
9 साल के बेटे की जिजीविषा ने दी मौत को मात, नहर में फेंके जाने के बाद 9 घंटे टहनी पकड़कर बचाई जान
समाचार क्यारी (हरियाणा ,फरीदाबाद)
हरियाणा के फरीदाबाद से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत, पारिवारिक रिश्तों और हिम्मत—तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों को मौत के मुंह में धकेल दिया, लेकिन 9 साल के बड़े बेटे ने अद्भुत साहस दिखाते हुए जिंदगी की जंग जीत ली।

यह घटना उस समय की है जब एक सिविल इंजीनियर, जो छुट्टियों पर अपने घर आया हुआ था, रविवार रात करीब 9 बजे अपने दोनों बेटों को घुमाने के बहाने घर से निकला। परिवार को क्या पता था कि यह सफर उनके लिए एक भयानक हादसे में बदल जाएगा।
बताया जा रहा है कि आरोपी पिता अपने बेटों को लेकर आगरा नहर के पास पहुंचा। वहां उसने पहले अपने बड़े बेटे को नहर में धक्का दे दिया। इसके बाद उसने छोटे बेटे को गोद में लिया और खुद भी नहर में कूद गया। तेज बहाव वाली नहर में गिरते ही तीनों बहने लगे।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 9 साल का सम्राट पानी के तेज बहाव में बहता रहा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। करीब 5 किलोमीटर तक बहने के बाद उसे नहर किनारे एक पेड़ की टहनी दिखाई दी, जो पानी के अंदर तक झुकी हुई थी। सम्राट ने किसी तरह उस टहनी को पकड़ लिया और उसी के सहारे पूरी रात पानी में लटका रहा।
यह कोई आम बात नहीं थी। पूरी रात ठंडे पानी में रहना, शरीर का सुन्न हो जाना और फिर भी हिम्मत न हारना—यह बच्चे की अद्भुत जिजीविषा को दर्शाता है। करीब 9 घंटे तक वह टहनी पकड़कर जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा।
सोमवार सुबह करीब 7 बजे एक युवक अपने दोस्त के साथ नहर किनारे टहलने आया। तभी उसे “बचाओ-बचाओ” की हल्की आवाज सुनाई दी। पहले तो उसे कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उसने ध्यान से देखा तो नहर के बीच एक टहनी पकड़े एक बच्चा नजर आया।
बिना समय गंवाए युवक ने तुरंत नहर में छलांग लगा दी और अपने दोस्त की मदद से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तब उसकी हालत बेहद खराब थी। ठंडे पानी में घंटों रहने के कारण उसका शरीर पूरी तरह सफेद पड़ चुका था।
युवक उसे अपने घर ले गया, जहां उसके गीले कपड़े बदले गए और उसे गर्म कंबल में लपेटा गया। परिवार ने उसे चाय और बिस्किट देकर धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की। कुछ देर बाद जब बच्चा थोड़ा संभला, तब उससे उसके घर के बारे में पूछा गया।
बच्चे ने अपनी मां का फोन नंबर बताया। तुरंत उस नंबर पर संपर्क किया गया और परिवार को घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही परिवार और पुलिस मौके पर पहुंचे और बच्चे को अपने साथ ले गए।
जब बच्चे से पूछा गया कि वह नहर में कैसे गिरा, तो उसने मासूमियत से सिर्फ इतना कहा—“मुझे पापा ने धक्का दिया।” इसके आगे उसे कुछ याद नहीं था।
उधर, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि आरोपी पिता और उसकी पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, असली कारण क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
घटना के बाद से ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम नहर में सर्च अभियान चला रही है, ताकि पिता और छोटे बेटे का पता लगाया जा सके। लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है।
परिवार के अन्य सदस्यों के अनुसार, आरोपी पिछले कुछ वर्षों से अपने माता-पिता से अलग रह रहा था और उनसे बातचीत भी नहीं करता था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि परिवार में कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आती थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच कुछ तनाव जरूर हो सकता है।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एक पिता, जो अपने बच्चों का रक्षक होता है, वही जब उनके लिए खतरा बन जाए तो यह रिश्तों के टूटते विश्वास को दर्शाता है। वहीं, दूसरी ओर 9 साल के मासूम बच्चे की बहादुरी और जीने की इच्छा हमें यह सिखाती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हिम्मत न छोड़ी जाए तो जिंदगी जीती जा सकती है।
इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ पिता की हैवानियत है, तो दूसरी तरफ बेटे की हिम्मत और एक अनजान युवक की इंसानियत, जिसने समय रहते बच्चे की जान बचा ली।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इस घटना के पीछे की असली वजह क्या थी और क्या छोटे बेटे और पिता का कोई सुराग मिल पाएगा या नहीं।




