
शक ने उजाड़ा पूरा परिवार
समाचार क्यारी (हरीयाणा, गुरुग्राम)
हरियाणा के Gurugram के भांगरौला गांव से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक पति ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस खौफनाक घटना के पीछे की वजह पति का अपनी पत्नी के चरित्र पर शक बताया जा रहा है, जिसने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह कोई अचानक गुस्से में उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि आरोपी ने इस हत्या की योजना पहले से ही बना रखी थी। घटना से करीब तीन दिन पहले उसने अपने दोनों बच्चों—14 वर्षीय बेटी और 11 वर्षीय बेटे—को उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित अपने पैतृक गांव भेज दिया था। इस कदम से साफ होता है कि वह पहले ही किसी बड़ी साजिश की तैयारी में था।
मृतका की पहचान 35 वर्षीय रेखा के रूप में हुई है, जो पिछले कुछ सालों से अपने पति गौरव के साथ गुरुग्राम में रह रही थी। दोनों ही किसी निजी कंपनी में काम करते थे और बाहर से देखने पर उनका जीवन सामान्य प्रतीत होता था। लेकिन घर के अंदर चल रहा तनाव और शक धीरे-धीरे एक खतरनाक रूप ले चुका था।
घटना बुधवार तड़के करीब चार बजे की बताई जा रही है। गौरव अपनी ड्यूटी से घर लौटा और आते ही पत्नी के साथ विवाद शुरू हो गया। शुरुआती कहासुनी जल्द ही हिंसक झगड़े में बदल गई। आरोप है कि इसी दौरान गौरव ने घर में रखा सब्जी काटने वाला चाकू उठाया और रेखा पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उसने रेखा के चेहरे और गर्दन पर गहरे वार किए। गंभीर रूप से घायल रेखा ने अपनी जान बचाने की कोशिश की और घर से बाहर भागी। वह गली नंबर पांच से गली नंबर चार की ओर दौड़ी, जहां उसके नाना का घर था। लेकिन खून अधिक बह जाने के कारण वह ज्यादा दूर नहीं जा सकी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रेखा लगभग 100 मीटर तक संघर्ष करती रही। रास्ते में खून के निशान इस बात की गवाही देते हैं कि वह लगातार मदद के लिए दौड़ रही थी। आखिरकार वह सड़क किनारे गिर गई और वहीं उसकी मौत हो गई। यह दृश्य इतना भयावह था कि जिसने भी देखा, वह सन्न रह गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गर्दन पर गहरे जख्मों की पुष्टि हुई है, जिससे यह साफ हो गया कि हमला बेहद क्रूरता से किया गया था।
मृतका के परिजनों ने आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। रेखा के मौसेरे भाई सुमित ने बताया कि गौरव का व्यवहार पहले से ही हिंसक था। उन्होंने खुलासा किया कि साल 2014 में, जब परिवार उत्तर प्रदेश में रह रहा था, तब भी गौरव ने रेखा और उसके बच्चे को रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटा था। उस समय उसके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था।
इसके बावजूद समय के साथ मामला शांत हो गया और दोनों फिर से साथ रहने लगे। लेकिन गौरव का शक और गुस्सा कभी खत्म नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि रेखा लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थी, लेकिन परिवार को पूरी सच्चाई का अंदाजा नहीं था।
पुलिस ने आरोपी गौरव के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश में कई टीमें लगाई गई हैं। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद से वह फरार है और पुलिस उसे पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है।
यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज में पनप रही एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है—शक और घरेलू हिंसा। कई बार रिश्तों में अविश्वास इतना बढ़ जाता है कि वह हिंसा का रूप ले लेता है, और इसका अंत अक्सर बेहद दुखद होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद की कमी और मानसिक असंतुलन बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर समय रहते ऐसे संकेतों को पहचाना जाए और उचित कदम उठाए जाएं, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल बाहर ही नहीं, बल्कि उनके अपने घरों के भीतर भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। घरेलू हिंसा के मामलों में अक्सर पीड़ित महिलाएं चुप रह जाती हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में जागरूकता बढ़ाई जाए और पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया जाए कि वे अकेले नहीं हैं। कानून और समाज दोनों को मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना होगा।
गुरुग्राम जैसे आधुनिक शहर में इस तरह की घटना यह दर्शाती है कि विकास के बावजूद सामाजिक समस्याएं अभी भी गहराई से मौजूद हैं। रिश्तों में भरोसा और सम्मान की कमी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
अंत में, यह घटना एक कड़वा सबक है कि शक, गुस्सा और हिंसा कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकते। यह केवल रिश्तों को खत्म करते हैं और पीछे छोड़ जाते हैं टूटे हुए परिवार और अपूरणीय क्षति।




