
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का आगाज: अब 2.5 घंटे में पूरा होगा सफर, जानें खास बातें और नियम
समाचार क्यारी (दिल्ली)
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। Delhi-Dehradun Expressway का आज से औपचारिक शुभारंभ हो गया है, जिसे Narendra Modi ने जनता को समर्पित किया। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर न केवल दो राज्यों को जोड़ता है, बल्कि यात्रा, व्यापार और पर्यटन के नए अवसर भी खोलता है। मंगलवार दोपहर के बाद से यह एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया गया, जिसके साथ ही दिल्ली से देहरादून तक का सफर अब बेहद आसान और तेज हो गया है।

यह एक्सप्रेसवे देश की राजधानी Delhi को उत्तराखंड की राजधानी Dehradun से सीधे जोड़ता है। इसकी कुल लंबाई करीब 213 किलोमीटर है और इसे आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। इस परियोजना के शुरू होने से पहले जहां इस दूरी को तय करने में 5 से 6 घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर महज ढाई से तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
एक्सप्रेसवे को फिलहाल 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने के लिए खोला गया है, हालांकि इसकी डिजाइन स्पीड इससे भी अधिक है। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर केवल चार पहिया और भारी वाहन ही चल सकेंगे। सुरक्षा कारणों के चलते दोपहिया, तीन पहिया और ट्रैक्टर जैसे धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम क्षेत्र से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली और सहारनपुर जिलों से गुजरते हुए देहरादून तक पहुंचता है। इस मार्ग से हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना भी अब पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। खासकर वीकेंड पर घूमने जाने वाले लोगों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी वरदान से कम नहीं है।
इस परियोजना का निर्माण National Highways Authority of India द्वारा कराया गया है। वर्ष 2021 में शुरू हुई इस परियोजना को लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसे चार चरणों और छह पैकेज में पूरा किया गया है, जो इसे एक जटिल लेकिन शानदार इंजीनियरिंग परियोजना बनाता है।
एक्सप्रेसवे की खासियतों की बात करें तो इसमें 6 लेन का हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाया गया है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें 100 से अधिक अंडरपास, कई रेलवे ओवरब्रिज और आधुनिक इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे ट्रैफिक का प्रवाह सुचारु बना रहेगा। इसके साथ ही 76 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड भी बनाई गई है, ताकि स्थानीय यातायात को भी सुविधा मिल सके।
इस एक्सप्रेसवे की एक अनोखी विशेषता इसका वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जिसकी लंबाई करीब 12 से 14 किलोमीटर है। यह एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके प्राकृतिक आवागमन को बाधित न करना है। इसके अलावा डाटकाली टनल जैसी संरचनाएं भी इस परियोजना को खास बनाती हैं।
सुरक्षा के लिहाज से भी इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा इमरजेंसी लेन, एम्बुलेंस सेवा और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
दिल्ली के भीतर इस एक्सप्रेसवे के एंट्री और एग्जिट पॉइंट इस तरह से बनाए गए हैं कि शहर के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले लोगों को आसानी हो। शास्त्री पार्क, गीता कॉलोनी, विकास मार्ग, कश्मीरी गेट और सिग्नेचर ब्रिज जैसे प्रमुख मार्गों से इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने की सुविधा दी गई है। इससे दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक दबाव को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
टोल व्यवस्था की बात करें तो इस एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने के लिए पुराने मार्ग की तुलना में थोड़ा अधिक शुल्क देना होगा। जहां पहले दिल्ली से देहरादून तक पहुंचने में करीब 445 रुपये का टोल लगता था, वहीं अब इस एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल 675 रुपये निर्धारित किया गया है। हालांकि, समय की बचत और बेहतर सड़क सुविधा को देखते हुए यह शुल्क उचित माना जा रहा है। यदि कोई यात्री 24 घंटे के भीतर वापसी करता है, तो उसे राउंड ट्रिप के लिए 1,010 रुपये चुकाने होंगे।
दिल्ली के स्थानीय लोगों के लिए एक राहत की बात यह है कि अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक का लगभग 18 किलोमीटर का हिस्सा टोल-फ्री रखा गया है। इससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और शहर के भीतर यातायात भी सुचारु बना रहेगा।
यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति देगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। खासकर उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे आधुनिक भारत की विकास गाथा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह परियोजना न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि लोगों के जीवन को भी आसान बनाएगी। आने वाले समय में यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों में से एक बन सकता है, जो विकास और प्रगति की रफ्तार को और तेज करेगा।




