उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद अग्निकांड: सपनों के घर राख, आंखों के सामने उजड़ते आशियाने देख रो पड़े लोग

समाचार क्यारी (उत्तर प्रदेश ,गाजियाबाद)

गाजियाबाद। सुबह की शुरुआत जहां आम दिनों की तरह होनी थी, वहीं अचानक मची अफरा-तफरी ने गाजियाबाद के गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी के लोगों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने कुछ ही देर में कई परिवारों के सपनों को राख में बदल दिया। जिन घरों को लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई और मेहनत से बनाया था, वे उनकी आंखों के सामने जलते रहे और लोग बेबस खड़े होकर सिर्फ आंसू बहाते रह गए।

घटना में आठ से ज्यादा फ्लैट प्रभावित हुए, जबकि चार फ्लैट पूरी तरह से जलकर खाक हो गए। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि इन फ्लैटों में से तीन में परिवार रह रहे थे। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में उसने पूरे टावर को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते फ्लैटों से उठती लपटें और घना धुआं पूरे इलाके में फैल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगते ही सोसायटी में हड़कंप मच गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे। कई लोग अपने जरूरी सामान तक नहीं निकाल पाए। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में डर साफ देखा जा सकता था। हर कोई अपने परिवार को सुरक्षित निकालने की कोशिश में लगा था।

सोसायटी के एओए (Apartment Owners Association) के पदाधिकारियों ने बताया कि जिन फ्लैटों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, उनमें कमल पालीवाल, अशोक वर्मा, राघव कुमार, कमल अरोड़ा और सुधांशु गर्ग के फ्लैट शामिल हैं। ये फ्लैट पूरी तरह से जल गए और इनमें रखा सारा सामान राख हो गया। आसपास के फ्लैट भी इस आग से अछूते नहीं रहे। कई घरों के दरवाजे, खिड़कियां, शीशे और बालकनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि धुएं की वजह से कई फ्लैटों की दीवारें काली पड़ गईं।

घटना के बाद का दृश्य बेहद भावुक करने वाला था। जिन लोगों के घर जले, वे अपने टूटे हुए सपनों के बीच खड़े होकर रोते नजर आए। महिलाओं की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। कमल अरोड़ा ने भर्राए गले से बताया कि जिस घर को उन्होंने सालों की मेहनत से बनाया था, उसे इस तरह जलते देखना किसी बुरे सपने से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि हम कुछ भी नहीं बचा पाए, सब कुछ खत्म हो गया।

इस मुश्किल घड़ी में सोसायटी के लोगों ने एकजुटता की मिसाल पेश की। दूसरे टावरों के निवासी तुरंत मदद के लिए आगे आए। किसी ने पीड़ित परिवारों को गले लगाकर सांत्वना दी, तो किसी ने खाने-पीने का इंतजाम किया। युवाओं ने अपने दोस्तों को संभाला, जबकि महिलाओं ने एक-दूसरे को ढांढस बंधाया।

आग लगने के बाद बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो गई। एओए ने एहतियात के तौर पर तुरंत बिजली की सप्लाई बंद करवा दी, ताकि आग और न फैल सके। हालांकि इससे पूरे टावर में अंधेरा छा गया और लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आग की वजह से पानी की पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे अन्य टावरों में भी पानी की आपूर्ति बाधित हो गई।

घटना के बाद जिन लोगों के घर पूरी तरह से जल गए थे, उन्हें अस्थायी रूप से सोसायटी के क्लब हाउस में ठहराया गया। वहां एओए ने खाने-पीने और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की। आसपास की सोसायटियों के लोग भी मदद के लिए आगे आए और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने की कोशिश की।

स्थानीय निवासी जनकराज नरूला ने बताया कि इस दुख की घड़ी में पूरी सोसायटी एक परिवार की तरह खड़ी रही। हर किसी ने अपने स्तर पर मदद करने की कोशिश की। लोगों ने न सिर्फ खाना और पानी उपलब्ध कराया, बल्कि मानसिक रूप से भी पीड़ित परिवारों को संभालने का प्रयास किया।

एओए के अध्यक्ष कुंजेश परिहार ने बताया कि आग लगने के तुरंत बाद पूरी टीम सक्रिय हो गई थी। सबसे पहले सोसायटी के फायर सिस्टम का इस्तेमाल कर आग बुझाने की कोशिश की गई। इसके बाद दमकल विभाग को सूचना दी गई, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद भी टीम ने हर फ्लैट की जांच की, ताकि कहीं कोई खतरा बाकी न रह जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि डी टावर के छठे फ्लोर से नीचे के फ्लैटों पर भी आग का असर पड़ा है, हालांकि वहां नुकसान कम हुआ है। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। सभी निवासी सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

फिलहाल सोसायटी में सामान्य स्थिति बहाल करने का काम जारी है। बिजली और पानी की सप्लाई को फिर से शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिन परिवारों के घर पूरी तरह से जल गए हैं, उनके लिए आगे की व्यवस्था की जा रही है। कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं, जबकि कुछ अभी भी क्लब हाउस में ठहरे हुए हैं।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सुरक्षा के इंतजाम कितने जरूरी हैं। हालांकि सोसायटी में फायर सिस्टम मौजूद था, लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उसे काबू करने में समय लग गया। ऐसे में भविष्य में और मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत महसूस की जा रही है।

कुल मिलाकर, यह हादसा उन परिवारों के लिए एक गहरा घाव बन गया है, जिन्होंने अपने सपनों का घर खो दिया। अब उनके सामने फिर से जिंदगी को पटरी पर लाने की चुनौती है। लेकिन इस मुश्किल समय में लोगों का साथ और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

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