हिमाचल प्रदेश

जयराम ठाकुर का हमला—‘नेतृत्व संकट से जूझ रही AAP, हिमाचल में आर्थिक हालात गंभीर’

समाचार क्यारी (हिमाचल प्रदश)

हिमाचल प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सरकार दोनों पर तीखा निशाना साधते हुए कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। एक विस्तृत बातचीत में उन्होंने जहां आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे कथित असंतोष और नेतृत्व संकट की बात कही, वहीं हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।

जयराम ठाकुर ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर विश्वास तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि यही कारण है कि पार्टी में टूट-फूट की स्थिति बन रही है। उनके अनुसार, कई नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता पार्टी छोड़कर अन्य दलों में जा रहे हैं, वे किसी दबाव में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से यह फैसला ले रहे हैं। ठाकुर का कहना था कि ये लोग लंबे समय से पार्टी के भीतर घुटन महसूस कर रहे थे और उन्हें एक ऐसे मंच की तलाश थी, जहां उनकी बात सुनी जाए। उन्होंने भाजपा को एक लोकतांत्रिक पार्टी बताते हुए कहा कि यहां कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। उन्होंने इसे ‘आर्थिक आपातकाल’ जैसी स्थिति करार देते हुए कहा कि सरकार के पास कर्मचारियों को समय पर वेतन देने तक के संसाधन नहीं बचे हैं। उनका आरोप था कि सरकार को विधायकों और मंत्रियों के वेतन तक को टालना पड़ रहा है, जो इस बात का संकेत है कि वित्तीय स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता (डीए) देने में भी सरकार असमर्थ नजर आ रही है। यह स्थिति किसी भी राज्य के लिए गंभीर मानी जाती है, क्योंकि इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है।

राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके मुताबिक, जब उनकी सरकार थी, तब हिमाचल प्रदेश पर करीब 69 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों पर बढ़ते बोझ के रूप में बताया और कहा कि अगर इसी तरह कर्ज बढ़ता रहा, तो राज्य की अर्थव्यवस्था को संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

वर्तमान कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के पास कोई ठोस योजना नजर नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल समय बिताने में लगी हुई है और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। उनके अनुसार, कई योजनाएं या तो बंद हो चुकी हैं या फिर कागजों तक सीमित रह गई हैं।

केंद्र सरकार की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कांग्रेस के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें कहा जाता है कि केंद्र से सहयोग नहीं मिल रहा। ठाकुर ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत धारणा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, वे केंद्र सरकार की सहायता से ही संभव हो पा रहे हैं। उन्होंने सड़क, जल आपूर्ति और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में केंद्र से लगातार वित्तीय सहायता मिल रही है।

चुनावी वादों को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस सरकार को घेरा। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान जनता से कई बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अब तक उनमें से एक भी पूरी तरह से पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में वादे पूरे नहीं हुए, लेकिन अन्य राज्यों में जाकर यह दावा किया जा रहा है कि सभी गारंटियां पूरी कर दी गई हैं। इसे उन्होंने जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर जयराम ठाकुर ने कहा कि उनकी पार्टी इस विषय को लेकर गंभीर है और देशभर में जनजागरण अभियान चलाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की जरूरत है और समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी हैं और आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और शालीनता बनाए रखने पर भी जोर दिया। राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा दिए गए एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में बोलते समय शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कई बार ‘स्लिप ऑफ टंग’ हो जाता है, जो मानवीय है, लेकिन ऐसे मामलों में उसे स्वीकार करना और भविष्य में सावधानी बरतना जरूरी है।

अपने पूरे बयान में जयराम ठाकुर ने लोकतंत्र, मीडिया की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका बेहद अहम होती है और उस पर किसी भी प्रकार का दबाव लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है।

अंत में उन्होंने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में देश और राज्यों की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा आगामी चुनावों में मजबूत स्थिति में रहेगी और जनता का समर्थन उसे मिलेगा।

कुल मिलाकर, जयराम ठाकुर के इस बयान ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर उन्होंने विपक्षी दलों पर तीखे आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं भी व्यक्त कीं। अब देखना यह होगा कि इन आरोपों पर सत्ताधारी दल किस तरह प्रतिक्रिया देता है और आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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