
ईंधन कीमतों पर राहत का ‘ब्रेक’, लेकिन जेब पर असर जस का तस
समाचार क्यारी (दिल्ली)
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर इजराइल-ईरान के बीच हालात बिगड़ने के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दोनों ईंधनों पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। पहली नजर में यह आम जनता के लिए राहत भरी खबर लगती है, लेकिन हकीकत यह है कि पेट्रोल पंप पर मिलने वाले दामों में फिलहाल कोई कमी नहीं आएगी।

दरअसल, पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई है। ऐसे में आशंका थी कि देश में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। लेकिन सरकार ने उत्पाद शुल्क कम करके इस संभावित बढ़ोतरी को रोकने की कोशिश की है। यानी आम आदमी को कीमतों में बढ़ोतरी से तो राहत मिली है, लेकिन सस्ते ईंधन का सीधा फायदा अभी नहीं मिलेगा।
कंपनियों के घाटे की भरपाई में जाएगी कटौती
सरकार द्वारा की गई यह कटौती तेल कंपनियों के घाटे को संतुलित करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो रिफाइनरी और मार्केटिंग कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां या तो कीमतें बढ़ाती हैं या नुकसान सहती हैं। इस बार सरकार ने टैक्स कम करके कंपनियों को राहत दी है, ताकि उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ न पड़े।
हाल ही में सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया था, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया। इसके बावजूद खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, क्योंकि इस राहत का फायदा कंपनियों के खर्च संतुलन में लगाया जा रहा है।
विंडफॉल टैक्स फिर लागू
सरकार ने साथ ही डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स भी लागू किया है। डीजल के निर्यात पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि रिफाइनरी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा मुनाफा कमाने के बजाय घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करें।
गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया गया था, जिसे बाद में दिसंबर 2024 में हटा दिया गया था। अब फिर से इसे लागू करने का मकसद बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है।
सरकार को होगा नुकसान, लेकिन जनता को राहत
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अनुसार, इस टैक्स कटौती से सरकार को 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान होगा। वहीं, निर्यात पर लगाए गए टैक्स से पहले 15 दिनों में करीब 1,500 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार के पास दो विकल्प थे—या तो बढ़ती कीमतों का बोझ जनता पर डाला जाए या खुद राजस्व में कटौती करके राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा विकल्प चुना, जिससे जनता को तत्काल राहत मिल सके।
हर 15 दिन में होगी समीक्षा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्यात शुल्क की हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि टैक्स अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार संतुलित रहे और देश में ईंधन की कमी न हो।
कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 21.90 रुपये से घटकर 11.90 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर यह 17.80 रुपये से घटकर 7.80 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 100 डॉलर के पार पहुंच चुकी है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
एलपीजी सप्लाई पर भी असर
इस भू-राजनीतिक संकट का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि रसोई गैस (LPG) की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों में रुकावट आने से आपूर्ति बाधित हुई है।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने अपने उत्पादन को पेट्रोकेमिकल्स से हटाकर एलपीजी पर केंद्रित किया है। इसके चलते घरेलू गैस उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि देश में गैस की किल्लत न हो।
अलग-अलग राज्यों में अलग कीमतें
देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें टैक्स संरचना के कारण अलग-अलग हैं। जैसे हरियाणा में पेट्रोल करीब 94 रुपये और डीजल 87 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जबकि महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल जैसे राज्यों में कीमतें 100 रुपये के पार हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम सीधे तौर पर कीमतें घटाने वाला नहीं है, लेकिन बढ़ती महंगाई पर ब्रेक लगाने जैसा जरूर है। अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते थे।
सोशल मीडिया पर लोग इसे सरकार की बड़ी राहत मान रहे हैं और “मोदी है तो मुमकिन है” जैसे रिएक्शन भी दे रहे हैं। हालांकि, आम आदमी के लिए असली राहत तब होगी जब पंप पर मिलने वाली कीमतें भी कम होंगी। फिलहाल, यह फैसला बढ़ती कीमतों को रोकने की दिशा में एक अहम कदम जरूर माना जा रहा है।




