
कानपुर में ‘किराये का खाता’ बना साइबर ठगी का हथियार: डिलीवरी बॉय के अकाउंट से 1.30 अरब का खेल उजागर
समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश, कानपुर)
उत्तर प्रदेश के Kanpur में सामने आया एक सनसनीखेज मामला यह दिखाता है कि साइबर अपराधी अब किस तरह आम लोगों को मोहरा बनाकर बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। एक साधारण डिलीवरी बॉय के बैंक खाते का इस्तेमाल करते हुए करीब 1.30 अरब रुपये का लेनदेन किया गया। यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल युग में सतर्कता कितनी जरूरी हो गई है।

इस पूरे मामले की शुरुआत एक सामान्य से दिखने वाले समझौते से हुई। पीड़ित युवक, जो पहले फल का व्यापार करता था और बाद में डिलीवरी बॉय की नौकरी करने लगा, के पास पहले से एक चालू बैंक खाता था। उसके दो परिचित युवकों ने उसे स्क्रैप कारोबार के नाम पर यह खाता किराये पर देने के लिए राजी कर लिया। इसके बदले उसे हर महीने 9,000 रुपये देने का वादा किया गया।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद युवक को तय रकम से अधिक पैसे मिलने लगे। यही वह संकेत था, जिसने उसके मन में संदेह पैदा किया। उसने सोचा कि आखिर बिना किसी अतिरिक्त काम के उसे ज्यादा पैसे क्यों मिल रहे हैं। इसी शक के चलते उसने बैंक जाकर अपने खाते की जानकारी ली।
जब बैंक से उसे खाते का पूरा विवरण मिला, तो वह हैरान रह गया। उसके खाते में पिछले नौ महीनों के भीतर करीब 1.30 अरब रुपये का लेनदेन हो चुका था। यह रकम अलग-अलग स्रोतों से आई और विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई थी। इतनी बड़ी रकम देखकर युवक घबरा गया और उसे एहसास हुआ कि उसका खाता किसी बड़े अपराध में इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बाद उसने तुरंत Swaroop Nagar Police Station में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तेजी से कार्रवाई की और जांच शुरू की। जल्द ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिनकी पहचान मो. अमान और मो. वसीउद्दीन उर्फ सरताज के रूप में हुई।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हैं। वे लोगों को अलग-अलग तरीकों से ठगते थे और फिर उस पैसे को ऐसे बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे, जो उनके नाम पर नहीं होते थे। इस तरह वे अपनी पहचान छिपाकर बड़ी रकम का लेनदेन करते थे।
इस मामले में Atul Kumar Srivastava ने बताया कि आरोपियों के पास से कई अहम सबूत बरामद हुए हैं। इनमें नोट गिनने की मशीन, 39 खाली चेक, फर्जी फर्मों के बैनर, किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज, एग्रीमेंट और कई आधार कार्ड शामिल हैं। इन सबूतों से यह स्पष्ट होता है कि यह कोई छोटा-मोटा अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर ठगी का नेटवर्क है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी केवल एक ही खाते का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। उन्होंने कई अन्य खातों के जरिए भी लेनदेन किया है। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली और अन्य राज्यों की करीब 19 कंपनियों के खातों से भी पैसे का ट्रांजेक्शन किया। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह का दायरा कितना बड़ा है।
यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी देता है। आज के समय में लोग थोड़े से पैसे के लालच में अपनी वित्तीय सुरक्षा से समझौता कर लेते हैं। वे बिना सोचे-समझे अपना बैंक खाता दूसरों को दे देते हैं, यह जाने बिना कि इसका इस्तेमाल अपराध के लिए किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक खाता किसी भी व्यक्ति की पहचान का अहम हिस्सा होता है। इसे किसी और को देना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि गैरकानूनी भी हो सकता है। यदि किसी खाते का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए होता है, तो खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। किसी भी स्थिति में अपना खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या अन्य बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। इसके अलावा यदि खाते में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि लोग डिजिटल जागरूकता बढ़ाएं। इंटरनेट और बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते समय सावधानी बरतें और किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
कानपुर का यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक सीख भी है कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। यह हमें यह समझाता है कि अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा कितनी जरूरी है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि डिजिटल युग में सुरक्षा केवल तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह व्यक्ति की जागरूकता और सतर्कता पर भी निर्भर करती है। यदि हम सावधान रहें और सही कदम उठाएं, तो ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है और खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।




