
जहरीली गैस बनी मौत का जाल—पानीपत के STP प्लांट में दो श्रमिकों की दर्दनाक मौत, लापरवाही पर उठे सवाल
समाचार क्यारी (हरियाणा, पानीपत)
हरियाणा के पानीपत जिले से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक हादसा सामने आया है, जिसने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौटाला रोड स्थित एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) में काम के दौरान जहरीली गैस के संपर्क में आने से दो श्रमिकों की दम घुटने से मौत हो गई। यह हादसा इतना अचानक और भयावह था कि दोनों मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिल सका।

मृतकों की पहचान सौरव और अजय के रूप में हुई है, जो जननायक जनता पार्टी (JJP) के राष्ट्रीय महासचिव देवेंद्र कादियान की हैचरी में काम करते थे। बताया जा रहा है कि प्लांट में कुछ दिनों से ब्लॉकेज की समस्या बनी हुई थी, जिसे ठीक करने के लिए इन दोनों श्रमिकों को मौके पर बुलाया गया था।
घटना के दिन जब दोनों मजदूर एसटीपी प्लांट पहुंचे, तो उन्हें मेनहोल (हॉल) के अंदर उतरकर ब्लॉकेज की स्थिति का जायजा लेने और उसे ठीक करने के लिए कहा गया। बिना किसी पर्याप्त सुरक्षा उपकरण या गैस जांच के वे सीधे अंदर उतर गए। जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद जहरीली गैस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। गैस इतनी घातक थी कि दोनों मजदूरों को बाहर निकलने या मदद के लिए आवाज तक देने का मौका नहीं मिला और कुछ ही पलों में उनकी मौत हो गई।
हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और दोनों शवों को बाहर निकाला। इसके बाद शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पानीपत के सामान्य अस्पताल भेज दिया गया।
इस घटना के बाद मृतकों के परिवारों में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर हरियाणा शहर विकास प्राधिकरण (HSVP) और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि बिना सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को इस तरह के खतरनाक काम में झोंकना उनकी जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
घटना के बाद जेजेपी नेता देवेंद्र कादियान भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने भी अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा के उचित इंतजाम किए जाते, तो शायद इन दोनों मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है। परिजनों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस हादसे के पीछे किसकी लापरवाही जिम्मेदार है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि औद्योगिक और नगर निगम से जुड़े कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जाती है। अक्सर देखा गया है कि ऐसे कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट या मेनहोल जैसे स्थानों पर काम करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जहरीली गैसों की जांच के लिए विशेष उपकरण, ऑक्सीजन मास्क, सुरक्षा बेल्ट और अन्य जरूरी संसाधनों का होना बेहद जरूरी है। लेकिन कई बार लागत बचाने या लापरवाही के चलते इन नियमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इस हादसे ने प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और उनका कड़ाई से पालन कराया जाए।
अंततः, यह हादसा सिर्फ दो मजदूरों की मौत नहीं है, बल्कि यह उन खामियों का आईना है, जो हमारे सिस्टम में मौजूद हैं। जब तक इन कमियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी। समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मिलकर श्रमिकों के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस प्रयास करें।




