पंजाब

अमृतसर से ईरान का सख्त संदेश: अमेरिका-इजरायल को दी चेतावनी, 100 गुना जवाबी हमले की बात; खामेनेई की याद में कार्यक्रम का न्योता

समाचार क्यारी (पंजाब)

पंजाब की पवित्र धरती से एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संदेश सामने आया है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने अमृतसर पहुंचकर जहां धार्मिक आस्था का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल को लेकर तीखी चेतावनी भी दी। यह प्रतिनिधिमंडल अली खामेनेई की मृत्यु के बाद भारत दौरे पर आया हुआ है और विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

हरिमंदिर साहिब में मत्था टेककर दी श्रद्धांजलि

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमृतसर पहुंचकर श्री हरिमंदिर साहिब में मत्था टेका और खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने सिख समुदाय के प्रति सम्मान प्रकट किया और दोनों धर्मों के बीच शहादत की साझा भावना को रेखांकित किया।

प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सिख नेतृत्व से मुलाकात कर आगामी कार्यक्रमों में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया।

अकाल तख्त और एसजीपीसी को दिया निमंत्रण

प्रतिनिधिमंडल ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को दिल्ली में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया। यह कार्यक्रम 12 अप्रैल को ईरान कल्चर हाउस में आयोजित किया जाएगा, जो खामेनेई की स्मृति में 40वें दिन का आयोजन होगा।

अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियानिया ने इस दौरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्धविराम अस्थायी है और ईरान स्थायी शांति चाहता है, लेकिन यदि उसकी शर्तें नहीं मानी गईं तो वह कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर अगले 10 दिनों के भीतर ईरान की मांगों को पूरा नहीं किया गया और नुकसान की भरपाई नहीं हुई, तो 11वें दिन अमेरिका और इजरायल पर पहले से 100 गुना ज्यादा मिसाइलों से हमला किया जाएगा।

ट्रंप के बयानों पर भी साधा निशाना

जियानिया ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक ओर ट्रंप दिन में ईरान को खत्म करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर रात में युद्ध रोकने की अपील करते हैं। इस तरह के विरोधाभासी बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अस्थिरता पैदा होती है।

संयुक्त राष्ट्र पर भी जताया अविश्वास

ईरानी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ठोस गारंटी नहीं देतीं, तब तक ईरान किसी भी युद्धविराम पर भरोसा नहीं करेगा।

उनका कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में ईरान के बच्चों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ईरान के भीतर आक्रोश बढ़ा है।

भारत-ईरान संबंधों का किया जिक्र

इस दौरान जियानिया ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीब 5000 साल पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते हैं, जो आज भी मजबूत हैं।

उन्होंने पंजाब विधानसभा द्वारा ईरान के समर्थन में पारित प्रस्ताव की सराहना की और इसे दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बताया।

सिख धर्म और इस्लाम में समानता पर जोर

प्रतिनिधिमंडल ने सिख धर्म और इस्लाम के बीच समानताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों ही धर्मों में शहादत को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है और शहीदों को अमर माना जाता है। यही कारण है कि खामेनेई की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में सिख समुदाय को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

लखनऊ और दिल्ली में भी हुए आयोजन

इससे पहले 7 अप्रैल को लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़ा में खामेनेई की याद में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में कई धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनी, मेडिकल कैंप और रक्तदान शिविर जैसे सामाजिक कार्यों का आयोजन भी किया गया, जिससे समाज सेवा का संदेश दिया गया। अब इसी तरह का एक बड़ा आयोजन दिल्ली में प्रस्तावित है।

बढ़ती वैश्विक तनाव की आहट

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस बयान को वैश्विक राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल को दी गई खुली चेतावनी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकला, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में सभी की नजरें आने वाले 10 दिनों पर टिकी हैं, जो इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

निष्कर्ष

अमृतसर से दिया गया ईरान का यह संदेश केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संकेत भी है। जहां एक ओर धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव की बात की गई, वहीं दूसरी ओर सख्त चेतावनी भी दी गई।

अब देखना यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या वाकई हालात शांतिपूर्ण दिशा में बढ़ते हैं या फिर टकराव की स्थिति और गहराती है। फिलहाल, यह घटनाक्रम पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

 

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