
कानपुर में दिल दहला देने वाली वारदात—टीवी विवाद से शुरू हुआ खून, पिता ने जुड़वां बेटियों की निर्मम हत्या की
(समाचार क्यारी उत्तर प्रदेश कानपुर)
उत्तर प्रदेश के कानपुर के किदवई नगर स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता ने अपनी ही दो मासूम जुड़वां बेटियों की बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना केवल एक पल के गुस्से का परिणाम नहीं, बल्कि पहले से तैयार की गई सोची-समझी साजिश बताई जा रही है, जिसने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया।

रात की शुरुआत सामान्य, फिर बढ़ा तनाव
घटना वाली रात परिवार के लिए सामान्य थी। आरोपी शशिरंजन मिश्रा ने पत्नी रेशमा, जुड़वां बेटियों रिद्धि और सिद्धि, तथा बेटे रुद्रव के साथ खाना खाया। इसके बाद सभी लोग टीवी देखने बैठ गए। घर का माहौल सामान्य दिख रहा था, लेकिन उसी दौरान विवाद की शुरुआत हुई।
शशिरंजन ने सभी से टीवी बंद कर सोने को कहा, लेकिन बच्चों ने कार्टून देखने की जिद कर दी। पत्नी ने भी बच्चों का समर्थन करते हुए थोड़ी देर और टीवी देखने देने की बात कही। इसी बात से शशिरंजन का गुस्सा बढ़ गया और उसने परिवार को धमकाना शुरू कर दिया।
गुस्से से खून तक पहुंची कहानी
गुस्से में आकर आरोपी ने सभी को पीटने की धमकी दी, जिसके बाद घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। डर के कारण पत्नी अपने बेटे के साथ दूसरे कमरे में चली गई, जबकि दोनों जुड़वां बेटियां अपने पिता के कमरे में ही रह गईं।
यहीं से घटना ने भयावह रूप लेना शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, रात करीब 1:50 बजे से 3:35 बजे के बीच शशिरंजन ने अपनी दोनों बेटियों पर हमला किया और उनकी हत्या कर दी।
पहले एक बेटी को बनाया निशाना
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने पहले सिद्धि को निशाना बनाया। उसे डर था कि अगर दूसरी बेटी पहले जाग गई तो वह विरोध कर सकती है या शोर मचा सकती है। इसी कारण उसने पहले सिद्धि का गला दबाया और फिर चापड़ से वार कर उसकी हत्या कर दी।
इसके बाद वह कुछ देर शांत बैठा रहा और फिर दूसरी बेटी रिद्धि को भी उसी तरह मार दिया। इस दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरों ने पूरी घटना रिकॉर्ड कर ली।
पहले से खरीदा गया हथियार
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने इस हत्या की योजना पहले से बना रखी थी। करीब पांच दिन पहले उसने मूलगंज बाजार से 500 रुपये में चापड़ खरीदा था। इसे उसने घर में छिपाकर रखा था ताकि किसी को शक न हो।
इसके अलावा घर में पहले से हथौड़ा मौजूद था, जिसका इस्तेमाल भी हत्या में किया गया। यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि यह घटना अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित थी।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी वारदात

घर में लगे चार सीसीटीवी कैमरों ने पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लिया। पुलिस के अनुसार, कैमरे केवल पत्नी के बेडरूम और बाथरूम को छोड़कर पूरे घर में लगे थे। फुटेज में साफ दिख रहा है कि किस तरह परिवार ने खाना खाया, टीवी देखा और फिर धीरे-धीरे माहौल तनाव में बदल गया।
इन्हीं फुटेज के आधार पर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को समझा और आरोपी को गिरफ्तार किया।
पहले भी कर चुका था हिंसा
परिजनों के अनुसार, शशिरंजन पहले भी हिंसक व्यवहार कर चुका था। पत्नी रेशमा ने बताया कि वह नशे का आदी और बहुत गुस्सैल व्यक्ति था। वह पहले भी उन पर चाकू से दो बार हमला कर चुका था, जिसमें वह किसी तरह बच गई थीं।
रेशमा ने यह भी बताया कि कई बार उन्होंने थाने में शिकायत दी थी, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
पारिवारिक तनाव और दूरी

जानकारी के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से रिश्ते अच्छे नहीं थे। दोनों अलग-अलग कमरों में रहते थे। बच्चों का ज्यादातर समय पिता के साथ बीतता था, जबकि बेटा मां के साथ रहता था।
इस दूरी और तनाव ने परिवार के भीतर एक अस्थिर माहौल बना दिया था, जिसका दुखद परिणाम इस घटना के रूप में सामने आया।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। दीपेंद्र नाथ चौधरी, डीसीपी साउथ ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। हत्या में इस्तेमाल चापड़ और हथौड़ा भी बरामद कर लिया गया है।
हालांकि आरोपी ने हत्या की बात कबूल कर ली है, लेकिन अभी तक उसने स्पष्ट रूप से इसका कारण नहीं बताया है।
समाज को झकझोर देने वाली घटना

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, नशे की लत और घरेलू तनाव का गंभीर उदाहरण है। एक पिता द्वारा अपनी ही मासूम बेटियों की हत्या ने पूरे समाज को झकझोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय रहते काउंसलिंग और हस्तक्षेप बेहद जरूरी होता है, ताकि स्थिति इस हद तक न पहुंचे।
निष्कर्ष
कानपुर की यह घटना एक ऐसा दर्दनाक उदाहरण है, जो यह दिखाती है कि गुस्सा, नशा और पारिवारिक तनाव किस तरह एक पूरे परिवार को खत्म कर सकते हैं। कानपुर में हुई यह वारदात आने वाले समय के लिए एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब सवाल यह है कि क्या समय रहते हस्तक्षेप किया जाता, तो दो मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं? यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गहरी सीख है।




