हरियाणा

विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वालों पर शिकंजा, हरियाणा में लागू हुआ नया सख्त कानून

हरियाणा सरकार ने विदेश में नौकरी दिलाने और मोटी कमाई का सपना दिखाकर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंटों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए नया कानून लागू कर दिया है। लंबे समय से राज्य में विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी, नकली वीजा, फर्जी दस्तावेज और मानव तस्करी जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। कई परिवार अपनी जमा पूंजी गंवाने के बाद भी इंसाफ के लिए भटकते रहे। अब सरकार ने ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है।

सरकार द्वारा लागू किए गए ‘हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स (अमेंडमेंट) एक्ट 2026’ के तहत अब कोई भी ट्रैवल एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने, भर्ती कराने या रोजगार उपलब्ध कराने का दावा नहीं कर सकेगा। अगर कोई एजेंट ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होगा और कड़ी सजा दी जाएगी।

नए कानून के मुताबिक ट्रैवल एजेंटों की भूमिका केवल टूर और ट्रैवल सेवाओं तक सीमित रहेगी। वे अब केवल टिकट बुकिंग, टूर पैकेज और यात्रा व्यवस्था जैसे काम ही कर सकेंगे। विदेश में रोजगार से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का दावा करना सीधे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

सरकार ने इस कानून में बेहद कड़े दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करता है, नकली दस्तावेज तैयार करता है या मानव तस्करी में शामिल पाया जाता है तो उसे सात से दस साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही दो से पांच लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बिना रजिस्ट्रेशन एजेंट का काम करने वालों को भी नहीं बख्शा जाएगा। ऐसे मामलों में दो से सात साल तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान रखा गया है। इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने वाले एजेंटों की संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी ताकि पीड़ितों को मुआवजा दिया जा सके।

इस कानून की सबसे खास बात ‘लोकपाल सिस्टम’ को माना जा रहा है। अब ठगी का शिकार होने वाले लोगों को पुलिस थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पीड़ित सीधे लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकेंगे। वहां मामले की सुनवाई होगी और जरूरत पड़ने पर ही पुलिस कार्रवाई की जाएगी। इससे शिकायतों का तेजी से समाधान होने की उम्मीद है।

दरअसल पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा के कई जिलों में विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले सामने आए थे। कई एजेंट युवाओं को कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप भेजने का झांसा देकर लाखों रुपये वसूल लेते थे। बाद में या तो फर्जी वीजा पकड़ाया जाता था या युवाओं को विदेश में अवैध तरीके से भेज दिया जाता था।

सरकार का कहना है कि यह कानून आम लोगों को सुरक्षित करने के लिए लाया गया है। खासकर गांवों और छोटे शहरों के युवा विदेश जाकर नौकरी करने का सपना देखते हैं और इसी का फायदा ठग एजेंट उठाते हैं। अब सरकार ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना चाहती है।

केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने पहले राज्य के पुराने कानून पर आपत्ति जताई थी। मंत्रालय का कहना था कि विदेश रोजगार और उत्प्रवास से जुड़े मामलों को पहले से ही केंद्र का ‘उत्प्रवास अधिनियम 1983’ नियंत्रित करता है। इसलिए राज्य और केंद्र के कानूनों में टकराव की स्थिति बन रही थी।

अब संशोधित कानून में साफ कर दिया गया है कि यदि किसी मामले में राज्य और केंद्र के कानून के बीच विवाद होता है तो केंद्र सरकार का कानून ही प्रभावी रहेगा। इससे कानूनी अस्पष्टता भी खत्म हो जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि नए कानून से फर्जी एजेंटों पर लगाम लगेगी और विदेश जाने का सपना देखने वाले युवाओं को राहत मिलेगी। साथ ही लोगों को जागरूक रहने और किसी भी एजेंट को पैसे देने से पहले उसकी जांच करने की सलाह भी दी गई है।

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