उत्तर प्रदेश

कुत्ते को खाना खिलाने के विवाद ने ली दो भाइयों की जान, गुस्साए ग्रामीणों ने किया फोरलेन जाम

समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश, गोरखपुर)

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद मामला सामने आया है, जहां एक मामूली विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि दो सगे भाइयों की जान चली गई। कुत्ते को खाना खिलाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी धीरे-धीरे हिंसक झड़प में बदल गई और इसका अंजाम बेहद दर्दनाक रहा। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला, जिसके चलते फोरलेन सड़क को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया।

यह पूरा मामला रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के मंझरिया-विस्टौल गांव का है। 28 अप्रैल की रात करीब 9:50 बजे गांव में कुत्ते को खाना खिलाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। शुरुआत में यह विवाद मामूली बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और बात हाथापाई तक पहुंच गई।

आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में अक्षयबर निषाद, उनके भाई पप्पू निषाद, बेटी आराधना और एक अन्य युवक विनय गंभीर रूप से घायल हो गए। विशेष रूप से अक्षयबर और पप्पू के सिर में गहरी चोटें आईं, जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

घटना के बाद परिजन घायलों को तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बाद में परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिए, जहां उनका इलाज शुरू हुआ।

लेकिन इलाज के दौरान स्थिति और बिगड़ती चली गई। गुरुवार सुबह पप्पू निषाद ने दम तोड़ दिया। वहीं, अक्षयबर की हालत भी लगातार गंभीर बनी रही। देर रात उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन एंबुलेंस में ही उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर परिजनों को मिली, उनका गुस्सा फूट पड़ा।

परिजनों ने निजी अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज में लापरवाही बरती और मरीज की सही स्थिति छिपाई। इतना ही नहीं, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अक्षयबर के सिर में चोट होने के बावजूद उनके पेट का ऑपरेशन किया गया और उनकी किडनी निकाल ली गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। गुलरिहा थाना पुलिस ने किसी तरह अस्पताल में हंगामा कर रहे परिजनों को शांत कराया और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। शुक्रवार दोपहर को परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर इकट्ठा हो गए और फिर से हंगामा शुरू कर दिया। गुस्साए लोगों ने गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

ग्रामीणों की मांग थी कि आरोपियों के खिलाफ हत्या की धाराएं लगाई जाएं और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। लगभग तीन घंटे तक सड़क जाम रही, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया। सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह और एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह ने परिजनों को निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद जाकर जाम खत्म हुआ और यातायात सामान्य हो सका।

पोस्टमार्टम प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए दो डॉक्टरों के पैनल की निगरानी में वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम कराया गया, ताकि किसी भी तरह की शंका को दूर किया जा सके।

पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए पहले से दर्ज हत्या के प्रयास के मुकदमे में हत्या की धारा जोड़ दी है। एसपी सिटी निमिष पाटील के अनुसार, मृतक के भाई की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

यह घटना समाज में बढ़ती असहिष्णुता और छोटी-छोटी बातों पर हिंसा के बढ़ते मामलों को उजागर करती है। एक मामूली विवाद, जिसे आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता था, उसने दो जिंदगियां छीन लीं और कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।

साथ ही, यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े करता है। अगर परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चिकित्सा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और फरार आरोपी की तलाश जारी है। प्रशासन ने परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर कब छोटी-छोटी बातों पर होने वाली हिंसा पर रोक लगेगी।

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