हरियाणा

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का ड्रीम प्रोजेक्ट लेट, अब अगस्त में होगा तैयार

समाचार क्यारी (हरियाणा, पंचकूला)

पंचकूला। देश के आधुनिक रेलवे स्टेशनों की सूची में शामिल होने जा रहा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन अब तय समय से पीछे चल रहा है। पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अप्रैल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे अगस्त तक पूरा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है, जिस कारण इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है।

करीब 462 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन देश के चुनिंदा हाई-टेक स्टेशनों में शामिल होगा। इस प्रोजेक्ट को रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) के तहत लगभग तीन साल पहले शुरू किया गया था। शुरुआत में उम्मीद जताई जा रही थी कि काम तय समय में पूरा हो जाएगा, लेकिन अब इसमें करीब चार महीने की देरी हो गई है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, देरी की सबसे बड़ी वजह स्टेशन पर लगातार चल रही ट्रेनों की आवाजाही और यात्रियों की भारी संख्या है। चूंकि यह स्टेशन पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए निर्माण कार्य के साथ-साथ ट्रेनों का संचालन भी जारी रखना पड़ा। इस वजह से काम की गति प्रभावित हुई और समयसीमा आगे बढ़ानी पड़ी।

इस स्टेशन की सबसे खास बात इसकी अनोखी लोकेशन और डिजाइन है। चंडीगढ़ और पंचकूला के बीच स्थित इस रेलवे स्टेशन की एंट्री दोनों शहरों से है। यानी यात्री चाहे चंडीगढ़ की ओर से आएं या पंचकूला की ओर से, उन्हें समान सुविधाएं मिलेंगी। यही कारण है कि यह स्टेशन न सिर्फ एक परिवहन केंद्र, बल्कि दो राज्यों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी बन गया है।

इस प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि उनका इस क्षेत्र से पुराना जुड़ाव रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि स्टेशन के पूरी तरह तैयार होने के बाद इसका उद्घाटन भी प्रधानमंत्री के हाथों ही होगा, जो इस प्रोजेक्ट को और खास बना देगा।

अगर सुविधाओं की बात करें तो यह रेलवे स्टेशन अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन के साथ तैयार किया जा रहा है। इसे ग्रीन बिल्डिंग्स की प्लेटिनम रेटिंग के अनुसार विकसित किया जा रहा है, जिससे यह ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से एक उदाहरण बनेगा। स्टेशन परिसर में 1,350 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाया जा रहा है, जिससे पूरे स्टेशन को हरित ऊर्जा के जरिए बिजली आपूर्ति की जाएगी।

यह स्टेशन आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। अनुमान है कि यह रोजाना करीब 90 हजार यात्रियों की आवाजाही को संभाल सकेगा। साथ ही, अगले 30 वर्षों तक बढ़ती यात्री संख्या और आधुनिक सुविधाओं की मांग को भी पूरा करेगा।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। स्टेशन के कई हिस्सों में काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि कुछ हिस्सों में फिनिशिंग और तकनीकी इंस्टॉलेशन का कार्य बाकी है। अधिकारियों के अनुसार, जुलाई के अंत तक अधिकांश काम पूरा कर लिया जाएगा और अगस्त तक स्टेशन पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।

चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर बलबीर सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की है कि परियोजना अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि देरी जरूर हुई है, लेकिन गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। उनका कहना है कि कोशिश यही है कि प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि यात्रियों को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन न सिर्फ यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनेगा, बल्कि यह शहर की पहचान को भी एक नया आयाम देगा। आधुनिक वास्तुकला, डिजिटल सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और स्वच्छ वातावरण इसे देश के सबसे बेहतरीन रेलवे स्टेशनों में शामिल कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, भले ही यह ड्रीम प्रोजेक्ट तय समय से पीछे चल रहा हो, लेकिन इसके पूरा होने के बाद यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों की सुविधा के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा। अब सभी की नजरें अगस्त महीने पर टिकी हैं, जब यह बहुप्रतीक्षित वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन पूरी तरह से तैयार होकर देश के सामने आएगा।

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