उत्तर प्रदेश

गोरखपुर में जमीन के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: 44 लाख की ठगी से हड़कंप, चार आरोपियों पर मुकदमा दर्ज

(समाचार क्यारी उत्तर प्रदेश गोरखपुर)

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक कारोबारी को जमीन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का शिकार बना लिया गया। आरोप है कि चार लोगों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से करीब 44 लाख रुपये हड़प लिए और बाद में जमीन का बैनामा करने से मुकर गए।

यह मामला गुलरिहा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर चार नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण में धोखाधड़ी के साथ-साथ धमकी देने के भी आरोप लगाए गए हैं।

पीड़ित की पहचान जगदीशपुर निवासी दिग्विजय सिंह के रूप में हुई है, जो एक निजी कंपनी ‘धर्मक बिल्डर्स एंड कालोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक हैं। दिग्विजय सिंह गोरखपुर में अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहते थे और इसी उद्देश्य से वह मेडिकल कॉलेज के आसपास जमीन की तलाश कर रहे थे।

बताया गया कि वर्ष 2018 के दौरान उनकी मुलाकात सलेमपुर उर्फ मुगलपुर निवासी राजेंद्र नाथ और उनके बेटों अरुण कुमार, संदीप कुमार और सुनील कुमार से हुई। राजेंद्र नाथ स्थानीय स्तर पर लक्ष्मी टेंट हाउस का संचालन करते हैं। बातचीत के दौरान इन लोगों ने खुद को जमीन के मालिक बताते हुए भरोसा दिलाया कि वे उन्हें अच्छी लोकेशन पर जमीन उपलब्ध करा सकते हैं।

आरोप है कि इन लोगों ने दिग्विजय सिंह को हमीदपुर इलाके में एक जमीन दिखाई और उसका सौदा लगभग 44 लाख रुपये में तय कर लिया। भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने एडवांस के तौर पर मोटी रकम की मांग की। दिग्विजय सिंह ने उन पर विश्वास करते हुए करीब 38 लाख 80 हजार रुपये बतौर एडवांस दे दिए।

इसके बाद आरोपियों ने एक और जमीन का प्रस्ताव रखा, जो सलेमपुर उर्फ मुगलपुर इलाके में स्थित थी। इस जमीन के लिए भी लगभग 40 लाख रुपये में सौदा तय किया गया। इस बार भी पीड़ित ने करीब 5 लाख 20 हजार रुपये नकद और बैंक के माध्यम से आरोपियों को दे दिए।

इस तरह अलग-अलग सौदों के नाम पर आरोपियों ने कुल मिलाकर लगभग 44 लाख रुपये हासिल कर लिए। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था और दिग्विजय सिंह को भरोसा था कि जल्द ही जमीन का बैनामा उनके नाम हो जाएगा।

लेकिन जब बैनामा करने की बारी आई, तो कहानी ने अचानक नया मोड़ ले लिया। आरोप है कि जिन लोगों ने पहले खुद को पिछड़ी जाति (OBC) का बताकर जमीन का सौदा तय किया था, उन्होंने बाद में खुद को अनुसूचित जाति (SC) का बताते हुए बैनामा करने से इनकार कर दिया।

इस आधार पर उन्होंने कहा कि कानूनन वे इस जमीन का बैनामा नहीं कर सकते, जिससे पूरा सौदा अटक गया। जब दिग्विजय सिंह ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने साफ इनकार कर दिया।

इतना ही नहीं, आरोप है कि आरोपियों ने पीड़ित को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए। लंबे समय तक पैसे और जमीन दोनों न मिलने के बाद आखिरकार दिग्विजय सिंह ने पुलिस का सहारा लिया।

उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को प्रार्थना पत्र देकर पूरी घटना की जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसके बाद गुलरिहा थाना पुलिस ने चारों आरोपियों—राजेंद्र नाथ, अरुण कुमार, संदीप कुमार और सुनील कुमार—के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जमीन के कारोबार में किस तरह सुनियोजित तरीके से लोगों को फंसाया जा सकता है। खासकर जब बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन हो, तो सतर्कता बरतना बेहद जरूरी हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से बचने के लिए जमीन खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति की पूरी जांच करनी चाहिए। साथ ही, विक्रेता की पहचान और उसके दावों की भी पुष्टि जरूरी है।

गोरखपुर की यह घटना उन लोगों के लिए एक चेतावनी है, जो बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के बड़े निवेश कर देते हैं। थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि यह घटना न सिर्फ एक आर्थिक अपराध है, बल्कि भरोसे के साथ किया गया एक बड़ा धोखा भी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगा सकती है।

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