
कानपुर किडनी रैकेट का जाल गहराया: इनामी अली और डॉ. अफजाल के करीबी रडार पर, नेटवर्क के कई चौंकाने वाले खुलासे
समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश, कानपुर)
कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट मामले ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे को भी हिलाकर रख दिया है। अवैध रूप से किडनी खरीद-फरोख्त और ट्रांसप्लांट करने वाले इस गिरोह की जड़ें अब धीरे-धीरे गहराई तक उजागर हो रही हैं। पुलिस ने इस मामले में 25 हजार रुपये के इनामी ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ अली और डॉक्टर अफजाल अहमद के करीबियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
जांच एजेंसियों ने अली और अफजाल से जुड़े लोगों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर डाल दिया है। उनके हर कॉल और गतिविधि पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सके। हालांकि, यह चर्चा भी जोरों पर है कि अली पुलिस के कब्जे में आ चुका है, लेकिन इस बारे में पुलिस अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इस पूरे मामले में एक और अहम कड़ी सामने आई है, जो गिरोह के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी। जानकारी के मुताबिक, हरदोई निवासी शिवम यादव, जो इस गैंग के सरगना रोहित तिवारी का करीबी बताया जा रहा है, गिरोह के लिए गाड़ियां और फ्लाइट टिकट की व्यवस्था करता था। यह व्यवस्था आरोपितों को एक शहर से दूसरे शहर तक आसानी से पहुंचाने और उनकी गतिविधियों को गुप्त रखने में मदद करती थी। पुलिस अब शिवम यादव की भी तलाश में जुटी हुई है।
अब तक इस मामले में गिरोह के सरगना, डॉक्टर दंपती सहित कुल 10 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा आठ अन्य आरोपितों की पहचान हुई है, जिनमें से तीन लखनऊ के बताए जा रहे हैं। पुलिस इन सभी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
इस किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड रोहित तिवारी बताया जा रहा है, जो महज 12वीं पास है। वह मूल रूप से हरदोई जिले के बिलग्राम का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में गाजियाबाद में रह रहा था। पुलिस की पूछताछ में उससे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी पहुंच दिल्ली और नोएडा के कुछ बड़े और प्रतिष्ठित अस्पतालों तक भी थी। यह खुलासा सामने आने के बाद चिकित्सा जगत में भी खलबली मच गई है। हालांकि, कुछ संवेदनशील कारणों के चलते पुलिस फिलहाल इस दिशा में खुलकर कार्रवाई करने से बच रही है और अपनी जांच को फिलहाल फरार आरोपितों तक ही सीमित रखे हुए है।
पुलिस ने इनामी आरोपी अली की पत्नी और डॉक्टर अफजाल के करीबियों से पूछताछ की है। उनके फोन नंबरों को सर्विलांस पर डाल दिया गया है और उनके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति की निगरानी की जा रही है। पुलिस का मानना है कि आरोपित जल्द ही अपने किसी करीबी से संपर्क करेंगे, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने कहा कि अली और अफजाल को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे रैकेट से जुड़े कई बड़े राज खुल सकते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2023 में इस गिरोह ने मेडीलाइफ अस्पताल में एक महिला का किडनी ट्रांसप्लांट किया था। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हैरानी की बात यह रही कि उसे बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज या पर्चे के भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई थी।
इसके अलावा, नेपाल के एक व्यक्ति का भी इस गिरोह ने किडनी ट्रांसप्लांट किया था, जिसकी बाद में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, उस व्यक्ति को कोलकाता के एक व्यक्ति द्वारा किडनी दी गई थी। पुलिस ने उस व्यक्ति के परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ मिला।
एक अन्य मामला केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल से सामने आया, जहां मुजफ्फरनगर की रहने वाली पारुल का 29 मार्च की रात अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। जांच में पता चला कि पारुल को बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी। यह मामला 30 मार्च को उजागर हुआ, जिसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की।

कानपुर किडनी रैकेट का यह मामला लगातार नए खुलासों के साथ सामने आ रहा है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस गिरोह के नेटवर्क और कार्यप्रणाली की परतें खुलती जा रही हैं। अब सभी की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश होगा और इसमें शामिल सभी दोषियों को सजा मिलेगी।




