
खेतों में तबाही का मंजर: रोहतक में आग ने उजाड़े सपने, साढ़े 34 एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक
हरियाणा के Rohtak जिले में सोमवार को एक दर्दनाक घटना ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों को राख में बदल दिया। किलोई खास और रुड़की गांव के खेतों में अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते साढ़े 34 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। यह घटना न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनी, बल्कि किसानों के मनोबल पर भी गहरा असर छोड़ गई।

बताया जा रहा है कि आग की शुरुआत एक छोटी-सी चिंगारी से हुई, लेकिन तेज हवाओं के चलते यह तेजी से फैलती चली गई। लगभग 45 मिनट के भीतर ही आग ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि सात किसानों की फसल पूरी तरह उसकी चपेट में आ गई। खेतों में खड़ी सुनहरी फसलें, जो कुछ ही दिनों में कटने वाली थीं, अब काली राख में तब्दील हो चुकी हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के किसान तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने की कोशिशों में जुट गए। किसी ने पेड़ों की टहनियों से आग को दबाने का प्रयास किया, तो किसी ने ट्रैक्टर लेकर खेतों की जुताई शुरू कर दी। लगभग 15 ट्रैक्टरों की मदद से किसानों ने आग को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। उनकी इस कोशिश से कुछ हद तक आग को काबू में लाया जा सका, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।
इस आग में जिन किसानों की फसलें जलीं, उनमें दीपक, नरेंद्र, सुरेंद्र, राजेश, प्रकाश, ओमबीर और जोगिंद्र शामिल हैं। किसी की 11 एकड़, तो किसी की 9 या 4 एकड़ फसल जलकर पूरी तरह खत्म हो गई। कुल मिलाकर 34.5 एकड़ फसल राख हो गई, जो इन किसानों के लिए भारी नुकसान है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने इस फसल के लिए कड़ी मेहनत की थी। कई किसानों ने कर्ज लेकर बीज, खाद और सिंचाई का खर्च उठाया था। छह महीने तक दिन-रात मेहनत करने के बाद जब फसल तैयार हुई, तो उन्हें उम्मीद थी कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी। लेकिन इस आग ने उनकी सारी उम्मीदों को तोड़ दिया।
एक किसान ने बताया कि वह अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जमा कर रहा था, जबकि दूसरे किसान को अपनी बेटी की शादी करनी थी। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे आगे कैसे अपने खर्चों को पूरा करेंगे। यह घटना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को बुलाया गया। कुछ ही समय में चार दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद करीब सवा 12 बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। हालांकि तब तक खेतों में खड़ी पूरी फसल जल चुकी थी।
आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि जिन खेतों में आग लगी, वहां से बिजली की लाइन नहीं गुजरती थी। इससे शॉर्ट सर्किट की संभावना से इनकार किया जा रहा है। ऐसे में आग लगने के कारणों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
इस घटना के बाद किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को उनके नुकसान की भरपाई करनी चाहिए, ताकि वे दोबारा खेती कर सकें। यदि उन्हें समय पर सहायता नहीं मिली, तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
जिला अग्निशमन विभाग ने किसानों को आग से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि खेतों में हमेशा पानी की व्यवस्था रखनी चाहिए और ट्रैक्टर स्प्रे मशीन को तैयार रखना चाहिए। इसके अलावा, सोलर ट्यूबवेल को चालू हालत में रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी मिल सके।
किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे फसल कटाई के बाद उसे बिजली के तारों के नीचे इकट्ठा न करें। खेतों में धूम्रपान करने से बचें और अगर कोई बीड़ी या सिगरेट पीता है, तो उसे पूरी तरह बुझाकर ही फेंके। आग लगने की स्थिति में तुरंत 112 और 101 नंबर पर सूचना देना चाहिए।
पिछले कुछ दिनों में जिले के अन्य गांवों में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं। भैयापुर, लाढ़ौत और गांधरा गांवों में भी आग लगने से किसानों की फसलें जल चुकी हैं। इससे यह साफ है कि इस समय खेतों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है और किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
यह घटना यह भी दिखाती है कि खेती आज भी कई जोखिमों से भरी हुई है। किसान अपनी पूरी मेहनत और उम्मीदों के साथ फसल उगाते हैं, लेकिन एक छोटी-सी चूक या हादसा उनकी सारी मेहनत को बर्बाद कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और प्रशासन किसानों की सुरक्षा और सहायता के लिए ठोस कदम उठाएं।
कुल मिलाकर, रोहतक की यह घटना एक चेतावनी है कि हमें खेती और किसानों की सुरक्षा को लेकर और गंभीर होना होगा। समय पर सहायता, बेहतर प्रबंधन और जागरूकता के जरिए ही ऐसे हादसों को रोका जा सकता है और किसानों के सपनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।




