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पुणे में जहरीली गैस हादसा: टैंक में उतरे तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह

समाचार क्यारी (मुंबई, महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। एक मशरूम फार्मिंग यूनिट में जहरीली गैस के रिसाव के कारण तीन मजदूरों की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब एक मजदूर नाली के टैंक की सफाई के लिए उसमें उतरा और वापस नहीं आया। उसे बचाने के लिए गए दो अन्य मजदूर भी उसी टैंक में उतर गए और वे भी जानलेवा गैस के संपर्क में आकर अपनी जान गंवा बैठे।

यह हादसा पुरंदर तालुका के बेलसर गांव में हुआ, जो जेजुरी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। रविवार शाम करीब 4:30 बजे यह घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।

कैसे हुआ हादसा?

मिली जानकारी के अनुसार, एक मजदूर को नाली के टैंक की सफाई का काम दिया गया था। यह टैंक एक बंद जगह थी, जहां पहले से ही जहरीली गैस जमा हो चुकी थी। जैसे ही मजदूर टैंक के अंदर गया, वह गैस के प्रभाव से बेहोश हो गया और बाहर नहीं आ सका।

काफी देर तक उसके बाहर न आने पर उसके साथियों को चिंता हुई। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के दो अन्य मजदूर उसे देखने के लिए टैंक में उतर गए। लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि अंदर की हवा पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। कुछ ही क्षणों में वे भी बेहोश हो गए।

बचाव की कोशिश नाकाम

जब तीनों मजदूर काफी समय तक बाहर नहीं आए, तो आसपास के लोगों को शक हुआ। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को समझा और टैंक को खोलने के लिए अर्थमूवर मशीन का सहारा लिया।

कड़ी मशक्कत के बाद तीनों मजदूरों को बाहर निकाला गया और तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे ने इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी।

अस्पताल में पुष्टि और पोस्टमार्टम

तीनों मजदूरों को जेजुरी के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि की। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रख लिया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा है कि टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस के कारण दम घुटने से मजदूरों की मौत हुई है।

मृतकों की पहचान

इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों मजदूरों की पहचान पिंटू राजेश प्रसाद (23), व्यास सोहम कुमार (22) और गौतम रामसुरन कुशवाहा (36) के रूप में हुई है। ये सभी देवरिया जिले के रहने वाले थे और रोजी-रोटी की तलाश में महाराष्ट्र आए थे।

तीनों मजदूर अपने परिवारों के लिए कमाने का सहारा थे। उनकी मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जहरीली गैस का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बंद टैंकों और नालियों में अक्सर हाइड्रोजन सल्फाइड, मिथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं। ये गैसें बेहद खतरनाक होती हैं और कुछ ही सेकंड में इंसान को बेहोश कर सकती हैं।

यदि ऐसे स्थानों पर काम करने से पहले गैस की जांच और उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था न हो, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। इस मामले में भी ऐसी ही लापरवाही सामने आ रही है।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी

यह हादसा कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। नियमों के अनुसार, किसी भी बंद स्थान में काम करने से पहले गैस डिटेक्टर से जांच, ऑक्सीजन सप्लाई और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य होता है।

लेकिन यहां इन नियमों का पालन नहीं किया गया। मजदूर बिना किसी सुरक्षा किट के टैंक में उतर गए, जिससे यह दुखद घटना घटी।

पुलिस जांच जारी

महाराष्ट्र पुलिस के अंतर्गत जेजुरी पुलिस स्टेशन ने इस मामले में आकस्मिक मौत का केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हादसे में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है या नहीं।

यदि जांच में दोषी पाए गए, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

श्रमिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश में कई जगहों पर मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा के खतरनाक काम करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और उद्योग प्रबंधन को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

परिवारों का दर्द

तीनों मजदूरों की मौत की खबर उनके परिवारों तक पहुंचते ही मातम छा गया। जिन घरों में वे कमाने वाले थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

स्थानीय प्रशासन से पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने की मांग की जा रही है।

निष्कर्ष

पुणे के पुरंदर तालुका में हुआ यह हादसा एक गंभीर चेतावनी है कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन कितना जरूरी है। तीन मजदूरों की मौत ने यह साबित कर दिया है कि थोड़ी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी कीमत मांग सकती है।

जरूरत है कि प्रशासन, उद्योग मालिक और समाज मिलकर श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं और हर मजदूर सुरक्षित घर लौट सके।

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