
अमृतसर थाना हमला: सीसीटीवी से मिले सुराग, बाइक सवार दो संदिग्धों की तलाश तेज, ISI की साजिश की आशंका
पंजाब के अमृतसर जिले में स्थित सीमा से सटे थाना भिंडी सैदां पर हुए रहस्यमयी धमाके के 48 घंटे बाद पुलिस को जांच में कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। इस घटना ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और सीमा पार से हो रही गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में दो संदिग्ध युवक मोटरसाइकिल पर जाते हुए दिखाई दिए हैं, जिन पर इस हमले को अंजाम देने का शक जताया जा रहा है।

हालांकि पुलिस अधिकारी अभी तक इस घटना को स्पष्ट रूप से आतंकी हमला या विस्फोटक हमले के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक “धमाका” जरूर था, लेकिन अभी तक किसी प्रकार के विस्फोटक पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हो सकी है। यही वजह है कि घटना के 48 घंटे बीत जाने के बावजूद भी इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
जांच में जुटी पुलिस टीमों ने पिछले दो दिनों में आसपास के कुल 18 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है। रात के समय की होने के कारण अधिकांश फुटेज धुंधली और स्पष्ट नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ क्लिप्स में दो युवकों को बाइक पर संदिग्ध गतिविधियों के साथ देखा गया है। इन फुटेज को पुलिस अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया है और स्थानीय ग्रामीणों को भी दिखाया जा रहा है ताकि उनकी पहचान की जा सके।
इस बीच, घटना के तुरंत बाद एक कथित आतंकी संगठन “खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी” ने सोशल मीडिया के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि यह हमला गुरदासपुर में मारे गए एक युवक की मौत का बदला लेने के लिए किया गया है। इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी संदीप गोयल को भी धमकी दी गई थी।
लेकिन पुलिस के उच्च अधिकारियों का मानना है कि यह संगठन असल में सक्रिय नहीं है और काफी समय पहले खत्म हो चुका है। उनका कहना है कि इस नाम का इस्तेमाल केवल भ्रम फैलाने और लोगों के बीच डर पैदा करने के लिए किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश हो सकती है, जो पंजाब में शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने के लिए इस तरह के फर्जी संगठनों का सहारा ले रही है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले कुछ महीनों में राज्य में जितने भी हमले हुए हैं, उनमें शामिल आरोपियों को पैसे और नशे का लालच देकर इस्तेमाल किया गया। ये लोग अक्सर स्थानीय स्तर पर भर्ती किए जाते हैं और उन्हें सीमित जानकारी देकर काम सौंपा जाता है। पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने यह भी कबूल किया है कि उन्हें हथियार और विस्फोटक सामग्री सीमा पार से ड्रोन के जरिए उपलब्ध करवाई गई।
यह घटनाक्रम इस ओर इशारा करता है कि सीमा पार से सुनियोजित तरीके से पंजाब को अस्थिर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। ड्रोन के माध्यम से हथियार भेजना और स्थानीय युवाओं को फंसाना एक नई चुनौती बनकर उभरा है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 16 महीनों में पंजाब के विभिन्न थानों और पुलिस चौकियों पर यह 17वां हमला है। साल 2026 में यह दूसरी बड़ी घटना है, जबकि अकेले अमृतसर जिले में अब तक 9 ग्रेनेड हमले हो चुके हैं।
इस तरह की घटनाओं की शुरुआत 24 नवंबर 2024 को अजनाला पुलिस थाने पर हुए हमले से हुई थी, जहां आईईडी के जरिए थाने को उड़ाने की कोशिश की गई थी। इसके बाद 28 नवंबर को गुरबख्श नगर पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंका गया। 4 दिसंबर को मजीठा थाना, 17 दिसंबर को इस्लामाबाद थाना, 9 जनवरी 2025 को गुमटाला चौकी और 14 मार्च को ठाकुरद्वारा मंदिर को निशाना बनाया गया।
हाल ही में 21 फरवरी 2026 को रइया पुलिस चौकी पर भी आईईडी से हमला करने का प्रयास किया गया था। इन लगातार घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो चुकी है।
फिलहाल पुलिस संदिग्ध बाइक सवारों की पहचान करने और इस हमले की असली साजिश तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




