उत्तर प्रदेश

OTP आया, मैसेज भी मिला… फिर भी नहीं आया सिलिंडर: मेरठ में LPG सप्लाई सिस्टम पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश के Meerut में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। डिजिटल सिस्टम और ऑनलाइन बुकिंग के दौर में भी उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बुकिंग कन्फर्म होने और ओटीपी मिलने के बाद भी लोगों को समय पर सिलिंडर नहीं मिल रहा।

यह समस्या अब सिर्फ एक-दो इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे शहर में व्यापक रूप ले चुकी है। आम लोग परेशान हैं और गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ती जा रही है।

डिजिटल सिस्टम फेल या मैनेजमेंट में कमी?

सरकार और गैस कंपनियों ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन बुकिंग और ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम शुरू किया था, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कालाबाजारी पर रोक लग सके। लेकिन मेरठ में यही सिस्टम अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि वे समय पर गैस बुक करते हैं, उन्हें मैसेज और ओटीपी भी मिल जाता है, लेकिन इसके बाद डिलीवरी नहीं होती। कई बार डिलीवरी मैन फोन तक नहीं उठाते, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ जाती है।

गैस एजेंसियों पर उमड़ी भीड़

जब घर तक सिलिंडर नहीं पहुंचता, तो मजबूर होकर लोग गैस एजेंसियों का रुख करते हैं। शहर के कई इलाकों में एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर ज्यादा है कि उन्हें डिजिटल सिस्टम पर भरोसा करने को कहा जाता है, लेकिन जब जरूरत होती है तो वही सिस्टम जवाब दे जाता है। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसियों में सही जानकारी भी नहीं दी जाती।

प्रशासन की सख्ती शुरू

बढ़ती शिकायतों को देखते हुए जिला पूर्ति विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। जिला पूर्ति अधिकारी ने गैस कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत अपनी डिलीवरी व्यवस्था को सुधारें और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराएं।

इसके तहत Indian Oil Corporation Limited, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited से जुड़े अधिकारियों को पत्र भेजकर जवाब तलब किया गया है।

क्या है जमीनी हकीकत?

जमीनी स्तर पर स्थिति काफी जटिल नजर आ रही है। एक तरफ कंपनियां दावा कर रही हैं कि गैस की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता लगातार परेशानी झेल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सप्लाई चेन में कहीं न कहीं अटक रही है। डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में गड़बड़ी, डिलीवरी स्टाफ की कमी या लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट की कमजोरी इसके पीछे कारण हो सकते हैं।

कॉमर्शियल गैस की किल्लत और बढ़ी

घरेलू गैस के साथ-साथ कॉमर्शियल गैस की स्थिति और भी खराब बताई जा रही है। होटल, ढाबे, अस्पताल और छोटे उद्योगों को समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा।

कई व्यापारियों का कहना है कि उन्हें सीमित संख्या में ही सिलिंडर दिए जा रहे हैं, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है। इससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।

कालाबाजारी की आशंका

जब भी किसी जरूरी चीज की कमी होती है, तो कालाबाजारी की संभावना बढ़ जाती है। मेरठ में भी ऐसी आशंकाएं सामने आ रही हैं।

हालांकि, पूर्ति विभाग ने इस पर सख्ती दिखाते हुए जांच शुरू कर दी है। गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और बिना सही प्रक्रिया के किसी को सिलिंडर न दें।

उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानी

इस पूरी स्थिति का सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ रहा है। जिन घरों में एक ही सिलिंडर होता है, वहां गैस खत्म होने के बाद खाना बनाना तक मुश्किल हो जाता है।

महिलाओं को खासतौर पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों को अस्थायी रूप से दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो महंगे और असुविधाजनक होते हैं।

सिस्टम में सुधार की जरूरत

यह समस्या सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह अन्य जिलों में भी फैल सकती है।

सरकार और कंपनियों को मिलकर एक मजबूत सिस्टम तैयार करना होगा, जिसमें बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक हर प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।

क्या हो सकता है समाधान?

डिलीवरी ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाए

उपभोक्ताओं को सही समय पर अपडेट दिया जाए

एजेंसियों पर निगरानी बढ़ाई जाए

शिकायत निवारण तंत्र को तेज किया जाए

इन कदमों से काफी हद तक समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

Meerut में एलपीजी गैस की समस्या ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ डिजिटल सिस्टम बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

जब तक उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिलेगी, तब तक उनकी नाराजगी बढ़ती रहेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन और गैस कंपनियां इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और लोगों को राहत कब तक मिलती है।

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