दिल्ली

बोतल लौटाओ, पैसा पाओ—दिल्ली में डिपॉजिट रिटर्न स्कीम से प्लास्टिक कचरे पर कसा जाएगा शिकंजा

समाचार क्यारी (दिल्ली)

राजधानी दिल्ली में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता पहाड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। नालियों के जाम होने से लेकर वायु और जल प्रदूषण तक, हर स्तर पर प्लास्टिक का असर साफ दिखाई देता है। इसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार अब एक नई और प्रभावी योजना पर काम कर रही है—डिपॉजिट रिटर्न स्कीम (डीआरएस)। इस योजना के जरिए न केवल प्लास्टिक कचरे को कम करने की कोशिश की जाएगी, बल्कि लोगों को इसके सही निपटान के लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

इस पहल को लेकर पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस योजना की संभावनाओं का गहराई से अध्ययन करें और एक महीने के भीतर एक ठोस प्रस्ताव तैयार करें। यह निर्देश एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दिए गए, जिसमें प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न हो रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार पहले से ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई योजनाएं चला रही है। लेकिन प्लास्टिक कचरा एक ऐसी समस्या है, जो लगातार बढ़ती जा रही है और इसके समाधान के लिए नई सोच और रणनीति की जरूरत महसूस की जा रही है। डीआरएस इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

डिपॉजिट रिटर्न स्कीम का मूल सिद्धांत बेहद सरल है, लेकिन इसका प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है। इस योजना के तहत जब कोई व्यक्ति प्लास्टिक बोतल या पैकेजिंग खरीदता है, तो उसे उसके साथ एक अतिरिक्त राशि जमा करनी होती है। जब वह उस खाली बोतल या पैकेजिंग को किसी निर्धारित कलेक्शन सेंटर पर वापस करता है, तो उसे उसकी जमा राशि वापस मिल जाती है। इस तरह लोग कचरे को फेंकने के बजाय उसे वापस करने के लिए प्रेरित होते हैं।

यह प्रणाली दुनिया के कई देशों में पहले से लागू है और वहां इसे काफी सफलता मिली है। जर्मनी, स्वीडन और अन्य यूरोपीय देशों में इस योजना के तहत 90 प्रतिशत से अधिक प्लास्टिक कचरा वापस इकट्ठा किया जा रहा है। इससे न केवल कचरा कम हुआ है, बल्कि रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया भी काफी मजबूत हुई है।

दिल्ली सरकार इस योजना को लागू करने से पहले देश के अन्य राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन कर रही है। गोवा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इस तरह की योजनाएं पहले से लागू हैं। इन राज्यों के मॉडल को समझकर दिल्ली के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाएगा, जो यहां की जरूरतों के अनुसार सबसे उपयुक्त हो।

इस योजना के तहत केवल कचरा इकट्ठा करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से रीसायकल करना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए सरकार एक मजबूत प्रणाली विकसित करने की योजना बना रही है, जिसमें कलेक्शन सेंटर, रीसाइक्लिंग यूनिट और निगरानी तंत्र शामिल होंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। निजी कंपनियों की भागीदारी से इस योजना को तकनीकी और वित्तीय मजबूती मिल सकती है। साथ ही, इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना की सफलता काफी हद तक लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। यदि लोग इस योजना को समझेंगे और इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे, तो यह निश्चित रूप से सफल हो सकती है। इसके लिए सरकार को व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने होंगे, ताकि हर वर्ग के लोग इस योजना के महत्व को समझ सकें।

हालांकि, इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा। इसके सामने कई चुनौतियां भी होंगी, जैसे कि पूरे शहर में पर्याप्त कलेक्शन सेंटर स्थापित करना, सिस्टम को पारदर्शी बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि लोगों को उनकी जमा राशि समय पर वापस मिले। लेकिन यदि इन चुनौतियों का सही तरीके से समाधान किया जाए, तो यह योजना एक मिसाल बन सकती है।

दिल्ली जैसे बड़े शहर में हर दिन हजारों टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें प्लास्टिक का बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में इस तरह की योजनाएं न केवल जरूरी हैं, बल्कि समय की मांग भी हैं। डीआरएस के जरिए सरकार न केवल कचरे को कम करने की कोशिश कर रही है, बल्कि इसे एक संसाधन में बदलने की दिशा में भी काम कर रही है।

इस योजना से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में दिल्ली की सड़कों, नालों और जल स्रोतों में प्लास्टिक कचरे की मात्रा में कमी आएगी। साथ ही, इससे लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आएगा और वे पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे।

कुल मिलाकर, डिपॉजिट रिटर्न स्कीम दिल्ली के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। यह न केवल शहर को साफ-सुथरा बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम साबित होगी। अब यह देखना होगा कि सरकार इस योजना को किस तरह लागू करती है और यह कितनी जल्दी लोगों के जीवन का हिस्सा बन पाती है।

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