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हरियाणा में मिड डे मील में बच्चों को परोसा गया खराब राजमा, VIDEO वायरल; स्कूल शिक्षा विभाग पर उठे गंभीर सवाल

टोहाना | हरियाणा समाचार
हरियाणा में सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील (Mid Day Meal) की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़ा और चिंताजनक मामला सामने आया है। फतेहाबाद जिले के टोहाना क्षेत्र के बिदाईखेड़ा गांव स्थित एक राजकीय स्कूल में बच्चों के लिए बनाए जा रहे मिड डे मील में खराब और रंग छोड़ चुका राजमा पाया गया। इस पूरे मामले का वीडियो स्कूल की मिड डे मील इंचार्ज अध्यापिका ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

वीडियो सामने आने के बाद न सिर्फ अभिभावकों में नाराजगी है, बल्कि शिक्षा विभाग और मिड डे मील योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राजमा का रंग उतरते ही खुली पोल

जानकारी के अनुसार, स्कूल में मिड डे मील के तहत बच्चों के लिए राजमा-चावल बनाए जाने थे। इसके लिए रसोई में राजमा को पहले की तरह भिगोया गया। लेकिन कुछ समय बाद ही राजमा का रंग पूरी तरह से उतर गया, जिससे साफ हो गया कि राजमा खराब और निम्न गुणवत्ता का है।

मिड डे मील इंचार्ज अध्यापिका पूनम ने जब यह देखा तो तुरंत इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की। वीडियो में साफ दिख रहा है कि राजमा का पानी गहरे रंग में बदल गया है, जो सामान्य स्थिति नहीं होती।

अध्यापिका ने वीडियो बनाकर की कार्रवाई की मांग

 

अध्यापिका पूनम ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। अगर यह खराब राजमा बच्चों को खिला दिया जाता, तो उन्हें फूड पॉइजनिंग या पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मिड डे मील के तहत मिलने वाले राशन की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

एक महीने से विवादों में मिड डे मील की गुणवत्ता

हरियाणा सरकार द्वारा राजकीय स्कूलों में भेजे जा रहे मिड डे मील राशन की गुणवत्ता पिछले करीब एक महीने से विवादों में बनी हुई है। कहीं दाल खराब निकल रही है, तो कहीं चावल और सब्जियों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

बिदाईखेड़ा का यह मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि यह गांव भाजपा नेता और पूर्व पंचायत एवं विकास मंत्री देवेंद्र बबली का पैतृक गांव बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब एक प्रभावशाली नेता के गांव में यह हाल है, तो अन्य दूरदराज के स्कूलों की स्थिति क्या होगी।

विद्यालय अध्यापक संघ ने भी उठाई आवाज

इस मामले में विद्यालय अध्यापक संघ हरियाणा ने भी नाराजगी जाहिर की है। संघ की राज्य सचिव पूनम कुमारी ने बताया कि खराब मिड डे मील को लेकर 30 जनवरी को ही खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई थी।

उन्होंने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है, जब खराब राशन की शिकायत सामने आई हो। बावजूद इसके सप्लाई एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

खंड शिक्षा अधिकारी को दी गई शिकायत

विद्यालय की ओर से यह मामला जगदीश शेवड़ा, खंड शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में लाया गया है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बच्चों के लिए भेजा गया राजमा खाने योग्य नहीं था और अगर समय रहते ध्यान न दिया जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

प्रिंसिपल ने दी प्रतिक्रिया

स्कूल के प्रिंसिपल शमशेर सिंह ने बताया कि वे फिलहाल छुट्टी पर हैं, लेकिन उन्हें मिड डे मील इंचार्ज द्वारा खराब राजमा की सूचना दे दी गई है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूरी जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी को दी जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

अध्यापिका द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में गुस्सा फैल गया। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि—

  • क्या बच्चों को जानबूझकर खराब खाना परोसा जा रहा है?
  • क्या सप्लायर की गुणवत्ता जांच नहीं होती?
  • और क्या शिक्षा विभाग सिर्फ कागजों में ही निरीक्षण करता है?

कई यूजर्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए सरकार से तत्काल जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप

मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक आहार देकर स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना और कुपोषण से लड़ना है। लेकिन इस तरह के मामले योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि खराब दाल या सब्जी खाने से बच्चों में—

  • उल्टी-दस्त
  • पेट दर्द
  • फूड पॉइजनिंग
  • और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

सप्लाई सिस्टम और मॉनिटरिंग पर सवाल

इस पूरे मामले ने मिड डे मील के सप्लाई चेन सिस्टम और निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि—

  • राशन की खरीद कहां से हो रही है?
  • क्या सप्लाई से पहले गुणवत्ता जांच होती है?
  • और अगर शिकायतें आ रही हैं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

हरियाणा ही नहीं, देश के कई राज्यों में पहले भी मिड डे मील में खराब भोजन मिलने के मामले सामने आते रहे हैं। कहीं कीड़े मिले, तो कहीं सड़ा हुआ अनाज। इन घटनाओं के बावजूद सिस्टम में स्थायी सुधार नहीं हो पा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

अब तक शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लोगों का कहना है कि अगर वीडियो वायरल न होता, तो शायद यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता।

निष्कर्ष

टोहाना के बिदाईखेड़ा गांव के राजकीय स्कूल में मिड डे मील के दौरान खराब राजमा मिलने का मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यह सिर्फ एक स्कूल या एक गांव की बात नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।

जब तक मिड डे मील की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी, पारदर्शी सप्लाई सिस्टम और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।

अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है और क्या वास्तव में बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल पाएगा या नहीं।

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