
मनी लॉन्ड्रिंग केस में AAP मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार, ED की कार्रवाई तेज—7 दिन के रिमांड पर भेजा गया
समाचार क्यारी, (पंजाब)
पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उनके आवास से की गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत दिल्ली ले जाया गया। वहां करीब 10 घंटे तक लंबी पूछताछ चली, जिसमें ईडी अधिकारियों ने कई अहम सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की।

जांच एजेंसी के अनुसार, संजीव अरोड़ा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के फर्जी लेन-देन को अंजाम दिया। विशेष रूप से मोबाइल फोन की खरीद-फरोख्त के नाम पर करीब 157.12 करोड़ रुपये की फर्जी बिक्री दिखाई गई। इतना ही नहीं, शेल कंपनियों का इस्तेमाल करते हुए फर्जी निर्यात (एक्सपोर्ट) भी दर्शाया गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
गिरफ्तारी के बाद ईडी ने दिल्ली और गुरुग्राम में मंत्री से जुड़े पांच अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इन छापों के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए, जो इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जब ईडी की टीम संजीव अरोड़ा को लेकर गुरुग्राम पहुंची, तब वहां भी उनके ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
पूरी कार्रवाई के बाद देर रात उन्हें गुरुग्राम की अदालत में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। ईडी ने कोर्ट से 10 दिन के रिमांड की मांग की थी ताकि पूछताछ को और आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7 दिन का रिमांड मंजूर किया। इस दौरान कोर्ट में लगभग दो घंटे तक बहस चली, जिसके बाद आदेश लिखने में भी पर्याप्त समय लगा और रात करीब एक बजे फैसला सुनाया गया।
संजीव अरोड़ा के वकील अर्जुन ने अदालत में ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह गिरफ्तारी जल्दबाजी में की गई है। उनका कहना था कि 5 मई को केस दर्ज होने के बाद बिना पर्याप्त जांच के केवल चार दिन के भीतर 9 मई को गिरफ्तारी कर ली गई, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
वकील ने यह भी दावा किया कि ईडी ने पहले भी छापेमारी की थी और ताजा रेड में भी कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा है। अदालत ने भी इस दौरान ईडी से सवाल किया कि क्या उन्होंने कस्टम विभाग से इस मामले में कोई पुष्टि की है या नहीं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिमांड अवधि पूरी होने के बाद इस संबंध में पूरी रिपोर्ट पेश की जाए। अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 मई को होगी, जब ईडी संजीव अरोड़ा को दोबारा अदालत में पेश करेगी।
दूसरी ओर, ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल फर्जी लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन के अवैध लेन-देन की भी आशंका है। जांच में सामने आया है कि दुबई से भारत में पैसे की राउंड ट्रिपिंग के लिए फर्जी एक्सपोर्ट का सहारा लिया गया। इस प्रक्रिया में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और जीएसटी रिफंड का भी दुरुपयोग किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
ईडी के मुताबिक, दिल्ली की कई गैर-मौजूद (फर्जी) कंपनियों के जरिए फर्जी जीएसटी बिल तैयार किए गए, जिनके आधार पर टैक्स लाभ लिया गया। इसके अलावा, निर्यात पर मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉबैक का भी गलत तरीके से फायदा उठाया गया। इन सभी गतिविधियों के चलते संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़ी कंपनियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
जांच के दौरान ईडी ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और इससे संबंधित अन्य संस्थाओं के बैंक खाते, डीमैट खाते और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) 1999 और आयकर अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत की गई है। इन संपत्तियों को 180 दिनों के लिए अटैच किया गया है ताकि जांच को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
ईडी ने गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित कंपनी के दफ्तर, उसके प्रमुख शेयरधारकों और संजीव अरोड़ा से जुड़े अन्य व्यक्तियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने अपने निदेशकों और कर्मचारियों के साथ मिलकर शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए फर्जी खरीद-बिक्री और निर्यात का पूरा तंत्र खड़ा किया था।
आरोपों के अनुसार, कुल 157.12 करोड़ रुपये के घोषित निर्यात में से करीब 102.50 करोड़ रुपये के लेन-देन केवल यूएई की दो कंपनियों—फोर्टबेल टेलीकॉम और ड्रेगन ग्लोबल—के जरिए किए गए। ईडी को संदेह है कि ये कंपनियां आपस में जुड़ी हुई हैं और इनके माध्यम से धन की हेराफेरी की गई है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने के लिए किया गया।
इस मामले में जब्त की गई संपत्तियों में लुधियाना और मोहाली स्थित अचल संपत्तियां भी शामिल हैं। ईडी अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल, संजीव अरोड़ा ईडी की हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ जारी है। इस गिरफ्तारी ने न केवल पंजाब की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजर 16 मई की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस मामले में आगे की दिशा तय होगी।




