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मौसम का बदला मिजाज: पहाड़ों में बर्फबारी, मैदानों में बारिश और तेज हवाओं का कहर

समाचार क्यारी (भारत)

देशभर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और इसका असर उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक साफ देखा जा रहा है। दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे कई हिस्सों में तेज हवाएं, बारिश, ओलावृष्टि और कहीं-कहीं बर्फबारी तक देखने को मिल रही है। इस बदले हुए मौसम ने जहां गर्मी से कुछ राहत दी है, वहीं कई क्षेत्रों में जनजीवन को भी प्रभावित किया है।

India Meteorological Department (आईएमडी) के अनुसार आने वाले तीन से चार दिनों तक देश के बड़े हिस्से में मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। खासकर उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, पूर्वी क्षेत्र और पूर्वोत्तर राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कई जगहों पर बिजली गिरने और ओले पड़ने की घटनाएं भी हो सकती हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में मौसम सबसे अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के मुताबिक पांच मई तक इन क्षेत्रों में मौसम खराब बना रह सकता है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जो पेड़ों और कमजोर ढांचों के लिए खतरा बन सकती हैं।

मैदानी इलाकों में भी मौसम तेजी से बदल रहा है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। अनुमान है कि 3 मई से 7 मई के बीच अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कमी आ सकती है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन अचानक हुए इस बदलाव से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

पूर्वोत्तर भारत में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। असम, मेघालय, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन क्षेत्रों में 115 मिमी से लेकर 200 मिमी से अधिक तक वर्षा हो सकती है। लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। साथ ही भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ गया है।

अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। यहां येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

मध्य और पूर्वी भारत में भी मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश में भी धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

दक्षिण भारत में भी मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं है। केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और आसपास के तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि यहां तापमान अधिक रहने के कारण उमस भरा मौसम बना रहेगा। यानी बारिश के बावजूद लोगों को चिपचिपी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी।

बीते 24 घंटों में भी देश के कई हिस्सों में मौसम ने अपना असर दिखाया है। मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के मैदानी क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में हवा की गति 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी घटनाएं सामने आईं। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाएं चली हैं।

पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, असम, ओडिशा और बिहार में भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि भी हुई है। पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है।

इस बीच हिमाचल प्रदेश से एक दुखद घटना भी सामने आई है। कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में तेज हवा के कारण एक पेड़ वाहन पर गिर गया, जिसमें छह महिला शिक्षक सवार थीं। इस हादसे में चार शिक्षिकाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि मौसम का यह बदला हुआ रूप कितना खतरनाक हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर में भी खराब मौसम का असर देखने को मिला है। डोडा और रामबन के पास भूस्खलन के कारण प्रमुख राजमार्गों पर यातायात ठप हो गया। सैकड़ों वाहन फंस गए और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई घंटों की मशक्कत के बाद आंशिक रूप से रास्ता खोला जा सका, लेकिन पूरी तरह बहाली में अभी समय लग सकता है।

इस तरह के मौसम में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज हवाओं और बारिश के दौरान खुले स्थानों से बचना चाहिए, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए।

कुल मिलाकर, देशभर में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज जहां एक ओर गर्मी से राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। आने वाले दिनों में भी इसी तरह के हालात बने रहने की संभावना है, ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव साबित हो सकती है।

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