
शराब के लिए पानी न लाने पर मासूम की हत्या, कासगंज की घटना ने झकझोरा
समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश, कासगंज)
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक मामूली सी बात पर गुस्से में आकर एक नशे में धुत व्यक्ति ने नौ साल के मासूम बच्चे को गोली मार दी। इस घटना ने न केवल पूरे गांव को सन्न कर दिया, बल्कि यह भी सवाल खड़े कर दिए कि आखिर समाज में गुस्सा और नशा किस हद तक लोगों को अमानवीय बना रहा है।

यह घटना सहावर थाना क्षेत्र के याकूतगंज गांव की है, जहां एक खुशियों भरा माहौल अचानक मातम में बदल गया। गांव में एक अप्रैल की रात नामकरण संस्कार का आयोजन किया गया था। जसवीर गोला के बेटे के नामकरण की खुशी में पूरे गांव को दावत दी गई थी। लोग हंसी-खुशी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह जश्न एक भयावह हादसे में बदल जाएगा।
इसी समारोह के दौरान आरोपी धनेश यादव, जो सोरों थाना क्षेत्र के नगला बीच मीरापुर का रहने वाला बताया जा रहा है, भी वहां मौजूद था। आरोप है कि वह शराब के नशे में था। उसी दौरान उसने पास में खड़े नौ वर्षीय बालक यश से पानी लाने को कहा। यश, जो मासूम और नादान था, उसने किसी कारणवश पानी लाने से मना कर दिया। शायद उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसका यह छोटा सा इंकार उसकी जिंदगी की आखिरी गलती बन जाएगा।
बस इसी बात पर धनेश यादव का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। नशे में चूर आरोपी ने बिना कुछ सोचे-समझे अपने पास मौजूद 315 बोर के तमंचे से बच्चे पर गोली चला दी। गोली सीधे यश के सीने में जा लगी। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर चीख-पुकार मच गई। कुछ ही पल में खुशी का माहौल चीखों और अफरा-तफरी में बदल गया।
परिवार के लोग और गांव के अन्य लोग तुरंत यश को लेकर सहावर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे अलीगढ़ रेफर कर दिया। परिवार को उम्मीद थी कि उनका बेटा बच जाएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद यश की जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना के बाद गांव में गहरा शोक छा गया। हर कोई स्तब्ध है कि आखिर इतनी छोटी सी बात पर कोई इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकता है। मृतक यश एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखता था और वह मांटेसरी पब्लिक स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। वह अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। उससे बड़ा भाई अर्जुन और दो छोटी बहनें मुस्कान और कामिनी हैं। बेटे की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है और गांव में मातम का माहौल है।
शुरुआत में इस घटना को हर्ष फायरिंग बताया जा रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में सच्चाई सामने आई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी, जो गुस्से और नशे के कारण की गई।
घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तेजी दिखाते हुए उसे अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को गांव खितौली के पास नहर किनारे से पकड़ा। उसके पास से घटना में इस्तेमाल किया गया तमंचा भी बरामद कर लिया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
सीओ सहावर शाहिदा नसरीन ने बताया कि आरोपी नामकरण संस्कार में शामिल होने आया था और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने गुस्से में आकर यह कदम उठाया और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। यह दिखाती है कि कैसे नशा और गुस्सा इंसान को हैवान बना सकता है। एक मासूम की जान चली गई, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने पानी लाने से मना कर दिया था। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम अपने बच्चों के लिए कितना सुरक्षित माहौल बना पा रहे हैं।
गांव के लोग अब भी इस घटना को लेकर सहमे हुए हैं। हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है—क्या एक बच्चे की जान इतनी सस्ती हो गई है? इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और लोगों के दिलों में डर और गुस्सा दोनों भर दिया है।
सरकार और प्रशासन से लोगों की मांग है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे। वहीं, यह घटना समाज को यह भी संदेश देती है कि हमें नशे और हिंसा के खिलाफ मिलकर आवाज उठानी होगी, तभी ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सकती है।




