
प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा बना जानलेवा खतरा: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी जवाबदेही
प्रयागराज से एक बार फिर चाइनीज मांझे का मुद्दा सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस गंभीर समस्या को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि जब पहले से इस खतरनाक मांझे पर प्रतिबंध लागू है, तो फिर यह खुलेआम बाजार में कैसे बिक रहा है और लोगों की जान को खतरा क्यों बना हुआ है।

यह मामला केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा प्रश्न बन गया है। अदालत की इस सख्ती ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और उसकी जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अवमानना याचिका से फिर उठा मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे द्वारा दाखिल अवमानना याचिका से हुई। याचिका में कहा गया कि अदालत द्वारा पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते चाइनीज मांझा आज भी धड़ल्ले से बिक रहा है।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे सरकार से दिशा-निर्देश लेकर एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।
प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
अदालत ने इस मामले में गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को पक्षकार बनाया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि अदालत सीधे तौर पर प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करना चाहती है।
यदि अदालत के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है—यह सवाल अब केंद्र में है। अदालत का उद्देश्य केवल जानकारी लेना नहीं, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।
पुराने आदेश, लेकिन असर नहीं
चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध कोई नया फैसला नहीं है। वर्ष 2015 में ‘अनुराग मिश्रा बनाम राज्य’ मामले में अदालत ने इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 14 जनवरी 2026 को ‘हिमांशु श्रीवास्तव बनाम राज्य’ मामले में भी इन आदेशों को दोहराया गया।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। यही वजह है कि अदालत को एक बार फिर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करना पड़ा।
खुले बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता
याचिका में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि चाइनीज मांझा आज भी बाजारों में आसानी से उपलब्ध है। कई दुकानों पर यह खुलेआम बेचा जा रहा है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी इसकी बिक्री जारी है।
यह स्थिति न केवल कानून के उल्लंघन को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी कमी है।
घटनाएं जो डर पैदा करती हैं
चाइनीज मांझे से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। 22 जनवरी 2026 को प्रयागराज में अधिवक्ता अनूप श्रीवास्तव इसके कारण घायल हो गए थे, जब उनके गले में मांझा फंस गया।
इसके अलावा जौनपुर, उन्नाव, मेरठ और लखनऊ जैसे कई जिलों में पिछले एक वर्ष के दौरान कई हादसे हो चुके हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए।
यह घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि यह केवल एक साधारण समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा संकट है।
जीवन के अधिकार का उल्लंघन
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि चाइनीज मांझा लोगों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सुरक्षित जीवन का अधिकार देता है।
जब एक प्रतिबंधित और खतरनाक वस्तु खुलेआम बिक रही हो और उससे लोगों की जान जा रही हो, तो यह सीधे तौर पर इस अधिकार का हनन है।
अदालत का सख्त संदेश
हाईकोर्ट का यह कदम एक स्पष्ट संदेश है कि अब केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। अदालत चाहती है कि उसके आदेशों का वास्तविक पालन हो और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए।
सरकार को एक महीने का समय दिया गया है, जिसमें उसे यह बताना होगा कि उसने इस समस्या को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं।
समाधान की दिशा में जरूरी कदम
इस समस्या से निपटने के लिए बहुस्तरीय प्रयासों की जरूरत है। सबसे पहले, बाजारों में सख्त छापेमारी और कार्रवाई जरूरी है। इसके साथ ही ऑनलाइन बिक्री पर भी निगरानी बढ़ानी होगी।
जनता में जागरूकता फैलाना भी उतना ही जरूरी है। जब तक लोग खुद इस मांझे के खतरे को नहीं समझेंगे, तब तक इसकी मांग बनी रहेगी।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई एक महीने बाद तय की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या जवाब देती है और क्या वह अदालत को संतुष्ट कर पाती है।
निष्कर्ष
चाइनीज मांझा आज एक गंभीर समस्या बन चुका है, जो हर साल कई जिंदगियों को प्रभावित कर रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का हस्तक्षेप इस दिशा में एक अहम कदम है।
अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि भविष्य में किसी को इस जानलेवा खतरे का सामना न करना पड़े।




