उत्तर प्रदेश

रिश्तों का खून: मामी-भांजे के प्रेम ने ली सास की जान, दफन राज खोलने कब्र से निकाला गया शव

समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश, लखनऊ)

राजधानी लखनऊ के काकोरी क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने इंसानी रिश्तों पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बहू पर आरोप है कि उसने अपने ही घर में खून की ऐसी साजिश रची, जिसमें उसकी सास की जान चली गई। वजह बनी एक ऐसा प्रेम संबंध, जिसे समाज कभी स्वीकार नहीं करता—मामी और भांजे का रिश्ता। इस रिश्ते को बचाने के लिए बहू ने वह कदम उठाया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

इब्राहिमगंज गांव में रहने वाली 65 वर्षीय शांति देवी की मौत पहले सामान्य लग रही थी। परिवार ने बताया कि वह बीमार थीं और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन इस कहानी के पीछे छिपा सच कुछ और ही था, जो धीरे-धीरे सामने आया और पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

चुपचाप दफनाया गया शव, उठे शक के सवाल

शांति देवी की मौत के बाद उनके शव को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जल्दबाजी में खेत में दफना दिया गया। शुरुआत में किसी को कोई शक नहीं हुआ, लेकिन गांव के कुछ लोगों को यह बात खटकने लगी कि इतनी जल्दी अंतिम संस्कार क्यों किया गया।

कुछ ही दिनों बाद परिवार के एक रिश्तेदार ने पुलिस को सूचना दी कि मामला सामान्य नहीं है और बुजुर्ग महिला को जहर दिया गया है। इस सूचना ने पुलिस को सतर्क कर दिया और जांच की दिशा बदल गई।

कब्र से निकला सच

जांच के दौरान जब हत्या की आशंका पुख्ता हुई, तो प्रशासन से अनुमति लेकर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शांति देवी के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। यह दृश्य बेहद संवेदनशील था—चारों ओर भीड़, पुलिस की सख्ती और जमीन के अंदर दफन एक राज, जो अब बाहर आने वाला था।

करीब तीन घंटे की कड़ी मेहनत के बाद शव को बाहर निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मौत की असली वजह क्या थी।

शक की सुई बहू पर

जांच के दौरान पुलिस को सबसे पहले शक मृतका की बहू शालिनी पर हुआ। पूछताछ में सामने आया कि उसका अपने ही रिश्ते के भांजे करन के साथ प्रेम संबंध था। यह रिश्ता समाज और परिवार की मर्यादाओं के खिलाफ था, जिसे शांति देवी सख्ती से नकारती थीं।

बताया जा रहा है कि शालिनी और करन अक्सर चोरी-छिपे मिलते थे और एक-दूसरे के साथ रहने की योजना बना रहे थे। लेकिन सास का विरोध उनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गया था।

साजिश का खतरनाक अंजाम

पुलिस के मुताबिक, शालिनी ने अपने प्रेमी करन के साथ मिलकर शांति देवी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। 5 अप्रैल की रात, जब घर में सभी लोग मौजूद थे, तब शालिनी ने खाना बनाते समय रोटी में जहर मिला दिया और उसे अपनी सास को खिला दिया।

खाना खाने के कुछ ही समय बाद शांति देवी की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 6 अप्रैल को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार ने बिना किसी संदेह के शव को दफना दिया, मानो सब कुछ सामान्य हो।

आधी रोटी बनी गवाह

घटनास्थल से पुलिस को एक अहम सबूत मिला—आधी खाई हुई रोटी। इसी रोटी को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। माना जा रहा है कि इसी में जहर मिलाया गया था। अगर रिपोर्ट में जहर की पुष्टि होती है, तो यह केस में सबसे मजबूत कड़ी बन जाएगी।

इसके साथ ही, शव से लिए गए विसरा सैंपल की जांच भी की जा रही है, जिससे यह साफ हो सके कि शरीर में कौन सा जहर मौजूद था।

कबूलनामे ने खोले राज

पुलिस ने जब शालिनी से सख्ती से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक सच छिपा नहीं सकी। उसने अपना अपराध कबूल कर लिया और बताया कि सास उसके प्रेम संबंध में बाधा बन रही थीं, इसलिए उसने यह कदम उठाया।

यह कबूलनामा पुलिस के लिए अहम साबित हुआ, लेकिन अभी भी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं, जिनके लिए पुलिस जांच कर रही है।

फरार आरोपी की तलाश

इस मामले में करन भी मुख्य आरोपी है, जो घटना के बाद से फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। उन्नाव जिले के औरास क्षेत्र में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गांव में डर और चर्चा

इस घटना के बाद गांव में डर और हैरानी का माहौल है। लोग यह सोचकर सन्न हैं कि एक बहू अपने ही परिवार के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश कैसे रच सकती है। बुजुर्गों का कहना है कि आज के समय में रिश्तों की मर्यादा खत्म होती जा रही है।

समाज के लिए सबक

यह घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है। जब रिश्तों में विश्वास और नैतिकता खत्म हो जाती है, तो ऐसे खौफनाक परिणाम सामने आते हैं।

पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद कई और खुलासे होने की संभावना है।

यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने रिश्तों को सही दिशा में ले जा रहे हैं या फिर कहीं हम भी ऐसे रास्ते पर चल पड़े हैं, जहां से वापस लौटना मुश्किल हो जाता है।

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