदि कोई पशु बीमार हो जाता है, तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई पशुपालकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि गांवों में जानकारी के अभाव में अक्सर लोग समय पर पशुओं का इलाज नहीं करा पाते हैं, जिससे बीमारी तेजी से फैल जाती है। अब जब विभाग की टीमें खुद गांवों तक पहुंच रही हैं, तो लोगों को काफी राहत मिल रही है।

पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे पशुओं को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता। अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने सभी पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराएं। खासकर डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि उनके लिए पशुओं का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी होता है।

अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया जा रहा है। गांवों में पहले से मुनादी करवाई जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोग अपने पशुओं को टीकाकरण केंद्र तक ला सकें। कुछ क्षेत्रों में टीमों द्वारा घर-घर जाकर भी पशुओं को टीके लगाए जा रहे हैं, जिससे किसी भी पशु को छूटने न दिया जाए।

इसके साथ ही जिले के विभिन्न पशु चिकित्सालयों में हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं, जहां पशुपालकों को सलाह और आवश्यक जानकारी दी जा रही है। अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे तेज बुखार, शरीर पर गांठें, मुंह से लार निकलना या खाना छोड़ देना, तो तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह पशुओं पर निर्भर होती है। ऐसे में पशुओं का स्वस्थ रहना सीधे तौर पर किसानों की आय से जुड़ा होता है। सरकार भी इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं चला रही है और यह टीकाकरण अभियान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर गांव में पहुंचकर निर्धारित लक्ष्य को पूरा करें। साथ ही अभियान की नियमित निगरानी भी की जा रही है, ताकि इसकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

पशुपालकों को उम्मीद है कि इस अभियान से जिले में पशुओं में फैलने वाली बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। वहीं विभाग का दावा है कि यदि सभी पशुओं का समय पर टीकाकरण हो जाए, तो संक्रामक रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, यह अभियान न केवल पशुओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी सहायक साबित होगा। प्रशासन और पशुपालन विभाग का यह प्रयास यह संदेश देता है कि पशुधन का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मानव स्वास्थ्य, और समय पर उठाए गए कदम ही भविष्य की बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं।

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