
खड़ी ट्रक बना मौत का जाल: गुरुग्राम फ्लाईओवर पर भीषण टक्कर में तीन की मौत
समाचार क्यारी (हरियाणा गरुग्राम)
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर गुरुग्राम के आईएमटी मानेसर फ्लाईओवर पर हुआ एक दर्दनाक सड़क हादसा तीन परिवारों के लिए जिंदगी भर का दुख बन गया। रात के सन्नाटे में हुई इस दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क पर लापरवाही के खतरनाक परिणामों को उजागर कर दिया। बिना किसी चेतावनी संकेत के खड़े ट्रक से टकराकर एक कैंटर के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

यह हादसा गुरुवार देर रात करीब 2 बजे हुआ, जब सड़क पर ट्रैफिक कम था, लेकिन खतरा उतना ही बड़ा था। जानकारी के अनुसार, राजस्थान के भिवाड़ी से सरिया लादकर एक कैंटर दिल्ली की ओर जा रहा था। कैंटर में चालक, कंडक्टर और एक अन्य व्यक्ति सवार थे। तीनों लोग अपने काम के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे और उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
पुलिस के अनुसार, यह हादसा आईएमटी चौक फ्लाईओवर पर हुआ, जहां एक कंटेनर ट्रक सड़क के बीचों-बीच खड़ा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रक पर न तो कोई रिफ्लेक्टर लगा हुआ था और न ही इंडिकेटर चालू था। अंधेरे में खड़ा यह ट्रक किसी अदृश्य खतरे की तरह था, जिसे दूर से देख पाना लगभग नामुमकिन था।
मृतकों में से एक के भाई ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह और उसका भाई अलग-अलग कैंटर लेकर भिवाड़ी से दिल्ली की ओर जा रहे थे। उसका भाई शंकर बिंद आगे चल रहा था, जबकि वह पीछे था। जैसे ही वे आईएमटी मानेसर फ्लाईओवर पर पहुंचे, अचानक सामने से आ रहे एक वाहन ने साइड बदली। इसी वजह से शंकर को सामने खड़ा ट्रक दिखाई नहीं दिया और उसका कैंटर सीधे ट्रक के पीछे जा घुसा।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कैंटर का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसा इतना भयानक था कि चालक शंकर बिंद, कंडक्टर सुनील कुमार गौण और उनके साथ सवार रामराज प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों को संभलने या बचने का कोई मौका तक नहीं मिला।
हादसे की सूचना मिलते ही मानेसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल का मंजर बेहद भयावह था। कैंटर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था और उसमें फंसे लोगों को बाहर निकालना भी मुश्किल हो रहा था। पुलिस ने निजी क्रेन की मदद से कैंटर को काटकर शवों को बाहर निकाला।
इसके बाद तीनों शवों को गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाद में शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया और शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
इस हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया। जिन लोगों ने सुबह अपने परिजनों को काम के लिए विदा किया था, उन्हें यह नहीं पता था कि वे कभी वापस नहीं लौटेंगे। तीनों मृतक अपने-अपने परिवारों के लिए कमाने वाले थे और उनकी अचानक मौत ने उनके घरों की आर्थिक और भावनात्मक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पुलिस ने इस मामले में मृतक के भाई की शिकायत के आधार पर अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 (लापरवाही से वाहन खड़ा करना) और 106 (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और चालक की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
यह हादसा एक गंभीर सवाल खड़ा करता है—क्या सड़क पर खड़े वाहनों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा? बिना इंडिकेटर और रिफ्लेक्टर के सड़क के बीचों-बीच खड़ा ट्रक किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है। यह केवल एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को खतरे में डालने वाला कृत्य है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा। रात के समय ऐसे खतरनाक हालात और भी ज्यादा जोखिम भरे हो जाते हैं।
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि सड़क पर छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। वाहन चालकों को न सिर्फ अपने वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए, बल्कि अगर किसी कारणवश वाहन रोकना पड़े तो सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
तीन लोगों की यह दर्दनाक मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—सड़क पर हर कदम सोच-समझकर रखना जरूरी है। वरना एक छोटी सी गलती किसी का पूरा परिवार उजाड़ सकती है।




