
मेरठ हत्याकांड: कोर्ट से जेल लौटे मुस्कान और साहिल, चेहरे पर झलकी चिंता; सुनवाई के बीच बढ़ा तनाव
(समाचार क्यारी उत्तर प्रदेश मेरठ)
मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपित मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्होंने जज के सवालों का जवाब दिया और उसके बाद उन्हें वापस जिला कारागार भेज दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दोनों के चेहरे पर चिंता और तनाव साफ दिखाई दे रहा था, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मामले की गंभीरता अब उन पर मानसिक रूप से असर डाल रही है।

मंगलवार को दोपहर करीब 2:55 बजे मुस्कान और साहिल को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। यह पेशी कई मायनों में खास थी, क्योंकि इस दौरान मुस्कान अपनी छह महीने की बेटी को गोद में लेकर कोर्ट पहुंची। अदालत में दोनों से अलग-अलग 32 सवाल पूछे गए, जिनका जवाब देने में मुस्कान ने लगभग 20 मिनट और साहिल ने करीब 16 मिनट का समय लिया। खास बात यह रही कि दोनों ने लगभग सभी सवालों के जवाब “नहीं” में दिए।
करीब 20-25 मिनट तक चली इस सुनवाई के बाद दोनों को वापस जेल भेज दिया गया। जब वे कोर्ट से बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं। जेल प्रशासन के अनुसार, यह पहली बार था जब दोनों के चेहरे पर इस तरह का तनाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इससे पहले वे अपेक्षाकृत सामान्य नजर आते थे, लेकिन अब केस की आगे बढ़ती कार्रवाई ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अदालत से लौटने के बाद मुस्कान ने जेल प्रशासन से आगे की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। इससे यह संकेत मिलता है कि वह अपने केस को लेकर काफी चिंतित है और आने वाले फैसलों को लेकर सतर्क भी है। वहीं साहिल ने भी यह कहा है कि उसे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में गवाह पेश करेगा।
दूसरी ओर, मुस्कान की स्थिति कुछ अलग नजर आती है। उसे अभी तक अपने पक्ष में कोई गवाह नहीं मिल पाया है। इतना ही नहीं, घटना के बाद से उसके परिवार का कोई भी सदस्य उससे मिलने जेल नहीं पहुंचा है। यह बात उसके लिए मानसिक रूप से और भी कठिन परिस्थिति पैदा कर रही है। एक तरफ वह गंभीर आरोपों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक समर्थन की कमी उसे अकेलेपन की ओर धकेल रही है।
यह मामला पिछले साल 3 मार्च 2025 को सामने आया था, जब सौरभ राजपूत की हत्या की सनसनीखेज घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया था। आरोप है कि सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की और उसके शव को चार टुकड़ों में काटकर एक ड्रम में सीमेंट के साथ भर दिया, ताकि अपराध को छिपाया जा सके। इस क्रूर वारदात का खुलासा होने के बाद पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
गिरफ्तारी के बाद से दोनों आरोपी लगातार जेल में बंद हैं। इस दौरान मुस्कान ने एक बच्ची को जन्म दिया, जो अब छह महीने की हो चुकी है। इस मासूम बच्ची की मौजूदगी इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना देती है, क्योंकि वह अपनी मां के साथ जेल में रह रही है। अदालत में पेशी के दौरान भी जब मुस्कान अपनी बेटी को गोद में लेकर पहुंची, तो यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था।
वहीं दूसरी ओर, मृतक सौरभ राजपूत के परिवार में अभी भी आक्रोश और दुख का माहौल है। सौरभ की मां रेणू देवी और उनके भाई राहुल उर्फ बबलू ने साफ कहा है कि वे आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए आखिरी दम तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उनका कहना है कि जिस तरह से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया, उसे देखते हुए दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे उम्मीद करते हैं कि अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा।
इस पूरे मामले में अब आगे की सुनवाई और गवाहों की भूमिका बेहद अहम होने वाली है। साहिल जहां अपने पक्ष में गवाह पेश करने की बात कर रहा है, वहीं मुस्कान के पास अभी तक कोई मजबूत कानूनी सहारा नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में केस की दिशा काफी हद तक बदल सकती है।
फिलहाल, दोनों आरोपितों के चेहरे पर दिखाई दे रही चिंता यह दर्शाती है कि मामला अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। अदालत में पूछे गए सवाल और उनकी गंभीरता ने दोनों को यह एहसास करा दिया है कि अब हर जवाब और हर सबूत उनके भविष्य को तय करेगा।
अंततः यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अपराध के बाद कानून की प्रक्रिया कितनी लंबी और जटिल होती है। अब सभी की नजरें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो इस चर्चित हत्याकांड में न्याय की दिशा तय करेगा।




