
खून से सना रिश्ता: कानपुर में पिता ने उजाड़ा अपना ही घर, जुड़वां बेटियों की हत्या से दहशत
कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र में घटी एक हृदयविदारक घटना ने रिश्तों की परिभाषा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पिता को बच्चों का सबसे बड़ा संरक्षक माना जाता है, वही अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों का कातिल बन गया। इस वारदात ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया, बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।

सन्नाटे में बदली सुबह
रविवार की सुबह जब लोग अपने दिन की शुरुआत कर रहे थे, उसी समय एक कॉल ने पुलिस महकमे को हिला दिया। फोन करने वाला खुद को आरोपी बताते हुए कह रहा था कि उसने अपनी बेटियों की हत्या कर दी है। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल त्रिमूर्ति अपार्टमेंट फेज-2 पहुंची, जहां का नजारा दिल दहला देने वाला था।
कमरे के अंदर दो मासूम बच्चियां खून से लथपथ हालत में बिस्तर पर पड़ी थीं। पूरा कमरा खून से सना हुआ था। पास ही बैठा आरोपी पिता शांत नजर आ रहा था, मानो उसे अपने किए पर कोई पछतावा न हो।
मासूम जिंदगियों का अंत
मृतक बच्चियां रिद्धि और सिद्धि थीं, जो पांचवीं कक्षा की छात्राएं थीं। दोनों बहनें एक-दूसरे की परछाईं मानी जाती थीं—जहां एक जाती, दूसरी भी साथ होती। स्कूल में उनकी पहचान मेधावी और अनुशासित छात्राओं के रूप में थी।
उनकी इस दर्दनाक मौत ने न सिर्फ परिवार, बल्कि स्कूल और पड़ोस के लोगों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि दोनों बच्चियां हमेशा मुस्कुराती रहती थीं और पढ़ाई में भी अव्वल थीं।
सामान्य दिखने वाले परिवार के भीतर छुपा तूफान
आरोपी शशि रंजन मिश्रा मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला है और एक दवा कंपनी में कार्यरत था। करीब आठ साल से वह कानपुर में अपने परिवार के साथ रह रहा था। उसने 2014 में प्रेम विवाह किया था और तीन बच्चों का पिता था।
बाहर से यह परिवार एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार जैसा दिखता था, लेकिन अंदर ही अंदर रिश्तों में खटास और तनाव बढ़ता जा रहा था। यही तनाव इस भयावह घटना की जड़ माना जा रहा है।
रात के अंधेरे में लिया खौफनाक फैसला
पुलिस के अनुसार, घटना देर रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच हुई। उस समय घर के सभी सदस्य सो रहे थे। आरोपी पिता अपनी बेटियों के साथ एक कमरे में था।
इसी दौरान उसने स्टील के चापड़ से दोनों बच्चियों का गला रेत दिया। हमला इतना अचानक और क्रूर था कि दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में दो मासूम जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं।
खुद ही बना मुखबिर
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने खुद ही पुलिस को फोन कर घटना की जानकारी दी। आमतौर पर अपराधी अपने अपराध को छुपाने की कोशिश करता है, लेकिन यहां आरोपी ने खुद ही पुलिस को बुला लिया।
पुलिस का मानना है कि यह कदम या तो मानसिक असंतुलन का संकेत हो सकता है या फिर अपराध के बाद अचानक आई घबराहट का परिणाम।
सीसीटीवी में कैद हुई सच्चाई
फ्लैट में लगे सीसीटीवी कैमरे इस केस को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हर कमरे में कैमरे होने के कारण पुलिस को घटनाक्रम की पूरी जानकारी मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल फुटेज को खंगाला जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वारदात से पहले और बाद में आरोपी की गतिविधियां कैसी थीं।
पत्नी रही अनजान
घटना के समय आरोपी की पत्नी रेशमा अपने छोटे बेटे के साथ दूसरे कमरे में सो रही थी। उसे इस खौफनाक वारदात की भनक तक नहीं लगी।
जब पुलिस ने उसे जगाकर सच्चाई बताई, तो वह सदमे में आ गई। उसने बताया कि पति के साथ उसके संबंध ठीक नहीं थे और अक्सर दोनों के बीच झगड़े होते रहते थे।
विवाद बना वजह?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। रेशमा का अपने मायके जाना आरोपी को पसंद नहीं था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कई बार कहासुनी हुई थी।
कुछ समय पहले रेशमा अपने मायके में करीब नौ महीने तक रही थी। इस दौरान बेटियां अपने पिता के साथ ही थीं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इसी दौरान कोई ऐसी परिस्थिति बनी, जिसने आरोपी को इस हद तक पहुंचा दिया।
पुलिस और फॉरेंसिक जांच
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। घटनास्थल से हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया गया है।
फॉरेंसिक टीम ने मौके से खून के नमूने और अन्य साक्ष्य एकत्र किए हैं। दोनों बच्चियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट से कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
समाज के सामने खड़े सवाल
यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या हम अपने आसपास के लोगों के मानसिक तनाव को पहचानने में असफल हो रहे हैं? क्या पारिवारिक विवादों को समय रहते सुलझाया नहीं जा रहा?
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। अगर समय रहते सही मदद मिल जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
पड़ोसियों की हैरानी
पड़ोसियों का कहना है कि शशि रंजन हमेशा सामान्य व्यवहार करता था। उसने कभी ऐसा कोई संकेत नहीं दिया, जिससे यह लगे कि वह इतना खतरनाक कदम उठा सकता है।
यही वजह है कि इस घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। लोग अब भी इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे कि उनके आसपास रहने वाला व्यक्ति इतना बड़ा अपराध कर सकता है।
अंत में एक कड़वी सच्चाई
कानपुर की यह घटना एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है—कि कभी-कभी खतरा बाहर से नहीं, बल्कि घर के अंदर से होता है। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है।
रिद्धि और सिद्धि की मासूम मुस्कान अब हमेशा के लिए खो गई है। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे कभी भरा नहीं जा सकता। अब जरूरत है कि इस घटना से सबक लिया जाए और समाज में ऐसे माहौल का निर्माण किया जाए, जहां रिश्ते मजबूत हों और कोई भी व्यक्ति मानसिक तनाव के कारण इतना बड़ा कदम उठाने को मजबूर न हो।




