
आग उगलते आसमान के बीच बदलेगा मौसम का रुख, लू के थपेड़ों संग बारिश की दस्तक से मिलेगी राहत
समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश, लखनऊ)
उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां अप्रैल का महीना अपने अंतिम चरण में होते हुए भी जून जैसी झुलसा देने वाली तपिश का अहसास करा रहा है। सुबह होते ही तेज धूप का असर दिखने लगता है और दोपहर तक हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि बाहर निकलना किसी जोखिम से कम नहीं लगता। गर्म हवाएं, सूखी लपटों जैसी चलती लू और लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। लेकिन इस झुलसाती गर्मी के बीच अब मौसम के बदलने के संकेत मिलने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

पिछले कई दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है। खासतौर पर बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बांदा में 46.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। प्रयागराज, अमेठी और हमीरपुर जैसे जिलों में भी तापमान 44 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है, जो आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रहा है।
गर्मी का असर इस कदर है कि दोपहर के समय शहरों और कस्बों की सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है। बाजारों में भीड़ कम हो गई है और लोग जरूरी कामों के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। गांवों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर तेज धूप के बीच अपने काम को जारी रखने के लिए मजबूर हैं। खुले आसमान के नीचे काम करना उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है।
हालांकि इस तपती हुई धरती पर राहत की कुछ बूंदें गिरने के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। हाल ही में ललितपुर में हुई हल्की बूंदाबांदी ने मौसम में बदलाव की उम्मीद को मजबूत किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका असर जल्द ही उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगा। इसके प्रभाव से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और हल्की बारिश की शुरुआत हो सकती है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 28 अप्रैल से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने लगेगा। धीरे-धीरे यह बदलाव पूरे राज्य में फैल सकता है, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। हालांकि इस दौरान कुछ जिलों में लू का असर अभी भी बना रहेगा, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
करीब 40 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इनमें बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा, झांसी और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में गर्म हवाएं लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में लू से बचाव के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को ढककर रखें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। शरीर को हाइड्रेट रखना इस समय सबसे जरूरी है।
राजधानी लखनऊ में भी गर्मी ने अपने तेवर दिखाए हैं। यहां अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो इस सीजन का सबसे अधिक है। पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार अप्रैल में इतनी अधिक गर्मी ने लोगों को हैरान कर दिया है। सुबह से ही तेज धूप शुरू हो जाती है और दोपहर तक शहर भट्टी की तरह तपने लगता है।
मौसम में बदलाव के साथ जहां एक ओर तापमान में गिरावट आएगी, वहीं दूसरी ओर हवा में नमी बढ़ने से उमस का असर भी देखने को मिल सकता है। यानी बारिश के बाद भी पूरी तरह से राहत मिलना संभव नहीं है, क्योंकि चिपचिपी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।
फिलहाल मौसम विभाग का कहना है कि 28 से 30 अप्रैल के बीच हल्की बारिश और बादलों की मौजूदगी से गर्मी में थोड़ी कमी आएगी। इससे लू के प्रभाव में गिरावट होगी और लोगों को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन मई महीने की शुरुआत के साथ एक बार फिर तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस समय जरूरत है कि लोग अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें। गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें, धूप से बचें और शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाएं।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश इस समय मौसम के दोहरे दौर से गुजर रहा है, जहां एक तरफ भीषण गर्मी का कहर है और दूसरी तरफ राहत देने वाली बारिश की उम्मीद। आने वाले कुछ दिन इस बदलाव को स्पष्ट करेंगे और यह तय करेंगे कि लोगों को कितनी राहत मिलती है।
जब तक मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं होता, तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। प्रशासन भी लोगों को जागरूक करने में जुटा है ताकि गर्मी से होने वाली समस्याओं को कम किया जा सके।
आखिरकार, यह कहा जा सकता है कि तपते हुए उत्तर प्रदेश में अब मौसम करवट लेने को तैयार है। लू के थपेड़ों के बीच जब बारिश की बूंदें गिरेंगी, तो निश्चित रूप से लोगों को राहत का अहसास होगा। हालांकि यह राहत अस्थायी हो सकती है, लेकिन फिलहाल के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगी।




